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गायन, वादन, नृत्य की अठखेलियां
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 14 Nov 2016 02:09 AM IST
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रविदास घाट पर गंगा महोत्सव की आखिरी निशा
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गंगा की लहरों संग रविवार की रात गायन, वादन, नृत्य की अठखेलियां खूब हुईं। पद्मभूषण पं. राजन मिश्र, पं. साजन मिश्र के सुरों की खुशबू से गंगा का किनारा महक उठा, तो सितार वादक निलाद्री कुमार ने नए प्रयोगों के साथ सितार के तारों को झंकृत कर संगीत प्रेमियों को मुग्ध किया। रानी खानम ने सूफियाना नृत्य से इस छटा में चार चांद लगा दिया। गंगा महोत्सव की आखिरी निशा ऐसे ही खुशनुमा लम्हों के साथ परवान चढ़ी।
शाम करीब सात बजे शुरुआत हुई रानी खानम के सूफियाना नृत्य से। रानी ने दादरा के बोल-खोलो केवड़िया महाराज.. के बोल पर सधे अंदाज में भावों-ईशारों से लय-ताल पर थिरकना शुरू किया तो तालियों की बौछार होने लगी। इसके बाद छाप तिलक सब छीनी से तोसे नैना मिलाय के... और फिर दमादम मस्त कलंदर..., तेरे इश्क नचाया ... के बोल पर सूफियान नृत्य से मन मोह लिया। इनके बाद बारी आई निलाद्री कुमार की।
उन्होंने सितार पर राग हेम विहाग की अवतारणा की। स्वरों के समन्वय के साथ उन्होंने सितार के तारों पर कई प्रयोग भी किए। तबले पर संगत की पं. शुभ नहाराज ने। अंत में पद्मभूषण पं. राजन मिश्र-पं. साजन मिश्र ने मंच संभाला। इन्होंने राग बागेश्री में तीन ताल में निबद्ध बंदिश से शुरुआत की। बोल थे- ये री ये मैं कैसे घर जाऊं...।
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अंत में एक ताल की बंदिश पर अलापचारी से संगीत प्रेमियों को मुग्ध किया। तबले पर अरविंद कुमार आजाद, हारमोनियम पर कांता प्रसाद मिश्र, सारंगी पर पं. कन्हैया लाल मिश्र ने संगत की। इस मौके पर पद्मभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र, मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण समेत तमाम लोग मौजूद थे। उधर गंगा महोत्सव अंतर्गत सांस्कृतिक संकुल, चौकाघाट में लगे गांधी शिल्प बाजार में रविवार को चहलपहल नजर आई। राहत की बात यह रही कि यहां पांच सौ व हजार के नोट स्टाल संचालकों ने स्वीकारे। लगभग साढ़े तीन हजार लोग यहां आए।
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शाम करीब सात बजे शुरुआत हुई रानी खानम के सूफियाना नृत्य से। रानी ने दादरा के बोल-खोलो केवड़िया महाराज.. के बोल पर सधे अंदाज में भावों-ईशारों से लय-ताल पर थिरकना शुरू किया तो तालियों की बौछार होने लगी। इसके बाद छाप तिलक सब छीनी से तोसे नैना मिलाय के... और फिर दमादम मस्त कलंदर..., तेरे इश्क नचाया ... के बोल पर सूफियान नृत्य से मन मोह लिया। इनके बाद बारी आई निलाद्री कुमार की।
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उन्होंने सितार पर राग हेम विहाग की अवतारणा की। स्वरों के समन्वय के साथ उन्होंने सितार के तारों पर कई प्रयोग भी किए। तबले पर संगत की पं. शुभ नहाराज ने। अंत में पद्मभूषण पं. राजन मिश्र-पं. साजन मिश्र ने मंच संभाला। इन्होंने राग बागेश्री में तीन ताल में निबद्ध बंदिश से शुरुआत की। बोल थे- ये री ये मैं कैसे घर जाऊं...।
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अंत में एक ताल की बंदिश पर अलापचारी से संगीत प्रेमियों को मुग्ध किया। तबले पर अरविंद कुमार आजाद, हारमोनियम पर कांता प्रसाद मिश्र, सारंगी पर पं. कन्हैया लाल मिश्र ने संगत की। इस मौके पर पद्मभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र, मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण समेत तमाम लोग मौजूद थे। उधर गंगा महोत्सव अंतर्गत सांस्कृतिक संकुल, चौकाघाट में लगे गांधी शिल्प बाजार में रविवार को चहलपहल नजर आई। राहत की बात यह रही कि यहां पांच सौ व हजार के नोट स्टाल संचालकों ने स्वीकारे। लगभग साढ़े तीन हजार लोग यहां आए।