दो दिन के लॉकडाउन से आफत, पहड़िया मंडी से 200 टन आम का नहीं हुआ उठान
दो दिनों के प्रतिबंध के पहले दिन शनिवार को पहड़िया मंडी में 200 टन आम की खेप का उठान नहीं हो सका। थोक व फुटकर बिक्री सुबह 10 बजे तक ही रही। शहर में सुबह से शाम तक बिकने वाले आम की दुकानें बंद होने के कारण व्यापारियों ने पहड़िया मंडी से आम का उठान नहीं किया। आढ़तियों के अनुसार करीब 200 टन आम की बिक्री प्रभावित रही।
बनारस सहित आसपास के जनपदों में आम की खपत रोजाना 200 से 250 टन है। जून से पहले आम की आवक सिर्फ 50 से 60 टन ही था। लेकिन पश्चिमी और लखनऊ बेल्ट से आम की आवक 20 जून से बढ़ा जो, करीब 200 से 250 टन है। पहड़िया मंडी से रोजाना बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पूर्वांचल के अन्य जिलों में आम जाता है। ज्यादा माल बिहार जाता है।
बनारस है उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी आम की मंडी
आढ़तियों के अनुसार उत्तर प्रदेश में आम की सबसे बड़ी मंडी बनारस में ही लगती है। बनारस में इस समय कुंडा, मानिकपुर, ऊंचाहार, अमेठी, फैजाबाद, बाराबंकी, गोंडा, बहराइच, सीतापुर, शाहजहांपुर, लखनऊ, मलिहाबाद, रामपुर, मुरादाबाद से आम की आवक होती है। जुलाई से अगस्त के बीच में देहरादून सहित पहाड़ी इलाकों से भी आम की आवक होती है। पहड़िया मंडी सहित अन्य प्रमुख मंडियों में आम की खपत अब पहले जैसी नहीं होने से आढ़ती चिंतित हैं।
प्रतिबंध के कारण 200 टन आम का उठान नहीं हुआ। किसान चिंतित हैं। पेड़ों पर आम पककर टूट रहे। खराब हो रहे। यह प्रतिबंध बढ़ा तो आढ़तियों और किसानों दोनों को बहुत नुकसान होगा। -किशन सोनकर, अध्यक्ष, वाराणसी प्रगतिशील सब्जी-फल व्यवसायी संघ
दाएं-बाएं नियम के तहत दुकानें खुल रही थीं। वह भी बंद हो गई। आढ़ती माल मंगाकर फंस गए। बारिश में अब माल खराब होने की चिंता सता रही है। लाखों रुपये का नुकसान होना तय है। -नारायण सोनकर, संगठन मंत्री, वाराणसी प्रगतिशील सब्जी-फल व्यवसायी समिति