कृष्णानंद राय हत्याकांड : जानिए क्या हुआ था 13 साल पहले, अटल बिहारी वाजपेयी को आना पड़ा था बनारस
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29 नवंबर 2005 को गाजीपुर के भांवरकोल थाना अंतर्गत सियाड़ी गांव में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय सहित सात लोगों पर एके-47 जैसे अत्याधुनिक असलहों से लगभग 400 राउंड से ज्यादा फायरिंग कर उनकी हत्या कर दी गई थी। सातों लोगों का शव पोस्टमार्टम के लिए बीएचयू लाया जाने लगा तो भाजपा विधायक के समर्थक उग्र हो गए थे और जगह-जगह तोड़फोड़ व हिंसा की गई थी।
भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के बाद बलिया से लेकर मऊ, गाजीपुर और बनारस तक उनके समर्थकों में एक हफ्ते तक जबरदस्त गुस्सा देखने को मिला था। अपने नेता की सनसनीखेज हत्या को समर्थक पचा नहीं पा रहे थे। नृशंस हत्याकांड के विरोध में समर्थकों ने जगह-जगह आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसा की थी।
वहीं, वाराणसी शहर की बात करें तो यहां समर्थकों ने लंका, भेलूपुर, कमच्छा, सिगरा, इंग्लिशिया लाइन और लहुराबीर सहित कुछेक अन्य इलाकों में जमकर उपद्रव किया था। समर्थकों का आक्रोश देखते हुए कई निजी स्कूल और कॉलेज कुछ दिनों के लिए बंद कर दिए गए थे। इसके साथ ही गाजीपुर और बनारस में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था।
समर्थक भाजपा विधायक कृष्णानंद राय का पोस्टमार्टम कराने के लिए ही नहीं तैयार हो रहे थे लेकिन किसी तरह से पुलिस ने उन्हें समझा कर मनाया था। इस दौरान गुस्साए समर्थकों को काबू कर पाना पुलिस के लिए खासा मुश्किल साबित हुआ था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार सातों लोगों के शरीर से 67 गोलियां निकाली गई थीं। पोस्टमार्टम के बाद भाजपा विधायक और अन्य छह लोगों का शव गाजीपुर जिला स्थित उनके पैतृक गांव ले जाया गया था।
भाजपा विधायक की अंतिम यात्रा मणिकर्णिका घाट के लिए निकली तो पांच किलोमीटर से ज्यादा लंबा जनसैलाब उमड़ा था। भाजपा विधायक की शवयात्रा के चलते वाराणसी-गाजीपुर मार्ग दिन भर जाम की जद में रहा था।
पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने दिया था धरना, आए थे अटल बिहारी
गाजीपुर जिले की मोहम्मदाबाद विधानसभा के विधायक कृष्णानंद राय सहित सात लोगों की हत्या की गूंज पूर्वांचल के साथ ही बिहार और नई दिल्ली तक सुनाई दी थी। सनसनीखेज हत्याकांड के विरोध में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा समय में देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जिला मुख्यालय पर 14 दिन तक धरने पर बैठे थे।
तत्कालीन सपा सरकार प्रदेश की पुलिस की जांच रिपोर्ट को सही ठहरा रही थी और भाजपा पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने पर अड़ी थी। इस दौरान जिला मुख्यालय पर राजनाथ सिंह का धरना खत्म कराने आए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि वह न्याय के लिए जनता के पास जाएंगे।
कब-क्या हुआ
- 29 नवंबर 2005 - भाजपा विधायक कृष्णानंद राय सहित सात लोगों की हत्या
- 21 फरवरी 2006 - आरोपी एजाजुल हक, अफजाल अंसारी, मुन्ना बजरंगी, अताउर्रहमान और फिरदौस के खिलाफ पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की
- 15 मार्च 2006 - पुलिस ने दूसरी चार्जशीट मुख्तार अंसारी के खिलाफ दाखिल की
- मई 2006 - भाजपा विधायक की पत्नी अलका राय की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया
- मई 2006 - अलका राय ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन देकर बताया कि साक्ष्यों के प्रस्तुतिकरण के दौरान उनकी जान को खतरा है।
- 30 अगस्त 2006 - संजीव माहेश्वरी के खिलाफ सीबीआई ने तीसरी चार्जशीट दाखिल की
- 12 दिसंबर 2006 - राकेश पांडेय और रामू मल्लाह के खिलाफ सीबीआई ने चौथी चार्जशीट दाखिल की
- 20 मार्च 2007 - पांचवीं चार्जशीट सीबीआई ने मंसूर अंसारी के खिलाफ दाखिल की
- 22 अप्रैल 2013 - सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमे की सुनवाई गाजीपुर जिला अदालत से नई दिल्ली के सेशन कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया
- 15 मार्च 2014 - छठी चार्जशीट मुन्ना बजरंगी के खिलाफ दाखिल की गई
- 22 मई 2019 - सीबीआई की अदालत ने आदेश सुरक्षित रखा
- 03 जुलाई 2019 - अदालत ने मुख्तार अंसारी सहित अन्य आरोपियों को बरी कर दिया