'मानस मसान' का अखिरी दिन, मोरारी बापू के विदा होने पर कथा प्रेमियों के छलके आंसू
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प्रेम हमारी जरूरत है और सत्य किसी भी रूप में कही भी मिले, हमें ले लेना चाहिए। भरत जैसी प्रेम मूर्ति, परम संत, पहुंचे हुए महापुरुषों को सुनने से ही प्रेम की प्राप्ति होती है। सत्संग को संकीर्णन नहीं बल्कि विश्व रूपेण बनाया जाना चाहिए। मैत्री का मनोरथ करें।
मित्र ऐसा होना चाहिए कि सुख में पीछे और दुख में हमेशा आगे आ जाए। इसी के साथ डोमरी में सतुआ बाबा की गोशाला परिसर में आयोजित कथा का समापन हो गया। बापू के विदा होने के दौरान कथा प्रेमियों की आंखों से प्रेम के आंसू छलक पड़े।
यह कथा संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से आयोजित की गई थी। बापू ने कहा कि भारत सबके साथ मैत्री की बात कर रहा है, लेकिन कुछ नासमझ इसे समझ ही नहीं रहे हैं। धर्म हमेशा मुस्कुराना चाहिए। एक दूसरे को आदर के साथ सुनने की आदत डालनी चाहिए।
आप झुकोगे तो सामने वाला भी झुकेगा। दुनिया में हारे को कोई हरा नहीं सकता है। आखिरी दिन बापू ने अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड, लंकाकांड और उत्तरकांड के प्रसंगों पर रोशनी डाली। कहा कि धर्म सिर्फ शाश्वत है।
बाल कांड का सार सुख प्राप्ति है तो अयोध्या कांड का सार प्रेम। अरण्य कांड का सार सत्संग है तो लंका कांड का सार विजय, विवेक और विभूति। प्रलय के बाद पूर्ण और शून्य ही बचेगा। आकाश और हरिनाम पूर्ण भी है और शून्य भी।
गंगा-यमुना की तरह बहती रहेगी रामकथा की धारा
व्यासपीठ पर मुख्य आयोजनकर्ता मदन पालीवाल, ट्रस्टी प्रकाश पुरोहित, महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा, सतुआ बाबा के साथ ही सहित कई गणमान्य अतिथियों ने व्यासपीठ पर पुष्प अर्पित किए। पूर्णाहुति पर मोरारी बापू ने ‘मानस मसान’ रामकथा का फल मणिकर्णिका घाट को अर्पित किया।
बापू ने कहा कि मणिकर्णिका घाट से जितने गए हैं, जितने जा रहे हैं और जितने जाएंगे उन सबको मैं मानस मसान समर्पित करता हूं। उन्होंने हर किसी का आभार जताया। लोग एक दूसरे को गले लग विदाई देते रहे। यादगार के रूप में सेल्फी लेने की होड़ मची रही।
चार्टर्ड प्लेन से महुआ रवाना हुए मोरारी बापू
दोपहर 2:10 बजे उनके विमान ने महुआ के लिए उड़ान भरी। इस दौरान उनके कथा बेड़े के साथ आए लोग अलग-अलग तीन चार्टर्ड प्लेन से रवाना हुए। कथा के बाद बापू ने मणिकर्णिका घाट के सामने लगे अपने सुसज्जित बजड़े कैलाश में विश्राम किया।
इसके बाद वह बीएचयू हेलीपैड से हेलीकॉप्टर द्वारा एयरपोर्ट पहुंचे। सबसे पहले कथा के आयोजक मिराज ग्रुप के चेयरमैन मदन पालीवाल और उनके परिजन एक चार्टर्ड प्लेन से निकले। इनके बाद मोरारी बापू के विमान ने उड़ान भरी। अंत में ग्रुप के अधिकारियों और रिश्तेदारों को अलग चार्टर्ड प्लेन से भेजा गया।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले विधान सभा चुनाव के दौरान इतनी तादाद में एक साथ चार्टर्ड प्लेन बाबतपुर एयरपोर्ट पर आए थे। एयरपोर्ट पर कथा प्रेमियों ने बापू से आशीर्वाद लेकर उनको विदा किया।