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संगीत समारोह की अंतिम निशा, संकट मोचन के दरबार में जीवंत हुए रामायण के प्रसंग

Tue, 10 Apr 2018 04:25 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Tue, 10 Apr 2018 04:25 PM IST
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Last night of sankatmochan music festival in varanasi
समारोह में रतिकांत महापात्र - फोटो : अमर उजाला
संकट मोचन संगीत समारोह की अंतिम निशा में प्रख्यात नर्तक केलुचरण महापात्र के योग्य शिष्य व पुत्र रतिकांत महापात्र ने रामायण के प्रसंगों को मंच पर सजीव किया। ओडिसी की अद्भुत प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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सोमवार को कार्यक्रम की शुरुआत राग अहीर भैरव में विलंबित तीन ताल में गणपति वंदना से हुई। ओम गं गणपत नमो नम: रचना पर राजश्री, ऐश्वर्या और रितु सेनगुप्ता ने प्रभावी भंगिमाओं के माध्यम से ओडिसी की भावपूर्ण प्रस्तुतियों से दर्शकों को मोह लिया।
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अगली कड़ी में रतिकांत महापात्रा ने शबरी के प्रसंग से दर्शकों के दिलों को भी छू लिया। अभिनय प्रधान ओडिसी नृत्य ने मंच पर जहां शबरी की पीड़ा को जीवंत किया और राम का भक्तों के प्रति अनुराग भी दर्शाया।
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शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप के महत्व को दर्शाती अगली प्रस्तुति को भी दर्शकों ने हर-हर महादेव के जयघोष से अपनी स्वीकार्यता की मुहर लगाई। शबरी और अर्धनारीश्वर का प्रसंग मल्लिका ताल और राग में पिरोया हुआ था। कार्यक्रम का समापन जटायु वध से किया गया। इस मार्मिक प्रस्तुति को रतिकांत और राजश्री ने ओडिसी की भावपूर्ण प्रस्तुतियों से जीवंत किया। 

आश्चर्य में पड़ गए श्रोता 

Last night of sankatmochan music festival in varanasi
गायन प्रस्तुत करते गुलाम मुस्तफा खान - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद दूसरी प्रस्तुति लेकर आए गुलाम मुस्तफा खान की शुरुआत तो लाजवाब थी। लेकिन समापन तक पहुंचते-पहुंचते उन्होंने परंपरा से इतर रात 10 बजे भैरवी गायन शुरू कर दिया।

इसे सुनते ही परंपराओं में विश्वास रखने वाले श्रोतागण आश्चर्य में पड़ गए। संगीत की मान्यताओं के अनुसार रात 10 से 12 के बीच यमन, चारुकेशी, पूरिया, नंद, हमीर और केदार आदि रागों का गायन किया जा सकता था।

चर्चा थी कि भैरवी के साथ एक और अनिवार्यता यह भी है कि यदि कार्यक्रम के बीच में किसी कलाकार ने भैरवी का गायन या वादन कर दिया तो आने वाले कलाकारों को भी भैरवी में ही अपनी प्रस्तुति देनी पड़ती है।
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