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UP News: 91.69 लाख का नुकसान, जल निगम के मुख्य अभियंता के खिलाफ जांच; दो टेंडर में हुई ये लापरवाही

Wed, 09 Oct 2024 11:13 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Wed, 09 Oct 2024 11:13 AM IST
सार

Varanasi News: जल निगम ग्रामीण के मुख्य अभियंता के खिलाफ कार्रवाई की गई है। प्रबंध निदेश ने इस बाबत एक पत्र भी जारी किया है। 

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Loss of 91 lakhs investigation against Chief Engineer Jal Nigam in varanasi Negligence two tenders
इस मामले की जांच संयुक्त प्रबंध निदेशक प्रशासन करेंगे। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दो टेंडरों के जरिये 91.69 लाख रुपये के विभागीय नुकसान के आरोप में जल निगम ग्रामीण के मुख्य अभियंता विश्वेश्वर प्रसाद के खिलाफ जांच होगी। इसकी मंजूरी शासन से मिल गई है। इस आशय का पत्र जल निगम ग्रामीण के प्रबंध निदेशक डॉ. राजशेखर ने जारी किया है। इस मामले की जांच संयुक्त प्रबंध निदेशक प्रशासन राजेश कुमार प्रजापति को दी गई है।

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प्रबंध निदेशक के मुताबिक, भगवानपुर में बैठने वाले मुख्य अभियंता ने मूनछपरा पेयजल योजना के दो टेंडर में से एक टेंडर की दरें स्वीकृत कीं। जो कि टेंडर प्रक्रिया का उल्लंघन है। सिवानकला पेयजल योजना निर्माण के लिए पहले टेंडर का अनुबंध गठित नहीं कराया। इससे विभाग को 74.70 लाख रुपये की क्षति हुई। 
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इसी प्रकार शिवरामपुर पेयजल योजना में पहले कम टेंडरकर्ता का अनुबंध नहीं कराया गया। इस वजह से 16.99 लाख रुपये की वित्तीय क्षति हुई है। बलिया की आठ पेयजल परियोजनाओं में सकरापुरा, सरायां, बहादुरपुर, मिठवार, कपुरी, शंकरपुर, टीका देउरी, नागपुर का वैरिएशन शासनादेश और वित्तीय नियमों के खिलाफ स्वीकृत कर दिया।

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नगर निगम, जलकल और जल निगम को अपनी लाइनों का पता ही नहीं 
नगर निगम, जलकल और जल निगम को अपनी ही सीवर, पेयजल लाइनों की जानकारी नहीं है। नगर निगम के पास तो सीवर लाइनों का नक्शा तक नहीं है। ऐसी स्थिति में समस्या तो आएगी ही। इसी वजह से नगर निगम और सेतु निगम में टकराव की नौबत आई है। 

सेतु निगम के सेवानिवृत्त अधिकारी एके सिंह ने बताया कि जब काम शुरू कराया गया था तो जल निगम और जलकल विभाग अपनी लाइनों का एलाइंमेंट नहीं बता पा रहे थे। जहां लाइन बताते थे, उतने एरिया को छोड़कर जब जेसीबी चलाई जाती तो दूसरी जगह पर लाइनें टूट जाती थीं। ये लोग अपनी कॉलर बचाने के लिए सेतु निगम पर ठीकरा फोड़ रहे हैं। 

समन्वय की कमी से टकराव, नोटिस भेजा: समन्वय की कमी से जन्मी सीवर समस्या पर नगर निगम और सेतु निगम आमने-सामने आ गए हैं।  सरैया डाट पुल के नीचे सीवर जाम की समस्या के समाधान के लिए नगर आयुक्त अक्षत वर्मा ने मंगलवार को सेतु निगम के मुख्य परियोजना प्रबंधक को पत्र जारी किया। 

मुख्यमंत्री योगी ने दिए है निर्देश
पत्र में हवाला दिया गया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता में शामिल कज्जाकपुरा आरओबी से जुड़ी समस्याओं का गंभीरता पूर्वक संज्ञान लेते हुए निर्माण कार्य पूरा कराएं और बकाया धनराशि जारी करें।  बीते एक साल से डीजल और मोटर पंप लगाकर सीवर निकाला जा रहा है। इस पर हुए खर्च भी उपलब्ध कराएं। 

किसी भी प्रकार की प्रतिकूल स्थिति पैदा होने पर सेतु निगम का उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए मामले को शासन स्तर पर भेजा जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी सेतु निगम की होगी। 

निर्माणाधीन वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन के बीच रेलवे क्राॅसिंग कज्जाकपुरा पर आरओबी का निर्माण कार्य किया जा रहा है। जलकल की ओर से पूर्व में सेतु निर्माण विभाग की ओर से चिह्नित कराए गए स्थल पर बिछी पेयजल और सीवर लाइन को जगह-जगह क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। इस वजह से मुख्य मार्ग कज्जाकपुरा से सरैया पर अत्यधिक जलभराव हो रहा है। लोगों को आने जाने में दिक्कत हो रही है। 

लिक्विड सीमेंट बहाकर सीवर लाइन को किया जाम: निगम के पत्र के अनुसार सेतु निगम की ओर से पाइलिंग के दौरान सीवर लाइनें क्षतिग्रस्त कर दी गईं हैं। सोनकर बस्ती, दाल मिल बस्ती के मुख्य मार्ग पर सीवर ओवरफ्लो की समस्या है। इसके लिए जलकल की ओर से अस्थायी रूप से पंप लगाकर स्थिति को सामान्य किया जा रहा है। अब तक सेतु निगम की ओर से कोई समाधान नहीं किया गया।

इसी प्रकार सरैया रेलवे डाट पुल तक पेयजल लाइनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। इस वजह से घरों में मिट्टी-बालू युक्त जलापूर्ति हो रही है। लिक्विड सीमेंट बहाकर सीवर लाइन को जाम कर दिया गया है। जल निकासी की पाइप लाइन को मिट्टी, बालू और सीमेंट बहाकर चोक कर दिया गया। 

बोले अधिकारी
अभी मुझे ज्वाइन किए आठ दिन हुए हैं। अभी तक कोई पत्र नहीं मिला है। लेकिन, पत्र में जिन बिंदुओं पर निगम ने ध्यान आकर्षण कराया होगा, उसका निस्तारण करने के साथ जवाब दिया जाएगा। - मिथिलेश कुमार, मुख्य परियोजना प्रबंधक, सेतु निगम

लाइन फिर से होगी शिफ्ट
निगम के पत्र के अनुसार पहले आरओबी की सिंगल पियर डिजाइन थी। बाद में इसे टू पियर डिजाइन में बदला गया। पूर्व में शिफ्ट कराई गई पाइपलाइन को डेढ़ मीटर और शिफ्ट करना पड़ेगा। सेतु निगम ने अनुमति मांगी थी। जलकल ने दो साल पहले अनुमति दे दी थी। लेकिन, अब तक सेतु निगम ने लाइन शिफ्ट नहीं करवाई। शिफ्ट कराने के लिए 1.91 करोड़ रुपये का आगणन जलकल ने भेजा था। 

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