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UP BJP: इन सीटों पर पूर्व सांसद राजेश मिश्रा पर दांव लगा सकती है भाजपा, इस सीट से चुनाव लड़ने की ज्यादा अटकलें
Wed, 06 Mar 2024 12:07 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 06 Mar 2024 12:07 PM IST
सार
कांग्रेस का दामन छोड़ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए पूर्व सांसद राजेश मिश्रा पर भाजपा भदोही सीट से दांव लगा सकती है। राजेश मिश्रा के भाजपा में शामिल होने के बाद अगली सियासी पारी को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वाराणसी से सांसद रहे राजेश मिश्रा ने कांग्रेस का दामन छोड़ दिया और मंगलवार को दिल्ली में भाजपा की सदस्यता ले ली। पार्टी में शामिल होने के बाद उनके भदोही से चुनाव लड़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
साथ ही भाजपा के कुछ दिग्गजों का दावा है कि उन्हें पार्टी देवरिया या उसके आसपास किसी ब्राह्मण बहुल लोकसभा सीट से उतार सकती है। राजेश मिश्रा के पार्टी छोड़ने के कयास कई दिनों से लगाए जा रहे थे। फरवरी में राजेश मिश्रा ने सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन होने के बाद नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।
दावा किया था कि कांग्रेस का संगठन खत्म हो गया है, बूथ स्तर के कार्यकर्ता नहीं बचे हैं। पिछले तीस साल में कांग्रेस की स्थिति काफी खराब हुई है। इसी के बाद वे पिछले एक सप्ताह से दिल्ली में डेरा जमाए हुए थे।
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भाजपा पदाधिकारियों का मानना है कि चंदौली के साथ ही भदोही में भी ब्राह्मण चेहरा ही पार्टी उतारे। यहां से गोरखनाथ पांडेय सहित कई ब्राह्मण चेहरे संसद पहुंच चुके हैं। दूसरी तरफ उनके देवरिया से भी मैदान में उतारे जाने की चर्चा है। फिलहाल अंतिम निर्णय भाजपा नेतृत्व करेगा।
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साथ ही भाजपा के कुछ दिग्गजों का दावा है कि उन्हें पार्टी देवरिया या उसके आसपास किसी ब्राह्मण बहुल लोकसभा सीट से उतार सकती है। राजेश मिश्रा के पार्टी छोड़ने के कयास कई दिनों से लगाए जा रहे थे। फरवरी में राजेश मिश्रा ने सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन होने के बाद नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।
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दावा किया था कि कांग्रेस का संगठन खत्म हो गया है, बूथ स्तर के कार्यकर्ता नहीं बचे हैं। पिछले तीस साल में कांग्रेस की स्थिति काफी खराब हुई है। इसी के बाद वे पिछले एक सप्ताह से दिल्ली में डेरा जमाए हुए थे।
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भाजपा पदाधिकारियों का मानना है कि चंदौली के साथ ही भदोही में भी ब्राह्मण चेहरा ही पार्टी उतारे। यहां से गोरखनाथ पांडेय सहित कई ब्राह्मण चेहरे संसद पहुंच चुके हैं। दूसरी तरफ उनके देवरिया से भी मैदान में उतारे जाने की चर्चा है। फिलहाल अंतिम निर्णय भाजपा नेतृत्व करेगा।
राजेश 2004 से 2009 तक सांसद रहे थे और इससे पहले विधान परिषद सदस्य भी रहे। कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री मणिंद्र मिश्रा ने कहा कि पूर्व सांसद का वजूद कांग्रेस से ही था और उनके जाने से पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।
कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि उनके जाने से गुटबाजी खत्म हुई। पार्टी ने कई बार उन्हें मौका दिया मगर वे हर बार चुनाव हारे और टिकट बंटवारे में हस्तक्षेप कर कमजोर प्रत्याशियों को आगे कर पार्टी का नुकसान किया है।