फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Kashi Vidyapeeth: Peer team may come after June 4 for NAAC evaluation

Kashi Vidyapeeth:नैक मूल्यांकन के लिए चार जून के बाद आ सकती है पीयर टीम

Mon, 27 May 2024 05:26 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 27 May 2024 05:26 AM IST
विज्ञापन
Kashi Vidyapeeth: Peer team may come after June 4 for NAAC evaluation
नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रीडिटेशन काउंसिल (नैक) के पिछले मूल्यांकन से ‘सी’ ग्रेड का तमगा ढो रहे महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ को इस बार ए श्रेणी में पहुंचने की दरकार है। नैक मूल्यांकन के मद्देनजर विश्वविद्यालय स्तर पर तैयारियों को तेजी से अंतिम रूप दिया जा रहा है। नैक की टीम चार जून के बाद किसी भी समय विश्वविद्यालय का दौरा कर सकती है।
विज्ञापन

काशी विद्यापीठ को पिछली बार नैक मूल्यांकन में सी ग्रेड मिला था। पिछले कुछ वर्षों के दौरान विश्वविद्यालय के ग्रेड बी और सी तक ही सीमित रहे हैं। छात्र-छात्राओं के समुचित फीडबैक के अभाव का भी ग्रेडिंग पर असर पड़ता रहा है। ग्रेडिंग सुधारने के लिए विश्वविद्यालय ने भवन के रंग-रोगन के साथ ही विभागों, प्रयोगशालाओं का सेटअप अपग्रेड कराया है। कंप्यूटर, स्मार्ट क्लास की दशा सुधरवाने समेत इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम किया गया है।
विज्ञापन


ए प्लस ग्रेड की उम्मीद

कुलपति प्रो. एके त्यागी ने बताया कि नैक तैयारियों को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भी बारीकी से देखा है। इस बार ए प्लस से कम ग्रेड की उम्मीद नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि काशी विद्यापीठ का डीवीवी (डाटा वैलिडेशन एंड वैरिफिकेशन प्रॉसेस) स्कोर कानपुर और गोरखपुर विवि से बेहतर दिख रहे हैं। इससे बेहतर ग्रेडिंग की आस है। गौरतलब है कि डीवीवी के आधार पर 65 फीसदी मूल्यांकन होता है और 35 फीसदी मूल्यांकन पीयर टीम आने के बाद किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इनका ग्रेडिंग पर पड़ा असर

रिसर्च प्रोजेक्ट नहीं आते थे:
काशी विद्यापीठ में पहले रिसर्च प्रोजेक्ट की संख्या बेहद कम थी। मगर, अब विवि ने तीन गुना रिसर्च प्रोजेक्ट आने का दावा किया है।

सिलेबस अपग्रेड नहीं था:
कक्षाओं में पुराना सिलेबस ही पढ़ाया जा रहा था। नई शिक्षा नीति के मुताबिक भी सिलेबस में परिवर्तन किए गए हैं।

समुचित मेंटनेंस का अभाव:
भवन से लेकर उपकरणों तक का रखरखाव स्तरीय नहीं था। उन्हें दुरुस्त कराया गया है।

समय पर नहीं निकलता था रिजल्ट:
परीक्षा परिणाम आने में अक्सर विलंब हो जाता था। इसका असर भी विश्वविद्यालय की ग्रेडिंग पर पड़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed