कृष्णानंद राय हत्याकांड : कहीं इस वजह से तो नहीं बरी हो गए मुख्तार अंसारी!
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भाजपा के पूर्व विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड मामले में मंगलवार को दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत ने पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया। मऊ सदर विधायक मुख्तार अंसारी प्रदेश से सैकड़ों किलोमीटर दूर पंजाब की जेल में कैद हैं, लेकिन पूर्वांचल में उनके कुनबे का रसूख बढ़ता ही चला जा रहा है।
मई में संपन्न हुए आम चुनाव में मुख्तार के बड़े भाई अफजाल अंसारी और करीबी अतुल राय सांसद चुने गए तो दूसरी ओर जो मुकदमा उनके गले की फांस बना हुआ था वह उससे बरी हो गए।
गाजीपुर जिले के युसुफपुर निवासी मुख्तार अंसारी 2006 से जेल में निरुध्द हैं और लगातार पांच बार से विधायक हैं। सेंट्रल जेल वाराणसी में निरुध्द एमएलसी बृजेश सिंह से अदावत के लिए चर्चित मुख्तार अंसारी का नाम नब्बे के दशक में आपराधिक गतिविधियों के लिए पूर्वांचल भर में चर्चाओं में आना शुरू हुआ था।
1996 में मुख्तार अंसारी पहली बार विधानसभा के लिए चुने गए। इसके बाद मुख्तार ने बृजेश सिंह की सत्ता को चुनौती देनी शुरू कर दी थी। 2000 तक इन दोनों के गैंग पूर्वांचल के सबसे बड़े गिरोह बन गए थे। 2005 में कृष्णानंद राय की हत्या के बाद बृजेश सिंह यूपी छोड़कर फरार हो गए थे और उनका गिरोह कमजोर पड़ने लगा था। मुख्तार अंसारी ने पूरे पूर्वांचल पर कब्जा जमा लिया था।
हालांकि 2006 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था लेकिन वह जेल से गैंग का संचालन करते रहे। इसी दौरान 2008 में बृजेश सिंह को ओडिशा से गिरफ्तार कर लिया गया। बागपत जेल में बीते साल मारे गए मुन्ना बजरंगी को मुख्तार अंसारी का दायां हाथ कहा जाता था।
पूर्वांचल की सियासत और जरायम जगत की गहराई से जानकारी रखने वालों का मानना है कि मुख्तार को इन दिनों एक के बाद एक सफलता मिलने से उनके कुनबे का कद बढ़ा है। आगामी दिनों में पूर्वांचल की सियासत पर इसका क्या असर होगा यह देखने लायक बात होगी।