अस्सी घाट पर गंगा की लहरों के बीच बही काव्य धारा- 'दिलों के मैल धोने को यहां गंगा का पानी है'...
वाराणसी में अस्सी घाट पर गंगा की लहरों के बीच सोमवार की सुबह काव्य की धारा बही। बजड़े पर शायरी और काव्य की महफिल सजी। दिलकश शायरी और कविताओं की प्रस्तुति का दौर चला। सामाजिक कार्यकर्ता राज सिद्दीकी की पहल पर ख्यात शायर व कवियों ने अपनी रचनाओं से काशी की जिंदादिली को गंगा के पानी के साथ रवानी दी।
शहजादा कलीम ने शेर अर्ज करते हुए पढ़ा- 'हमारे देश की मिट्टी में है खुशबू मुहब्बत की, दिलों के मैल धोने को यहां गंगा का पानी है'...। रेहान हाशमी ने - 'ये काम फराएज की तरह हमने किया है, जब-जब वतन ने मांगा लहू हमने दिया है'... कलाम से श्रोताओं को देशभक्ति के जज्बे से ओतप्रोत किया। डॉ. शाद मशरिकी ने - 'मुकद्दर हो अगर धूप में जलना, दामन में दरख्तों के भी साया नहीं होता'... से मुशायरे को नया आयाम दिया। इस दौरान अमित गुप्ता, जमजम रामनगरी, डॉ. अशोक अज्ञान, रामिश जौनपुरी, निजाम बनारसी, रेहान हाशमी आदि मौजूद रहे।
'एक बार फिर से सुभाष मांगता है देश'...
उधर, प्रभा श्री और काव्य गोष्ठी की ओर से नववर्ष के स्वागत में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। आभासी मंच पर आयोजित कवि सम्मेलन में देश भर से नामी-गिरामी और नवोदित कवियों ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम की शुरुआत वीणा वादिनी मां शारदे की स्तुति से हुआ। कवि सौरभ सुमन ने राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कविताएं प्रस्तुत की। उन्होंने एक बार फिर से सुभाष मांगता है देश... का पाठ कर वर्चुअल दुनिया के दर्शकों में उत्साह का संचार किया। आगरा से रविंद्र वर्मा, बीकानेर से रवि शुक्ल, हरदा से जयकृष्ण चांडक, जालौन से अंचल शर्मा, ललितपुर से पंकज अंगार, वाराणसी से जनार्दन पांडेय, लखनऊ से आलोक रावत, जयपुर से अमित तिवारी, आगरा से आरफा शबनम व डॉ. शशि तिवारी, शहडोल से नीलम कश्यप और न्यूयार्क से सुषमा मल्होत्रा ने काव्य पाठ किया। इस दौरान वरिष्ठ साहित्यकार राजसागर, प्रियंका अग्निहोत्री, पुष्पा अवस्थी आदि रहे।