पीएम मोदी के सामने नहीं चला प्रियंका का जादू, पूर्वांचल में धराशायी रही कांग्रेस
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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का जादू मतदाताओं पर नहीं चला। पूर्वांचल की ज्यादातर सीटों पर कांग्रेस कहीं भी सीधी लड़ाई में नजर नहीं आई। हर जगह तीसरे नंबर पर ही संघर्ष करती रही।
प्रियंका का रोड शो भी वैसा ही रहा, जिस तरह पहले तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी या राहुल गांधी का रोड शो रहा था। उनके रोड शो में भी भीड़ जुटी, लेकिन यह भीड़ मतों में नहीं बदल पाई।वाराणसी में कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय ने पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करते हुए डेढ़ लाख से अधिक वोट हासिल किए।
मिर्जापुर के प्रत्याशी ललितेश पति त्रिपाठी 90,991, गोरखपुर से मधुसूदन तिवारी 22,855, सलेमपुर से डॉ. राजेश मिश्र 26,970, भदोही में रमाकांत 23,945, चंदौली से कांग्रेस समर्थित शिवकन्या कुशवाहा 22,190 मत हासिल कर तीसरे स्थान पर रहीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि हार के लिए प्रत्याशी जिम्मेदार हैं। पूर्वांचल में कांग्रेस का संगठन भी धराशायी है। मतदान के दिन ज्यादातार पोलिंग बूथ के आसपास पार्टी की चौकी तक नहीं थी।
चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने पूर्वांचल में पार्टी की मजबूती के लिए प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में उतारा। प्रियंका ने जिम्मेदारी स्वीकारते हुए होली से पहले प्रयागराज से वाराणसी तक गंगा यात्रा की और फिर अंतिम चरण के मतदान से ठीक पहले वाराणसी और मिर्जापुर में रोड शो किया। यह भी चर्चा चली कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रत्याशी होंगी। उन्होंने खुद भी रायबरेली से लेकर वायनाड तक इस बात को हवा दी।
प्रत्याशी चयन में हुई देरी
बाद में प्रियंका के चुनाव लड़ने की बात खारिज हुई और 25 अप्रैल को पूर्व विधायक अजय राय को प्रत्याशी बनाया गया। प्रत्याशी चयन में इतना विलंब हुआ कि ना तो पार्टी और ना ही प्रत्याशी को प्रचार के लिए पर्याप्त समय मिला। यह भी कांग्रेस पर भारी पड़ा। ठीक ऐसे ही 2014 में भी अजय राय के नाम की घोषणा काफी देर से की गई थी।