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Ropeway: काशी विश्वनाथ धाम मॉडल से ली जाएंगी रोपवे की जमीनें, आज हो सकता पहला बैनामा

Mon, 03 Apr 2023 02:31 PM IST
उत्पल कांत शशांक मिश्र, अमर उजाला, वाराणसी
शशांक मिश्र, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 03 Apr 2023 02:31 PM IST
सार

वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) ने रोपवे निर्माण के लिए जमीन खरीदने का खाका तैयार कर लिया है।  रोपवे के लिए उपयोग होने वाली जमीनों को लेने के लिए काशी विश्वनाथ धाम का मॉडल अपनाया जाएगा। 

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Land for Ropeway in varanasi will be taken from Kashi Vishwanath Dham model
वाराणसी में रोपवे स्टेशन का मॉडल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी में देश के पहले और दुनिया के तीसरे पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे के लिए उपयोग होने वाली जमीनों को लेने के लिए काशी विश्वनाथ धाम का मॉडल अपनाया जाएगा। रोपवे के पांच स्टेशन और 30 टावर के लिए चिन्हित जमीनों के अधिग्रहण के बजाय आपसी सहमति से बैनामा कराया जाएगा। इसके लिए शासन ने 60 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। आपसी समझौते के आधार पर मंगलवार को पहला बैनामा भी हो सकता है।

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वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) ने रोपवे निर्माण के लिए जमीन खरीदने का खाका तैयार कर लिया है। जो तय हुआ है, उसके मुताबिक, वाराणसी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली रोपवे परियोजना को जनसहभागिता से जोड़ा गया है। जमीनों की खरीद में काशी विश्वनाथ धाम के मॉडल को लागू करने का निर्णय लिया गया है।

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1.59 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी

इसके लिए कैंट से गोदौलिया के बीच आवश्यक 1.59 हेक्टेयर जमीन को आपसी सहमति से लेने के लिए प्राधिकरण ने टीम गठित कर दी है। यह टीम जमीन मालिकों से सहमति बनाकर उनसे विकास प्राधिकरण के हक में बैनामा कराएगी। बैनामे के लिए जमीन के मालिकों से वार्ता का क्रम लगभग पूरा हो गया है। मंगलवार तक पहला बैनामा कर इसकी शुरूआत करने की तैयारी है।

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ये भी पढ़ें: वाराणसी कैंट स्टेशन का नया मॉडल तैयार, आधुनिकता का दिखेगा संगम, बनेंगे योगा सेंटर

क्या है काशी विश्वनाथ धाम मॉडल

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वाराणसी में रोपवे स्टेशन का मॉडल - फोटो : अमर उजाला

वाराणसी की सबसे बड़ी काशी विश्वनाथ परियोजना में 300 से ज्यादा संपत्तियों का निर्विवाद रूप से आपसी सहमति के आधार पर बैनामा कराया गया था। रोपवे रूट पर पड़ने वाली सरकारी जमीनें निशुल्क ली जाएंगी। इसके लिए पंजीकृत इकरारनामे के जरिये अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया जाएगा। काशी विद्यापीठ सहित अन्य सरकारी संस्थाओं से जमीन के लिए इकरारानामा कराने की तैयारी है। रोपवे के टाॅवर और स्टेशन के लिए करीब 40 संपत्तियों की आवश्यकता है। इसमें 18 संपत्तियां निजी हैं। करीब 3.7 किमी लंबी इस परियोजना में निजी जमीनों के लिए 60 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

काशी विश्वनाथ धाम मॉडल क्यों हैं जरूरी

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रोपवे की ट्रॉली - फोटो : अमर उजाला

प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, जमीन अधिग्रहण में अक्सर विवाद की स्थिति बनती है। इससे जमीन का मुआवजा देने में भी अड़चन आती है। विवाद बढ़ता है तो पूरी प्रक्रिया ठप हो जाती है। मामला अदालत तक पहुंचता है। परियोजना में देरी होती है, जबकि आपसी सहमति से जमीनों की खरीद में दिक्कत नहीं आती है। जमीन खरीद के बाद तत्काल कब्जा मिल जाता है।

काशी मॉडल पर ही अयोध्या में भी ली गईं जमीनें

अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए जमीनों की खरीद में भी काशी विश्वनाथ धाम मॉडल को ही अपनाया गया था। दरअसल, अयोध्या में जमीनों की खरीद को लेकर विवाद होने के बाद शासन के निर्देश पर यह मॉडल वहां लागू किया गया था। इसके बाद बिना किसी विवाद के रामलला के मंदिर के लिए जमीनों की खरीद पूरी कराई गई थी।

एक नजर में परियोजना

  • कुल जमीन-- 1.59 हेक्टेयर
  • निजी जमीन- 0.96 हेक्टेयर
  • सरकारी जमीन- 0.63

स्टेशन निर्माण के लिए आवश्यक जमीनों का विवरण
  1. भारत माता मंदिर- 3600 वर्ग मीटर
  2. बेसेंट थियोसॉफिकल सोसाइटी- 4000 वर्ग मीटर
  3. कैंट और गोदौलिया - 3000 वर्गमीटर
  4. प्रत्येक टाॅवर के लिए 36 वर्गमीटर

क्या बोले अधिकारी

 जिलाधिकारी एस राजलिंगम ने कहा कि रोपवे परियोजना के लिए शासन से 60 करोड़ रुपये मिल गए हैं। विकास प्राधिकरण आपसी सहमति से जमीनों का बैनामा कराएगा।  वीडीए के सचिव डा. सुनील वर्मा ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम की तरह ही रोपवे परियोजना के लिए आपसी सहमति से जमीनों के बैनामे कराए जाएंगे। इसके लिए टीम गठित कर दी गई है। मंगलवार तक पहला बैनामा हो सकता है। अप्रैल अंत तक बैनामे की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
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