वाराणसी: लॉकडाउन के बीच घर पर निखार रहे हुनर, साथ ही परिजनों संग बिता रहे समय
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वैश्विक महामारी को रोकने के लिए देश में लॉकडाउन किया गया है। इस दौरान लोग अपने घरों में रह रहें हैं, क्योंकि किसी को बाहर जाने की इजाजत नहीं है। वाराणसी में लॉकडाउन के समय में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक घर में रहकर अपनों के साथ समय बिता रहे हैं।
इसके साथ ही बच्चे अपने हुनर को निखार रहे हैं। महिलाएं-पुरुष और बुजुर्ग भी घर पर रहकर काम करने के टाइमपास कर रहे हैं, जिससे उनका घर में रहने में मन लग सके। वहीं कुछ बच्चे ऐसे हैं जो घर पर रहकर अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। वह कभी कोई पेंटिंग करते हैं या चित्र बनाते हैं। तो कोई संगीत और गायन भी कर रहा है। जिससे कि उनका घर पर मन लग सके, साथ ही वह अपनी प्रतिभा को निहार रहे हैं।
कुछ ऐसे ही शालिनी अपना समय बिता रही हैं और प्रतिभा को निखार रही हैं। शालिनी अपने माता-पिता के साथ बनारस में 12 साल से हैं। उन्होंने बारहवीं तक पढ़ाई वाराणसी के आरएस कॉन्वेंट सैनिक स्कूल से की है। शालिनि बताती हैं कि वह गणित में कमजोर हैं और गाणित बिल्कुल भी पसंद नहीं है। वह शुरू से ही सर्जन डॉक्टर बनना चाहती थी, उनका मन शुरू से ही बायोलॉजी में लगता है। इसेक बाद उन्होंने अपने मन की सुनकर फाइन आर्ट्स में आने का निर्णय लिया। शालिनी बताती हैं कि उनके पिता का कहना था कि कोई भी पढ़ाई करो बस जिंदगी में एक सफल इंसान बनो। शालिनि अपने पिता का हर सपना पूरा होते देखना चाहती हैं।
शालिनी को बारहवीं के बाद फाइन आर्ट्स विद्यापीठ गंगापुर परिसर में दाखिला मिला और पिता ने समझाया कि कोई भी कॉलेज अच्छा बुरा नहीं होता शुरुआच में ही साल न बर्बाद करते हुए गंगापुर परिसर में दाखिला लिया। वहां उनके गुरु सुमित घोष ओर शशिकांत नाग ने उनको काफी प्रेरित किया उनके मार्गदर्शन से शालिनी को सही दिशा में जाने में बहत आसानी हुई।
स्नातक पूरा करने के बाद शालिनी ने आगे की पढ़ाई के लिए विद्यापीठ मुख्य परिसर में दाखिला लिया और वहां रहकर उन्होंने कुछ करने की ठानी फिर उन्होंने शहर के चार बार गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने वाले जगदीस पिल्लई से मिली। उनके मार्ग दर्शन में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ इंडिया में नाम दर्ज कराया। शालिनी ने 551 भारत के महान विभूतियों के नाम मोतियों से लिखे और एक नया कीर्तिमान बनाया। अब शालिनी व्यवहारिक कला बीएचयू दृश्य कला संकाय एमएफए प्रथम वर्ष की छात्रा हैं। शालिनी ने फिर एक प्रयास किया और वो यूरेशिया वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी नाम दर्ज करवाने में सफल हुई। शालिनी आगे पीएचडी करना चाहती हैं और प्रोफेसर बनना चाहती हैं।
इस कोरोना महामारी के समय में 21 दिन के लॉकडाउन के तहत शालिनि प्रतिदिन नई नई कलाकृतिया बना कर लोगों को जागरूक कर रही हैं। इन्होंने प्रतिदिन अमर उजाला के समाचार पत्रों को देखा और अमर उजाला के द्वारा कोरोना से बचाव, गरीब परिवारों और लोगों के लिए अमर उजाला फाउंडेशन के तहत किए गए राहत कार्यों को अपने इलस्ट्रेशन आर्ट के माध्यम से बताया है। उनकी यह फोटो सोशल मीडिया पर काफी सराही जा रही है, जिसमें शालिनि ने समय के सभी उन लोगों को दिखाया है जो समाज और देश के लिए तन-मन-धन से समर्पित हैं।
कोरोना वायरस पर चित्र बनाती हुईं साक्षी कन्नोजिया साथ में छोटा भाई सुधांशु।
वैष्णो नगर कॉलोनी के रहने वाले सक्षम मिश्रा और श्रेया मिश्रा ने बनाई कला।