{"_id":"5db4a3a68ebc3e93b85d3934","slug":"lakshmi-pojan-varanasi-news-vns491318962","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्थिर लग्न में करें पूजन, मां लक्ष्मी करेंगी घर में वास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्थिर लग्न में करें पूजन, मां लक्ष्मी करेंगी घर में वास
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। कार्तिकेमास्यामावस्या तस्यां दीपप्रदीपनम्, शालाय ब्रह्मण: कुर्यात् स गच्छेत परंम पदम्।। ब्रह्मपुराण में लिखा है कि कार्तिक की अमावस्या को अर्द्धरात्रि के समय लक्ष्मी महारानी सद् गृहस्थों के घरों में विचरण करती हैं। दीपमालिका से लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और स्थायी निवास करती हैं। अमावस्या प्रदोषकाल से आधी रात तक रहने वाली श्रेष्ठ होती है यदि आधी रात तक न रहे तो प्रदोषव्यापिनी लेना चाहिए। स्थिर लग्न में पूजन करने से मां लक्ष्मी का आपके घर में वास होता है।
ज्योतिषाचार्य गणेश प्रसाद मिश्र के अनुसार कार्तिक कृष्ण अमावस्या को संकल्प के साथ व्रत रखें। शाम को स्नान के उपरांत वेदी बनाकर अक्षतादि से अष्टदल लिखें और उस पर लक्ष्मी का स्थापन करें। कार्तिक मास की अमावस्या को मां लक्ष्मी, भगवान गणेश का पूजन करने का विधान है। मां लक्ष्मी का पूजन स्थिर लग्न में करना चाहिए। गणेश जी के दाहिने भाग में माता महालक्ष्मी को स्थापित करना चाहिए। मोक्ष की प्राप्ति के लिए वामावर्त सूंड़ वाली, लौकिक भौतिक सुख की कामना के लिए दक्षिणावर्त सूंड़ वाली भगवान गणेश की प्रतिमा घर में स्थापित करना चाहिए। अमावस्या रविवार को दिन में 11 बजकर 51 मिनट पर लग रही है। यह प्रदोष काल में मिल रही है। अमावस्या 28 अक्तूबर को दिन में 9:44 बजे तक है जो प्रदोष काल में नहीं मिल रही है।
लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त.
ज्योतिषाचार्य पं. दीपक मालवीय के अनुसार धर्मशास्त्रों में दीपावली के पूजन में प्रदोष काल अति महत्वपूर्ण होता है। धर्मशास्त्रोक्त दीपावली प्रदोष काल एवं महानिशीथ काल व्यापिनी अमावस्या में है। प्रदोष काल का महत्व गृहस्थों एवं व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण होता है और महानिशीथ काल का तान्त्रिकों के लिए उपयुक्त होता है। इस साल अमावस्या व्यापिनी महानिशीथ काल प्राप्त हो रहा है। वैसे महानिशीथ काल की पूजा मध्यरात्रि 12:40 से 2 बजे के मध्य की जा सकती है।
विज्ञापन
ये है प्रदोष काल
दिन-रात के संयोग काल को ही प्रदोष काल कहते हैं, जहां दिन विष्णुस्वरूप हैं वहीं रात माता लक्ष्मी स्वरूपा हैं। दोनों के संयोग काल को ही प्रदोष काल कहा जाता है। इस प्रकार प्रदोष काल में दीपावली पूजन का श्रेष्ठ विधान है और प्रदोष काल में ही दीप प्रज्जवलित करना उत्तम फ ल दायक होता है। स्थिर लग्न में पूजा करना लाभप्रद होता है।
प्रदोष काल शाम 05:19 से 07: 53 बजे तक रहेगा।
पूजन एवं खाता पूजन हेतु शुभ मुहूर्त स्थिर लग्न वृश्चिक दिन में 07:59 बजे से लेकर 10:16 तक
कुम्भ स्थिर लग्न दिन में 2:09 से 3: 40 तक
वृष स्थिर लग्न रात्रि 6:45 से 8:41 तक विद्यमान रहेगा।
विज्ञापन
ज्योतिषाचार्य गणेश प्रसाद मिश्र के अनुसार कार्तिक कृष्ण अमावस्या को संकल्प के साथ व्रत रखें। शाम को स्नान के उपरांत वेदी बनाकर अक्षतादि से अष्टदल लिखें और उस पर लक्ष्मी का स्थापन करें। कार्तिक मास की अमावस्या को मां लक्ष्मी, भगवान गणेश का पूजन करने का विधान है। मां लक्ष्मी का पूजन स्थिर लग्न में करना चाहिए। गणेश जी के दाहिने भाग में माता महालक्ष्मी को स्थापित करना चाहिए। मोक्ष की प्राप्ति के लिए वामावर्त सूंड़ वाली, लौकिक भौतिक सुख की कामना के लिए दक्षिणावर्त सूंड़ वाली भगवान गणेश की प्रतिमा घर में स्थापित करना चाहिए। अमावस्या रविवार को दिन में 11 बजकर 51 मिनट पर लग रही है। यह प्रदोष काल में मिल रही है। अमावस्या 28 अक्तूबर को दिन में 9:44 बजे तक है जो प्रदोष काल में नहीं मिल रही है।
विज्ञापन
लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त.
ज्योतिषाचार्य पं. दीपक मालवीय के अनुसार धर्मशास्त्रों में दीपावली के पूजन में प्रदोष काल अति महत्वपूर्ण होता है। धर्मशास्त्रोक्त दीपावली प्रदोष काल एवं महानिशीथ काल व्यापिनी अमावस्या में है। प्रदोष काल का महत्व गृहस्थों एवं व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण होता है और महानिशीथ काल का तान्त्रिकों के लिए उपयुक्त होता है। इस साल अमावस्या व्यापिनी महानिशीथ काल प्राप्त हो रहा है। वैसे महानिशीथ काल की पूजा मध्यरात्रि 12:40 से 2 बजे के मध्य की जा सकती है।
विज्ञापन
ये है प्रदोष काल
दिन-रात के संयोग काल को ही प्रदोष काल कहते हैं, जहां दिन विष्णुस्वरूप हैं वहीं रात माता लक्ष्मी स्वरूपा हैं। दोनों के संयोग काल को ही प्रदोष काल कहा जाता है। इस प्रकार प्रदोष काल में दीपावली पूजन का श्रेष्ठ विधान है और प्रदोष काल में ही दीप प्रज्जवलित करना उत्तम फ ल दायक होता है। स्थिर लग्न में पूजा करना लाभप्रद होता है।
प्रदोष काल शाम 05:19 से 07: 53 बजे तक रहेगा।
पूजन एवं खाता पूजन हेतु शुभ मुहूर्त स्थिर लग्न वृश्चिक दिन में 07:59 बजे से लेकर 10:16 तक
कुम्भ स्थिर लग्न दिन में 2:09 से 3: 40 तक
वृष स्थिर लग्न रात्रि 6:45 से 8:41 तक विद्यमान रहेगा।