{"_id":"5e4326728ebc3ee5f35a88b3","slug":"life-saving-medicines-were-set-on-fire","type":"story","status":"publish","title_hn":"वाराणसीः आग के हवाले कर दी गईं जीवन रक्षक दवाएं, जांच शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वाराणसीः आग के हवाले कर दी गईं जीवन रक्षक दवाएं, जांच शुरू
Wed, 12 Feb 2020 03:40 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 12 Feb 2020 03:40 AM IST
विज्ञापन
demo pic
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले के राजकीय अस्पतालों में मरीजों को दी जाने वाली जीवन रक्षक दवाओं को रोगियों को बांटने की बजाय जंगल में आग के हवाले कर दिया गया। चुर्क पुलिस चौकी क्षेत्र में हुए इस वाकये का वीडियो मंगलवार को वायरल हुआ तो चिकित्सा महकमे में हड़कंप मच गया। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ ने मामले की जांच शुरू करा दी है।
विज्ञापन
मंगलवार की सुबह कुछ व्हाटसएप ग्रुप में दवाओं को जलाए जाने का वीडियो वायरल हुआ। थोड़ी देर बाद पता चला कि यह वीडियो चुर्क पुलिस चौकी क्षेत्र के जंगल का है। तत्काल लोगों ने इसकी जानकारी सीएमओ समेत अन्य अधिकारियों को को दी।
विज्ञापन
चर्चाओं पर गौर करें तो सोमवार की रात में कुछ स्वास्थ्य कर्मी दवाओं को लेकर जंगल में पहुंचे और आग लगा दिया। इसके बाद वहां से चलते बने। मौके पर कुछ दवाएं जलने से बच गई थी, जिसमें कुछ एक्सपायरी और कुछ दवाएं वितरित करने योग्य थी।
विज्ञापन
बताते चलें कि दवाओं की कमी अक्सर सुनने को मिलती रहती है। कई बार सामान्य दवाएं भी सरकारी अस्पतालों में नहीं मिलती है। मजबूरी में लोगों को महंगे दाम पर बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ती है।
उधर, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसके उपाध्याय का कहना है कि दवाओं में आग लगाने का मामला संज्ञान में नहीं है। किन परिस्थितियों में किसने दवाएं जंगल में ले जाकर आग के हवाले की, इसकी गहनता से जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह आश्वासन दिया गया है।
एक तरफ यह हाल है और दूसरी तरफ कई इलाके के मेडिकल कॉलेज तक में जीवन रक्षक दवाएं नहीं हैं। इस वजह से चिकित्सक मजबूरी में बाहर की दवा लिखते हैं और गरीब अपने बच्चों का मंहगे दामों पर इलाज कराने को विवश हैं। कई बार शिकायत करने के बाद भी प्रशासन मरीजों की परेशानी को नहीं समझता।