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कोरोना वायरस: बिना जांच कराए हजारों लोग घर पहुंचे, शहर से लेकर गांव तक बढ़ा खतरा

Sun, 29 Mar 2020 09:38 AM IST
गीतार्जुन गौतम शशांक मिश्र, अमर उजाला, वाराणसी
शशांक मिश्र, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 29 Mar 2020 09:38 AM IST
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Lockdown in varanasi thousands of people reached home without investigation in purvanchal coronavirus
वाराणसी पहुंचे मजदूर। - फोटो : अमर उजाला।

रोजी-रोटी के चक्कर में मुंबई, सूरत और कोलकाता जैसे महानगरों में रहने वाले पूर्वांचल के हजारों लोग घर लौट आए हैं। परदेस से लौटे ये लोग अपने हैं, लेकिन कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे के बीच इन्होंने हजारों परिवारों में डर पैदा करने का काम किया है। प्रशासन की अनदेखी भी इसकी वजह है। लॉकडाउन से पहले महानगरों से बड़ी संख्या में अलग-अलग जिलों में लौटे लोगों की अब तक जांच नहीं हो पाई है। यह लापरवाही मुश्किल पैदा कर सकती है।

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कोरोना संक्रमण की आशंका बढ़ने के बाद बनारस से लेकर बलिया तक करीब 50 हजार लोग मुंबई, सूरत, कोलकाता और अन्य बड़े शहरों से लौटे हैं। हजारों लोग दबे पांव आए और अपने घरों में दुबक गए।
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ऐसे में न इनकी पहचान हो पा रही है और न इन्हें क्वारंटीन करने की कोई कवायद। अगर इनमें से कुछ लोग भी संक्रमित हो तो क्या होगा, यह सहज समझा जा सकता है। दरअसल, हजारों की संख्या में बाहर से कस्बों और गांवों में लौटे लोग लाखों लोगों के बीच घुलमिल गए हैं।

Lockdown in varanasi thousands of people reached home without investigation in purvanchal coronavirus

मिर्जापुर, भदोही, गाजीपुर, मऊ, बलिया तक कोरोना वायरस को लेकर भय के बीच भ्रांतियां भी हैं और सन्नाटा पसरा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनता कर्फ्यू के आह्वान के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूरत, मुंबई और ऐसे अन्य बड़े शहरों से लौटने वालों को लेकर पूरे प्रदेश के अधिकारियों को आगाह किया था। मगर, लॉकडाउन से पहले और कुछ समय बाद तक बड़ी संख्या में लोग गांवों में पहुंचे।

मुख्यमंत्री की चिंता पर भी नहीं जागे अफसर
मुख्यमंत्री कार्यालय ने 22 मार्च को लिखित निर्देश जारी किया था कि जौनपुर, मिर्जापुर, मऊ, कुशीनगर, गाजीपुर, अयोध्या, बस्ती, बाराबंकी, देवरिया, बलिया, भदोही में मुंबई व सूरत आदि शहरों से बड़ी संख्या में लोग लौटे हैं। अपील की गई थी कि बाहर से आने वाले ज्यादा लोगों से नहीं मिले। मगर, इन जिलों के प्रशासन ने ना तो बाहर से आए लोगों की सूची बनाई और ना ही उन्हें चिन्हित किया। जबकि इन्हें कम से कम 14 दिन सेल्फ आइसोलेशन या क्वारंटीन किया जाना चाहिए था। मगर, अफसर मुख्यमंत्री की चिंता के बाद भी नहीं जागे।

गांव वालों ने बनाई दूरी
प्रशासन की लापरवाही से गांवों में अविश्वास की स्थिति है। कई गांवों में बाहर से आने वाले लोगों से स्थानीय लोगों ने दूरी बनाई है। मिर्जापुर के सहसेपुर गांव के एक व्यक्ति ने बताया कि करीब 20 परिवारों के अलग-अलग सदस्य सूरत और मुंबई में रहते हैं। गांव में लौट तो आएं हैं मगर उनसे कोई बात करने को तैयार नहीं है। जांच-पड़ताल के बाद आए होते तो हमें क्या दिक्कत थी, मगर पता नहीं वहां से चीन वाला वायरस लेकर न लौटे हों।

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