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लोलार्क कुंड पर सन्नाटा, गंगा स्नान कर निभाई परंपरा
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कोरोना संक्रमण के कारण काशी में एक-एक करके कई परंपराओं पर काली छाया पड़ रही है। लोलार्क षष्ठी पर भी प्रशासन की सख्ती के कारण सन्नाटा पसरा रहा, लेकिन श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर परंपरा निभाई। वहीं भदैनी पंप घाट पर 50 रुपये प्रति बाल्टी पानी श्रद्धालुओं को बेचा गया। पुलिस और पीएसी लोलार्क कुंड पर तैनात रही और आने वाले श्रद्धालुओं को अस्सी घाट भेज दिया गया।
सोमवार को लोलार्क षष्ठी पर भदैनी स्थित लोलार्क कुंड पूरी तरह से सील रहा। ग्रामीण क्षेत्रों और आसपास के लोग जब कुंड पहुंचे तो उन्हें पहले ही पुलिस ने रोक दिया। सूचना के अभाव में ग्रामीण अंचलों की महिलाएं रविवार रात से ही भदैनी क्षेत्र के आसपास जमा हो गई थीं। सुबह जब वह स्नान के लिए लोलार्क कुंड पहुंचीं तो उन्हें निराशा हाथ लगी। श्रद्धालु जब कुंड पर नहीं पहुंचे तो उन्होंने अस्सी घाट का रुख कर लिया। गंगा स्नान कर प्रतीक रूप में कड़ाही देने की परंपरा का निर्वहन किया।
भोर से ही महिला और पुरुष गंगा स्नान करने अस्सी घाट पर पहुंचने लगे थे। घाट पर काफी संख्या में लोग जुटने लगे तो पुलिस ने अस्सी घाट पर सख्ती बढ़ा दी। नहान के लिए आने वाले लोगों को सुबह में दो घंटे का समय दिया गया। उसके बाद आने वाले लोगों को गंगा स्नान का भी अवसर नहीं मिला। पुलिस और पीएसी को कई बार अस्सी घाट पर भीड़ को हटाने के लिए सख्ती करनी पड़ी।
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लोलार्क छठ वास्तव में भगवान भास्कर की आराधना का पर्व है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस विशेष तिथि पर भगवान सूर्य की किरणें विशिष्ट रूप से बनाए गए कुंड को विशेष आभा और ओज देती हैं और कुंड में स्नान से संतान प्राप्ति का योग बनता है। कुंड के ऊपर दीवार पर उकेरे गए सूर्य की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता के अनुसार संतति की कामना से कुंड में डुबकी लगाने वाले श्रद्धालु अपने गीले वस्त्र, आभूषण, कुंड मे ही छोड़ देते हैं। नुकीली सुईयों से बिंधे हुए फल चढ़ाने का भी विधान है।
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सोमवार को लोलार्क षष्ठी पर भदैनी स्थित लोलार्क कुंड पूरी तरह से सील रहा। ग्रामीण क्षेत्रों और आसपास के लोग जब कुंड पहुंचे तो उन्हें पहले ही पुलिस ने रोक दिया। सूचना के अभाव में ग्रामीण अंचलों की महिलाएं रविवार रात से ही भदैनी क्षेत्र के आसपास जमा हो गई थीं। सुबह जब वह स्नान के लिए लोलार्क कुंड पहुंचीं तो उन्हें निराशा हाथ लगी। श्रद्धालु जब कुंड पर नहीं पहुंचे तो उन्होंने अस्सी घाट का रुख कर लिया। गंगा स्नान कर प्रतीक रूप में कड़ाही देने की परंपरा का निर्वहन किया।
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भोर से ही महिला और पुरुष गंगा स्नान करने अस्सी घाट पर पहुंचने लगे थे। घाट पर काफी संख्या में लोग जुटने लगे तो पुलिस ने अस्सी घाट पर सख्ती बढ़ा दी। नहान के लिए आने वाले लोगों को सुबह में दो घंटे का समय दिया गया। उसके बाद आने वाले लोगों को गंगा स्नान का भी अवसर नहीं मिला। पुलिस और पीएसी को कई बार अस्सी घाट पर भीड़ को हटाने के लिए सख्ती करनी पड़ी।
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लोलार्क छठ वास्तव में भगवान भास्कर की आराधना का पर्व है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस विशेष तिथि पर भगवान सूर्य की किरणें विशिष्ट रूप से बनाए गए कुंड को विशेष आभा और ओज देती हैं और कुंड में स्नान से संतान प्राप्ति का योग बनता है। कुंड के ऊपर दीवार पर उकेरे गए सूर्य की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता के अनुसार संतति की कामना से कुंड में डुबकी लगाने वाले श्रद्धालु अपने गीले वस्त्र, आभूषण, कुंड मे ही छोड़ देते हैं। नुकीली सुईयों से बिंधे हुए फल चढ़ाने का भी विधान है।