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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से इस बात पर नाराज हो गए थे किशन महाराज

Fri, 17 Aug 2018 12:20 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Fri, 17 Aug 2018 12:20 PM IST
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Kishan maharaj was annoyed to atal bihari vajpayee
संगीतकारों का सम्मान करते अटल जी - फोटो : file photo
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और विख्यात तबला वादक किशन महाराज के बीच का एक किस्सा बहुत ही चर्चित रहा। जब किशन महाराज अटल बिहारी वाजपेयी से नाराज हो गए। नाराजगी इतनी अधिक थी कि किशन महाराज धरना देने दिल्ली में अटल बिहारी वाजपेयी के आवास पर चले गए।
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हुआ यूं कि 1996 में नगर निगम प्रेक्षागृह में एक कार्यक्रम हुआ था। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी ने सात संगीतकारों का सम्मान किया था। इनमें उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, किशन महाराज, ज्योतिन भट्टाचार्य, सितारा देवी, गिरिजा देवी और महामहोपाध्याय मुसलगांवकर, राजेश्वर आचार्य शामिल थे।
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अपने भाषण में वाजपेयी ने बिस्मिल्लाह को भारत का रत्न और किशन महाराज को भारत का भूषण कहा था। जब प्रधानमंत्री बने तो वाजपेयी ने बिस्मिल्लाह को भारत रत्न और किशन महाराज को पद्म विभूषण दिया।
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किशन महाराज को भारत रत्न नहीं मिला तो वे नाराज हो गए और वाजपेयी के आवास पर धरना देने दिल्ली चले गए। वाजपेयी ने मुलाकात के दौरान किशन महाराज से वही 1996 का संस्मरण बताया और कहा जो मैंने उस दिन कहा था उसे पूरा किया। इसके बाद किशन महाराज बनारस लौट गए। 

उदारता के किस्से भी मशहूर

Kishan maharaj was annoyed to atal bihari vajpayee
एक कार्यक्रम में अटल बिहारी वाजपेयी - फोटो : file photo
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बहुत ही उदारमना थे। ऐसे कई किस्से हैं। शहर दक्षिणी के सात बार के पूर्व विधायक और दादा के नाम से जाने जाते श्याम देव राय चौधरी ने वाजपेयी से जुड़ा एक ऐसा ही किस्सा बताया।

एक बार बनारस में भाजपा का अधिवेशन होने वाला था। उसमें लाल कृष्ण आडवाणी के आने की सूचना थी। आडवाणी के स्वागत के लिए दादा एक माला लेकर रेलवे स्टेशन पहुंच गये। बोगी से आडवाणी बाहर निकले और उनका स्वागत माला पहनाकर कर दिया। इसके बाद पता चला कि दूसरी बोगी में वाजपेयी बैठे हैं। दूसरी माला लेने चौक आना पड़ता।

दादा संकोच करते हुए वाजपेयी के पास गये और कहा कि मेरे पास एक ही माला थी और मैंने आडवाणी को पहना दी। आपको पहनाने के लिए मेरे पास माला नहीं है। इस पर वाजपेयी बोले की माला क्या होता है आओ गले लगो। और मुझे गले लगा लिया। वह दिन आज तक नहीं भूलता है। 
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