{"_id":"66499ff360a56d790d0a7e01","slug":"kidney-transplant-pending-for-14-years-due-to-negligence-in-bhu-for-license-renewal-2024-05-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News: लाइसेंस नवीनीकरण, लापरवाही में 14 साल लटका रहा किडनी ट्रांसप्लांट, जानें- क्या है मामला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News: लाइसेंस नवीनीकरण, लापरवाही में 14 साल लटका रहा किडनी ट्रांसप्लांट, जानें- क्या है मामला
Sun, 19 May 2024 12:15 PM IST
अमन विश्वकर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Sun, 19 May 2024 12:15 PM IST
सार
Varanasi News: बीएचयू में पांच मई 1999 को पहला ट्रांसप्लांट होने के बाद अप्रैल 2010 तक प्रो. पीबी सिंह के निर्देशन में 80 किडनी ट्रांसप्लांट किए गए। तब तक लाइसेंस था। इसके बाद लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया गया। बीएचयू में ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू की सुविधा भी थी, लेकिन कुछ जरूरी संसाधन न होने की वजह से भी आईएमएस में ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी।
विज्ञापन
काशी हिंदू विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आईएमएस बीएचयू में करीब 14 वर्ष तक किडनी ट्रांसप्लांट न होने का कारण अब तलाशा जा रहा है। प्रारंभिक छानबीन से पता चला कि किडनी ट्रांसप्लांट के लाइसेंस का नवीनीकरण सात साल तक नहीं कराया गया। बाद में पांच साल के लिए नवीनीकरण हुआ, लेकिन एक भी मरीज का किडनी ट्रांसप्लांट नहीं हो सका।
विज्ञापन
इसी का नतीजा रहा कि लाइसेंस की वैधता फिर खत्म हो गई। नवीनीकरण की प्रक्रिया एक साल तक ठप रही। फिर अक्तूबर 2023 में नवीनीकरण हुआ। करीब छह महीने बाद मई 2024 से ट्रांसप्लांट शुरू हो सका।
विज्ञापन
ऐसे लटका मामला
आईएमएस बीएचयू में वैसे तो 2010 से 2016 तक ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया ठप रही। इस अवधि में लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं मिला था। 2016 से 2021 तक का नवीनीकरण हुआ, लेकिन पर्याप्त संसाधन न होने के कारण ट्रांसप्लांट अटक गया। 2021 से अक्तूबर 2023 तक फिर किसी ने नवीनीकरण नहीं करवाया।चिकित्सा संस्थानों में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए लाइसेंस की अवधि पांच साल होती है।
विज्ञापन
नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रो. शिवेंद्र सिंह का कहना है कि हर महीने दो से तीन नए मरीज ऐसे आते हैं, जिसमें जांच के बाद किडनी खराब होने की पुष्टि होती है। इनमें डायलिसिस के साथ ही बहुत गंभीर मरीज को ट्रांसप्लांट करवाने की सलाह भी दी जाती है। निदेशक प्रो एसएन संखवार का कहना है कि अब आईएमएस बीएचयू में किडनी ट्रांसप्लांट हो सकेगा। जल्द ही दो और मरीजों की किडनी ट्रांसप्लांट कराई जाएगी।