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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Lord Vishwaeshwar case of Gyanvapi Order was to settle it in 6 months

Varanasi News: ज्ञानवापी का लॉर्ड विश्वेश्वर केस ; 6 महीने में निपटारे का था आदेश, बीत गए 16 महीने

Mon, 21 Apr 2025 06:29 AM IST
नितीश कुमार पांडेय अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: नितीश कुमार पांडेय Updated Mon, 21 Apr 2025 06:29 AM IST
सार

ज्ञानवापी का लॉर्ड विश्वेश्वर केस को छह महीने में निपटारे का आदेश था लेकिन समय ज्यादा हो गया लिहाजा अब चर्चा होने लगी है। बता दें कि इस मामले में सुनवाई फिर से होगी। जानकारी के अनुसार पक्षकार बनाए जाने सहित अन्य बिंदुओं को लेकर दिए गए प्रार्थना पत्रों से देरी हुई।
 

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Lord Vishwaeshwar case of Gyanvapi Order was to settle it in 6 months
ज्ञानवापी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

ज्ञानवापी से संबंधित वर्ष 1991 के लॉर्ड विश्वेश्वर के केस को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 दिसंबर 2023 को सिविल जज (सीनियर डिवीजन / फास्ट ट्रैक कोर्ट) की अदालत को छह महीने में निस्तारित करने का आदेश दिया था। मगर, लगातार नए-नए प्रार्थना पत्रों के दाखिल होने और उनकी सुनवाई की वजह से 16 महीने बाद भी केस निस्तारित नहीं किया जा सका। एक बार फिर सोमवार को लॉर्ड विश्वेश्वर मामले की सुनवाई होनी है।

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15 अक्तूबर 1991 को प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लॉर्ड विश्वेश्वर का केस दाखिल किया गया था। इसके जरिये ज्ञानवापी परिसर में एक प्राचीन मंदिर के अस्तित्व होने और हिंदुओं के पूजा-पाठ, राग-भोग के अधिकार की मांग की गई। मुकदमे के मूल वादी पंडित सोमनाथ व्यास, रामरंग शर्मा और हरिहर पांडेय का निधन हो चुका है।
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अक्तूबर 2019 से लॉर्ड विश्वेश्वर की ओर से उनके वाद मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी अदालत में पैरवी कर रहे हैं। मुकदमे के निस्तारण में हो रही देरी पर अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने कहा कि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद वर्ष 2019 में वह वाद मित्र नियुक्त किए गए तो किसी को कोई आपत्ति नहीं थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि जिला अदालत मुकदमे का निस्तारण छह महीने में करे।
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अब अलग-अलग लोग मुकदमे में पक्षकार बनने के लिए अर्जी देने लगे हैं। यह अर्जी भी दी गई कि मुकदमे का वाद मित्र ही वह न रहें। लगातार प्रार्थना पत्रों के दाखिल होने के कारण अदालत भला कैसे मुकदमे का निस्तारण करे? अदालत ने भी हाईकोर्ट को अवगत करा दिया है कि लॉर्ड विश्वेश्वर के केस का जल्द निस्तारण संभव नहीं है, इसलिए अब उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है।

अनुरोध किया है कि ज्ञानवापी से संबंधित लॉर्ड विश्वेश्वर के प्राचीन केस की सुनवाई हाईकोर्ट में ही हो। इस पर जल्द सुनवाई हो सकती है।


एएसआई रिपोर्ट पर भी सुनवाई नहीं
ज्ञानवापी से संबंधित एएसआई की सर्वे रिपोर्ट तत्कालीन जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में 18 दिसंबर 2023 को दाखिल की गई थी। तब से अब तक एएसआई की रिपोर्ट पर अदालत में चर्चा नहीं हो सकी है। इसी तरह से वर्ष 2021 में दाखिल मां शृंगार गौरी की पूजा-पाठ से संबंधित केस भी निस्तारण नहीं किया जा सका है।


हिंदू पक्ष की राखी सिंह के अधिवक्ता अनुपम द्विवेदी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। इसमें कहा गया है कि ज्ञानवापी से संबंधित सभी मुकदमों की सुनवाई एक साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट में हो। इस वजह से सुनवाई लंबित है।

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