UP: गंगाजल से 16 घंटे भीगे जगन्नाथ, पड़े बीमार, अब 15 दिन करेंगे विश्राम; 15 जुलाई को नगर भ्रमण पर निकलेंगे
Rathyatra Mela: 108 कलशों के गंगाजल से 16 घंटे तक हुए महाभिषेक के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के बीमार पड़ने की परंपरा के तहत उन्हें 15 दिन विश्राम कराया जाएगा। इस दौरान काढ़े का भोग लगाया जाएगा। 15 जुलाई को महाप्रभु नगर भ्रमण पर निकलेंगे, जिसके लिए श्रद्धालुओं में उत्साह है।
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Varanasi News: ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और बहन सुभद्रा ने गणेश स्वरूप में दर्शन दिए। भक्तों ने गंगा, सरस्वती, बद्रीनाथ धाम से गुजरने वाले गंगा नदी के जल से भगवान का अभिषेक किया और सुख समृद्धि की कामना की। जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट की अगुवाई में अस्सी घाट से निकली जलयात्रा में 108 कलशों में गंगाजल भरकर श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और तीनों विग्रहों का जलाभिषेक किया।
जलाभिषेक का क्रम रात 11 बजे तक चला। महाप्रभु लगातार 16 घंटे भीगने से बीमार हो गए। भगवान 15 दिनों तक अज्ञातवास (विश्राम) में रहेंगे। मंगलवार से 14 जुलाई तक स्वस्थ होने के लिए उन्हें काढ़े का भोग लगाया जाएगा। साल में ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि पर ही भक्तों को भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र को स्पर्श करने और उन्हें स्नान कराने का अवसर मिलता है।
मंदिर के प्रधान पुजारी पं. राधेश्याम पांडेय ने सुबह 5:13 बजे से गणेश स्वरूप में प्रकट हुए तीनों विग्रहों से भगवान गणेश का मुखौटा हटाकर शृंगार किया गया। तुलसीदल, गुलाबी वस्त्र धारण करवाकर विविध नैवेद्य अर्पित कर विधिवत पूजा कर आरती की। इसके बाद जलाभिषेक शुरू हुआ। ट्रस्ट के अध्यक्ष पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह, सचिव शैलेष त्रिपाठी की अगुवाई में अस्सी घाट से महिलाओं व पुरुषों ने गंगा स्नानकर मिट्टी के 108 कलशों में गंगाजल भरकर मंदिर पहुंचे। जलाभिषेक के लिए दोपहर तक भक्तों की कतार लगी रही।
दोपहर में एक बजे भोग आरती के बाद मंदिर के पट खोल दिए गए। दोपहर में तीन बजे से रात 11 बजे शयन आरती तक जलाभिषेक और दर्शन-पूजन का क्रम चला। पं. राधेश्याम पांडेय ने बताया कि 15 दिन आराम करने के बाद मंदिर से डोली में बैठकर भगवान भक्तों को दर्शन देने निकलेंगे।जलाभिषेक यात्रा में बृजेश सिंह के साथ उनकी पत्नी एमएलसी अन्नपूर्णा सिंह, उनके पुत्र सिद्धार्थ सिंह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक सुखदेव त्रिपाठी, हरीश वालिया, नवीन शिशिर मालवीय रामयश मिश्र, जगन्नाथ, दिलीप मिश्रा, आशु त्रिपाठी आदि रहे।
16 जुलाई से शुरू होगा रथयात्रा मेला
पं. राधेश्याम पांडेय ने बताया कि प्रभु को काढ़े का भोग लगाकर शाम चार बजे से भक्तों में प्रसाद के रूप में वितरित होगा। 15 जुलाई को मंगला आरती के साथ प्रभु के दर्शन शुरू हो जाएंगे। प्रभु की डोली यात्रा मंदिर से शाम चार बजे निकलेगी, जो परंपरागत रास्तों से होकर रथयात्रा स्थित पं. बेनीराम बाग पहुंचेगी।
16 जुलाई से रथयात्रा मेला शुरू हो जाएगा जो 18 जुलाई तक चलेगा। मेले के दौरान सुबह पांच बजे आरती, दोपहर 12 बजे भोग आरती, मध्यरात्रि 12 बजे शयन आरती होगी। 19 जुलाई को बहुड़ा यात्रा व मंदिर में तीनों विग्रहों के दोबारा विराजमान होने के साथ मेले का समापन हो जाएगा।
स्वामी सदानंद महाराज ने मंदिर निर्माण के लिए 11 लाख रुपये दिए
सुमेरूपीठ के पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती, स्वामी सदानंद महाराज ने भगवान जगन्नाथ का जलाभिषेक किया। दर्शन पूजन कर विश्व के कल्याण की कामना की। इस दौरान स्वामी सदानंद महाराज ने मंदिर निर्माण के लिए 11 लाख का चेक ट्रस्ट के अध्यक्ष बृजेश सिंह को दिया।