जाम लगा तो खैर नहीं... : एक लेन के तिहाई हिस्से में ही चले बरात, नहीं तो FIR; CP बोले- थानेदार बनवाएं वीडियो
Varanasi News : शादी के मौसम में रोजाना यातायात की समस्या से दो चार हो रहे लोगों के लिए वाराणसी कमीश्नरेट का आदेश आ गया है। अब बरात घर के बाहर पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ ही सड़क किनारे बेतरतीब खड़े वाहनों पर भी नजर रखी जाएगी। इसके साथ ही ये भी आदेश है कि एक-तिहाई भाग से अधिक सड़क पर बारात न चलें, ताकि यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो।
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बरात के कारण रोजाना देर रात तक शहर की सड़कों पर जाम लगने की समस्या पर पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने सख्त रुख अख्तियार किया है। उन्होंने कहा कि बरात में म्यूजिक सिस्टम वाले रस्सा लेकर चलें।
बरात के आयोजक और म्यूजिक सिस्टम वाले यह सुनिश्चित करेंगे कि सड़क की एक लेन के एक-तिहाई हिस्से से ही बराती गुजरें। संबंधित क्षेत्र के थानेदार बरात की वीडियोग्राफी कराएं और निर्देश का उल्लंघन दिखे तो बरात के आयोजक और म्यूजिक सिस्टम संचालक पर मुकदमा दर्ज कराएं।
पुलिस आयुक्त ने कहा कि थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी रात आठ बजे से 11 बजे अपने क्षेत्र में भ्रमणशील रहकर यातायात व्यवस्था सुचारू रूप से चलाना सुनिश्चित करें। पुलिस उपायुक्त, अपर पुलिस उपायुक्त और सहायक पुलिस आयुक्त भी भ्रमणशील रह कर यातायात व्यवस्था को देखें।
सड़क पर बरात निकले तो दो-तिहाई हिस्से पर आमजन के वाहन चलें। बरात आयोजक द्वारा निर्देशों का पालन न करने पर जाम की स्थिति उत्पन्न हो तो मुकदमा दर्ज करने में देरी न की जाए। मैरेज लॉन/ बरात घर और होटल मालिक वाहन सही तरीके से खड़े करने के लिए कम से कम अपने चार कर्मचारी नियुक्त करें, ताकि सड़क पर जाम न लगने पाए। अगर पार्किंग स्थल का प्रयोग किसी अन्य कार्य के लिए किया जाए तो संबंधित थाना प्रभारी उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करें।
रात 11 बजे तक ड्यूटी करेंगे ट्रैफिक पुलिसकर्मी
पुलिस आयुक्त ने कहा कि यातायात व्यवस्था में लगे यातायात और सिविल पुलिस के कर्मियों की ड्यूटी 14 दिसंबर तक रात 11 बजे तक के लिए लगाई जाए। विशेष रूप से ड्यूटी उन स्थानों पर लगाई जाए, जहां मैरिज हॉल या बरात घर या होटल संचालित होते हैं।
अगले 5 साल में लोकल पुलिस भी फॉरेंसिक तौर पर होगी ट्रेंड
बीएचयू के जंतु विज्ञान विभाग में तीन दिवसीय इंटरनेशनल काॅन्फ्रेंस एडनेट का बृहस्पतिवार को शुभारंभ हुआ। उत्तर प्रदेश फॉरेंसिक साइंस संस्थान के निदेशक और एडीजी डॉ. जीके गोस्वामी ने कहा कि पांच साल में लोकल पुलिस को भी फॉरेंसिक के काम सिखाए जाएंगे, ताकि घटनास्थल पर साक्ष्य के साथ खिलवाड़ न हो। ऐसे शोध का कोई अर्थ नहीं, जिसका समाज पर सीधा असर न पड़े और वो समाज के काम न आ सके।
विज्ञान संस्थान के महामना हॉल में समारोह में देश-विदेश के 300 जेनेटिक साइंटिस्ट मौजूद रहे। समारोह में आईपीएस गोस्वामी ने कहा कि लैब की बातें लोगों तक पहुंचे और उसका बड़ा प्रभाव हो। इस दिशा में प्रयास करने की जरूरत है। अब तो ये व्यवस्था आ गई है कि जिन अपराधों में सात साल या इससे ऊपर कैद की सजा है तो फिर वहां पर फॉरेंसिक एक्सपर्ट को पहुंचना ही है। जब तक फॉरेंसिक वैन आकर अपनी जांच पूरी न कर ले, कोई भी साक्ष्य को नहीं हटाएगा।