वाराणसी: पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार ने थामा टीएमसी का दामन, ललितेश पति के नेतृत्व में ममता की पार्टी उतर सकती है मैदान में
पूर्व मुख्यमंत्री पं. कमलापति त्रिपाठी के पोते राजेशपति त्रिपाठी और पूर्व विधायक ललितेश पति त्रिपाठी ने सिलीगुड़ी में तृणमूल कांग्रेस की सदस्यता ली। कुछ दिनों पहले ही ललितेश ने कांग्रेस का हाथ छोड़ दिया था।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पूर्वांचल में ब्राह्मण चेहरा बने ललितेश पति त्रिपाठी ने कांग्रेस का हाथ छोड़कर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दामन थाम लिया है। कांग्रेस में चार पीढ़ियों से जुड़े रहे त्रिपाठी परिवार के तृणमूल कांग्रेस में जाने के बाद प्रदेश और पूर्वांचल की राजनीति में नए परिणाम देखने को मिलेंगे। सोमवार को पूर्व एमएलसी राजेशपति त्रिपाठी और पूर्व विधायक ललितेश पति त्रिपाठी ने सिलीगुड़ी में आयोजित समारोह में तृणमूल की सदस्यता ली।
दोनों पिता-पुत्र को तृणमूल कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सदस्यता दिलाई। ललितेश पति त्रिपाठी ने बताया कि संघर्षशील नेता के नेतृत्व में राजनीति के नए अध्याय को शुरू करने का अवसर मिला है। यह संघर्ष की नई राह है और हमने आज इसकी शुरुआत की है।
कांग्रेस छोड़ने के बाद चर्चा हो गई थी तेज
बता दें कि कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद ललितेश पति त्रिपाठी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं कि वह आखिर किसके साथ जाएंगे। तृणमूल कांग्रेस ने जिस तरह से बंगाल चुनाव में भाजपा को शिकस्त दी थी उससे देश भर में एक नया संदेश गया।
ऐसे में संभावनाएं जताई जा रही हैं कि यूपी में तृणमूल कांग्रेस ललितेश पति त्रिपाठी की अगुवाई में विधानसभा चुनाव में उतर सकती है। वहीं, राज्यसभा की राह भी औरंगाबाद हाउस के लिए खुल सकती है। हालांकि, ललितेश पति ने चुनाव लड़ने के सवाल पर कहा कि फिलहाल इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है।
चुनाव हारने के बाद ही अलग-थलग से पड़ गए थे ललितेश
प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर ताजपोशी का सपना संजोएं पूर्व मुख्यमंत्री पं. कमलापति त्रिपाठी के प्रपौत्र ललितेश चुनाव हारने के बाद ही अलग-थलग से पड़ गए थे। पार्टी ने प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी तो सौंपी लेकिन शायद यह उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के अनुरूप नहीं था। नक्सली क्षेत्र होने के बावजूद ललितेश ने मड़िहान से 2012 में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। यह उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी। युवाओं के चहेते और पूर्वांचल में बड़ा चेहरा होने के बावजूद पार्टी की ओर से ललितेश को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था