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Varanasi News: एकांतवास में विश्राम कर रहे भगवान जगन्नाथ, काढ़े का लगा भोग
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जगन्नाथ मंदिर में काढ़े का प्रसाद लेने के लिए भक्तों की भीड़। स्वयं
- फोटो : Police
ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि पर भक्तों द्वारा अत्यधिक स्नान कराए जाने से अस्वस्थ हुए भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को मंगलवार को काढ़े का भोग लगा। प्रभु को लगे काढ़े के भोग को ग्रहण करने के लिए भक्तों की भीड़ लगी रही। प्रभु को 14 जुलाई तक काढ़े भोग लगेगा। अंतिम दिन परवल के जूस का भोग लगाया जाएगा।
अस्सी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ सहित तीनों देव विग्रहों को सोमवार की रात में ही प्रतीकात्मक रूप से एकांतवास प्रस्थान कर गए। मंगलवार को दोपहर तीन बजे से उनके काढ़े के भोग की प्रक्रिया शुरू हुई। मंदिर के प्रधान पुजारी राधेश्याम पांडेय ने दोपहर में काढ़े का भोग तैयार कर तीनों विग्रहों का पूजन अर्चन कर भोग लगाया।
प्रभु को भोग लगे काढ़े का वितरण शाम चार बजे से मंदिर परिसर में हुआ। प्रसाद लेने के लिए दूर-दराज से भक्त पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि इस प्रसाद को लेने के लिए जिन भक्तों को जानकारी होती है वह देश के किसी कोने में हों, वे प्रसाद लेने जरूर आते हैं। पूर्वांचल और बिहार से ज्यादा भक्त आते हैं।
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धार्मिक मान्यता है कि भगवान के इस औषधीय प्रसाद को ग्रहण करने से स्वास्थ्य लाभ होता है। सर्दी खांसी, पेट सहित हर तरह की बीमारी दूर हो जाती है। राधेश्याम पांडेय ने बताया कि 14 जुलाई को भगवान के स्वस्थ होने के बाद उनका श्रंगार कर दर्शन पूजन होगा। 15 जुलाई की शाम उनकी डोली यात्रा निकलेगी।
मिट्टी के चूल्हे पर तैयार करते हैं काढ़ा
पुजारी राधेश्याम पांडेय ने बताया कि काढ़े के प्रसाद को मिट्टी के चूल्हे पर पारंपरिक तरीके से बनाया जाता है। काढ़े में कालीमिर्च, लौंग, छोटी और बड़ी इलायची, जायफल, खांडसारी, तुलसी, कच्ची चीनी आदि सामग्रियों को डाला जाता है। एक घंटे में तैयार होता है।
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अस्सी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ सहित तीनों देव विग्रहों को सोमवार की रात में ही प्रतीकात्मक रूप से एकांतवास प्रस्थान कर गए। मंगलवार को दोपहर तीन बजे से उनके काढ़े के भोग की प्रक्रिया शुरू हुई। मंदिर के प्रधान पुजारी राधेश्याम पांडेय ने दोपहर में काढ़े का भोग तैयार कर तीनों विग्रहों का पूजन अर्चन कर भोग लगाया।
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प्रभु को भोग लगे काढ़े का वितरण शाम चार बजे से मंदिर परिसर में हुआ। प्रसाद लेने के लिए दूर-दराज से भक्त पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि इस प्रसाद को लेने के लिए जिन भक्तों को जानकारी होती है वह देश के किसी कोने में हों, वे प्रसाद लेने जरूर आते हैं। पूर्वांचल और बिहार से ज्यादा भक्त आते हैं।
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धार्मिक मान्यता है कि भगवान के इस औषधीय प्रसाद को ग्रहण करने से स्वास्थ्य लाभ होता है। सर्दी खांसी, पेट सहित हर तरह की बीमारी दूर हो जाती है। राधेश्याम पांडेय ने बताया कि 14 जुलाई को भगवान के स्वस्थ होने के बाद उनका श्रंगार कर दर्शन पूजन होगा। 15 जुलाई की शाम उनकी डोली यात्रा निकलेगी।
मिट्टी के चूल्हे पर तैयार करते हैं काढ़ा
पुजारी राधेश्याम पांडेय ने बताया कि काढ़े के प्रसाद को मिट्टी के चूल्हे पर पारंपरिक तरीके से बनाया जाता है। काढ़े में कालीमिर्च, लौंग, छोटी और बड़ी इलायची, जायफल, खांडसारी, तुलसी, कच्ची चीनी आदि सामग्रियों को डाला जाता है। एक घंटे में तैयार होता है।