Varanasi News: मोक्षनगरी काशी के महाश्मशान में शवों की कतार, अव्यवस्थाओं के बीच अंतिम संस्कार के लिए कई घंटे का इंतजार
मोक्षनगरी काशी के मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार के लिए शवों का आना अचानक बढ़ गया है, जिसकी वजह से अंतिम संस्कार के लिए लोगों को चार-चार घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है।
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मोक्षनगरी काशी के महाश्मशान में शवों की लंबी कतार लग रही है। शवदाह करने वाले लोगों को चार-चार घंटे का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। गर्मी के कारण आम दिनों की अपेक्षा शवदाह करने वालों की संख्या में दोगुने की बढ़ोतरी हुई है। मणिकर्णिका तीर्थ पर प्लेटफॉर्म की कमी व निर्माण कार्य के कारण शवदाह संस्कार के लिए जगह कम पड़ रही है।
भयानक गर्मी के बावजूद शवदाह के लिए आने वाले लोगों के लिए न छांव का इंतजाम है न पेयजल का। मणिकर्णिका घाट पर पिछले सप्ताह से रोजाना 100 से 120 शव पहुंच रहे हैं। बनारस ही नहीं पूर्वांचल के जिलों के साथ ही बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश से लोग अंतिम संस्कार के लिए काशी आते हैं।
रोजाना आ रहे 120 से ज्यादा शव
मुक्ति व मोक्ष की मान्यता होने के कारण शवदाह करने वालों की संख्या जहां आम दिनों में 40-50 हुआ करती थीं, अब 120 तक पहुंच चुकी है। सोमवार की शाम से लेकर मंगलवार की देर रात तक मणिकर्णिका घाट पर 135 से अधिक शवदाह हुए। पटना से आए रविशंकर ने बताया कि वह अपने दादा का शव लेकर मणिकर्णिका आए थे।
उन्होंने बताया कि साढ़े तीन घंटे से ज्यादा हो गए लेकिन उनका नंबर नहीं आया। लकड़ी ठेकेदार हरि ने बताया कि आम दिनों में जहां 40-50 शव आते थे लेकिन अब इसकी संख्या दोगुनी हो चुकी है। नीचे प्लेटफार्म पर 12 और ऊपर के प्लेटफार्म पर 10 शव एक साथ जलाए जा रहे हैं। पांच और छह प्लेटफार्म ऐसे हैं, जिनपर जलाने की अनुमति नहीं है। कुछ प्लेटफार्म की जालियां खराब होने के कारण उन पर शवदाह नहीं हो रहा है।
आबादी के बीच शव दफनाने का विरोध
ईश्वरपुर गांव में मंगलवार सुबह आबादी के बीच निजी जमीन में वृद्धा का शव दफनाने को लेकर विवाद हो गया। एसडीएम पिंडरा और थाने की पुलिस ने आबादी के बाहर शव दफनाने का आश्वासन देकर ग्रामीणों को शांत कराया। वृद्धा के शव को पुत्र ने अपने बगीचे की जमीन में दफनाया।
स्वास्थ्य विभाग में सीएमएस पद से सेवानिवृत्त गांव के रहने वाले डॉ. जयनरेश गौड़ की मां सुरजकली (85) का सुबह निधन हो गया। रिटायर्ड चिकित्सक आबादी के बीच स्थित निजी जमीन में शव दफनाने के लिए गड्ढा की खोदाई करा रहे थे। इसका ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीएम पिंडरा राजीव राय मौके पर पहुंचे। रिटायर्ड चिकित्सक ने अपनी गौड़ी परंपरा के अनुसार शव को दफनाने का हवाला दिया। वहीं, ग्रामीण अपनी बात पर अडिग हो गए। अंत में चिकित्सक ने अपने निजी जमीन में शव दफनाने पर सहमति दी।