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Varanasi: कॉपी री-चेक में बीएचयू से पांच गुना महंगा काशी विद्यापीठ, छह गुना यूपी कॉलेज; शुल्क जान लें
Fri, 10 Jul 2026 12:01 PM IST
Pragati Chand
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Fri, 10 Jul 2026 12:01 PM IST
सार
Varanasi News: परीक्षा का परिणाम आने के बाद कॉपी री-चेक में काशी विद्यापीठ बीएचयू से पांच गुना महंगा है। वहीं यूपी कॉलेज छह गुना महंगा है। काशी विद्यापीठ में दोबारा कॉपी चेक कराने के लिए 2500 रुपये शुल्क देने होंगे।
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बीएचयू, काशी विद्यापीठ, यूपी कॉलेज
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सेमेस्टर परीक्षा के रिजल्ट आने के बाद कॉपी री-चेक में बीएचयू से पांच गुना महंगा विद्यापीठ और छह गुना महंगा यूपी कॉलेज है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में दोबारा कॉपी चेक कराने के लिए 2500 रुपये शुल्क देने होंगे। इसी विश्वविद्यालय से संबद्ध यूपी कॉलेज व अन्य संस्थानों में सेमेस्टर परीक्षा की एक कॉपी की नकल लेने के लिए 200 रुपये तो उसे चैलेंज करने के लिए 3000 रुपये देने होंगे। वहीं, बीएचयू में 500 रुपये में कॉपी को दोबारा चेक कराया जा सकता है।
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परीक्षा नियंता डॉ. अवधेश कुमार ने बताया कि रिजल्ट आने के सात दिन में ही कॉपी पर आपत्ति जताने का कोई शुल्क नहीं लिया जाता। लेकिन परीक्षक के चेक करने के बाद भी छात्र संतुष्ट नहीं होता तो फिर 500 देकर पुनर्मूल्यांकन कराया जाता है। एक नियम ये भी है कि सेमेस्टर परीक्षा की कॉपियों को चेक करने में 10 फीसदी से ज्यादा अंकों का अंतर आता है तो विद्यार्थियों का पूरा शुल्क माफ कर दिया जाता है। ये आवेदन आरटीआई के माध्यम से किया जाता है।
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दो परीक्षकों के दिए अंकों को जोड़कर औसत मार्क्स दिए जाते हैं
काशी विद्यापीठ की परीक्षा नियंत्रक दीप्ति मिश्रा ने बताया कि कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन दो परीक्षकों से कराया जाता है। यदि एक ने 10 नंबर दिए और और दूसरे ने 12 अंक तो दोनों का औसत यानी 11 अंक किए जाते हैं। यूपी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि ये ही व्यवस्था प्रदेश भर के कॉलेजों में लागू है। जब इस व्यवस्था में एक परीक्षक और 1000 रुपये चार्ज था तब 100-100 आवेदन आ जाते थे, लेकिन 3000 रुपये शुल्क होने के बाद अब इक्का-दुक्का ही आवेदन आते हैं। इससे फर्जी आवेदन भी रुके हैं। अब कॉपियों को दोबारा चेक करने के लिए दो बाहरी परीक्षक लिए जाते हैं। दो-दो परीक्षक होने के चलते सिफारिश करना आसान नहीं रहा।
काशी विद्यापीठ की परीक्षा नियंत्रक दीप्ति मिश्रा ने बताया कि कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन दो परीक्षकों से कराया जाता है। यदि एक ने 10 नंबर दिए और और दूसरे ने 12 अंक तो दोनों का औसत यानी 11 अंक किए जाते हैं। यूपी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि ये ही व्यवस्था प्रदेश भर के कॉलेजों में लागू है। जब इस व्यवस्था में एक परीक्षक और 1000 रुपये चार्ज था तब 100-100 आवेदन आ जाते थे, लेकिन 3000 रुपये शुल्क होने के बाद अब इक्का-दुक्का ही आवेदन आते हैं। इससे फर्जी आवेदन भी रुके हैं। अब कॉपियों को दोबारा चेक करने के लिए दो बाहरी परीक्षक लिए जाते हैं। दो-दो परीक्षक होने के चलते सिफारिश करना आसान नहीं रहा।
बीएचयू में दो सीनियर प्रोफेसर का एक पैनल करता है विचार
बीएचयू में अगर किसी छात्र को मूल्यांकन पर कोई आपत्ति होती है, तो डीन की ओर से चुने गए दो सीनियर प्रोफेसरों का एक पैनल उस पर विचार करता है। उनका ही फैसला अंतिम होता है। मूल्यांकन के बाद उत्तर पुस्तिकाएं परीक्षा नियंता कार्यालय में जमा कर दी जाती हैं। उसके बाद कोई पुनर्मूल्यांकन या अंकों का पुन: योग नहीं किया जाता।
बीएचयू में अगर किसी छात्र को मूल्यांकन पर कोई आपत्ति होती है, तो डीन की ओर से चुने गए दो सीनियर प्रोफेसरों का एक पैनल उस पर विचार करता है। उनका ही फैसला अंतिम होता है। मूल्यांकन के बाद उत्तर पुस्तिकाएं परीक्षा नियंता कार्यालय में जमा कर दी जाती हैं। उसके बाद कोई पुनर्मूल्यांकन या अंकों का पुन: योग नहीं किया जाता।