काशी विश्वनाथ कॉरिडोर: बाबा के धाम में विग्रहों को मिलेगा पुराना स्थान, साकार होगी कण-कण शंकर की कल्पना, 145 शिवलिंग किए जाएंगे स्थापित
काशी विश्वनाथ धाम का काम तीन चरणों में पूरा होगा। पहले चरण में 27 मंदिरों का जीर्णोद्धार, दूसरे चरण में 97 विग्रह व प्रतिमाओं की स्थापना और तीसरे चरण में 145 शिवलिंगों को स्थापित किया जाएगा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आदिविश्वेश्वर शिव की नगरी काशी की प्राचीन परिकल्पना नवीनता के साथ साकार हो रही है। बाबा का अद्भुत, भव्य और अकल्पनीय धाम को पौराणिकता के आधार पर ही विकसित किया जा रहा है। काशी की अंतर्गृही और पंचक्रोशी परिक्रमा को ध्यान में रखते हुए सभी देव विग्रहों को उनके प्राचीन स्थान पर ही विराजमान कराया जाएगा। इसके तहत पहले चरण में 27 मंदिरों का जीर्णोद्धार, दूसरे चरण में 97 विग्रह व प्रतिमाओं की स्थापना और तीसरे चरण में 145 शिवलिंगों को स्थापित किया जाएगा।
बाबा विश्वनाथ के धाम में प्राचीन काल से स्थापित सभी विग्रहों को उनका प्राचीन स्थान वापस मिलेगा। धाम के निर्माण के लिए अपने स्थान से हटाकर देव गैलरी में रखे सभी विग्रह, शिवलिंग और प्रतिमाओं को अपने स्थान पर प्रतिष्ठित किया जा रहा है। इसके साथ ही कण-कण शंकर की परिकल्पना काशी विश्वनाथ धाम में पुन: अपने मूर्त स्वरूप में लौटने लगी है। पहले चरण में श्री काशी विश्वनाथ की मणिमाला के 27 मंदिरों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। अब यह मंदिर प्राचीनता के साथ नए स्वरूप में निखर उठे हैं।
स्वर्णशिखर की आभा इन मंदिरों के शिखरों को भी शोभायमान कर रही है। अखिल भारतीय संत समिति और काशी विद्वत परिषद के सहयोग से काशी विश्वनाथ धाम के देव विग्रहों की पूरी सूची तैयार की गई है। स्कंद पुराण और काशी खंड को आधार मानकर धाम क्षेत्र में 145 शिवलिंग, 97 विग्रह और 27 मंदिरों के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके अलावा मंदिर परिक्षेत्र से विलुप्त हो चुके विग्रह भी इसमें शामिल किए गए हैं।
अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि पहले चरण में 27 मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। इसमें कई पुरातन काल से, काशी खंडोक्त और गोस्वामी तुलसीदास द्वारा स्थापित मंदिर हैं। दूसरे चरण में विग्रह व प्रतिमाओं के बाद तीसरे चरण में मंदिर परिक्षेत्र के शिवलिंगों को स्थापित कराया जाएगा। इसकी पूरी सूची मंदिर प्रशासन को सौंप दी गई है।
भव्य होगा मां सरस्वती का मंदिर
सरस्वती फाटक पर स्थित मां सरस्वती का मंदिर धाम क्षेत्र में अपने भव्य स्वरूप में स्थापित होगा। इसके लिए दो करोड़ रुपये का बजट पास किया गया है। पहले मां सरस्वती की प्रतिमा सरस्वती फाटक पर एक दीवाल में स्थापित थीं लेकिन आने वाले समय में श्रद्धालुओं को बाबा के धाम में मां सरस्वती के दर्शन भव्य मंदिर में होंगे।
पहले चरण के मंदिर
अन्नपूर्णा जी, पार्वती जी, अवमुक्तेश्वर महादेव, सत्यनारायण जी, लक्ष्मी जी, गणेश जी, सन्मुख विनायक, दुर्मुख विनायक, प्रमोद विनायक, भारत माता मंदिर, सरस्वती जी, हनुमान जी, नीलकंठ महादेव, अमृतेश्वर महादेव, चंडी चंडेश्वर महादेव, त्रिसंध्य विनायक, स्वर्गद्वारेश्वर महादेव, मोक्षद्वारेश्वर, बद्रीनारायण, दत्तात्रेय, राधाकृष्ण, अक्षयवट हनुमान, मणिकेश्वर विनायक, तुलसीदास हनुमान, अपरेश्वर महादेव, अविमुक्तेश्वर महादेव, हनुमान जी, अन्नपूर्णा जी (कनाडा)।