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पाठ्यक्रमों की मान्यता के आवेदन हुए ‘लॉक’
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वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से संबद्ध महाविद्यालयों में नए विषयों व पाठ्यक्रमों की मान्यता के आवेदन लॉकडाउन के कारण फंस गए हैं। सत्र 2020-21 में नए कोर्स संचालित करने की योजना पर ही संशय के बादल मंडरा रहे हैं। इसमें वाराणसी सहित पांच जिलों में खुलने वाले 12 नए महाविद्यालय भी शामिल हैं। यदि नवीनीकरण नहीं हुआ तो संबंधित कालेजों को पाठ्यक्रम बंद करना पड़ सकता है।
शासन की ओर से महाविद्यालयों से नए विषयों व पाठ्यक्रमों की मान्यता के लिए 10 मार्च तक आवेदन और 20 मार्च तक पैनल गठित करने का निर्देश था। पैनल को अपनी रिपोर्ट 15 अप्रैल तक देनी थी, लेकिन लॉकडाउन के कारण सब ठप हो गया है। काशी विद्यापीठ ने तमाम कालेजों को बीएड सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों में दो या तीन वर्ष के लिए अस्थायी मान्यता प्रदान की थी।
इन विषयों की मान्यता की अवधि वर्तमान सत्र में समाप्त हो रही है। ऐसे महाविद्यालयों ने स्थायी मान्यता के लिए आवेदन किया है। इसके अलावा जिन महाविद्यालयों की अस्थायी संबद्धता व विषयों की मान्यता की वैधता समाप्त हो रही है, उन्होंने नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है। करीब 100 आवेदन लंबित हैं।
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पैनल गठित कर दिया गया है। लॉकडाउन के चलते निरीक्षण मंडल रिपोर्ट नहीं दे सका। अब 30 मई तक रिपोर्ट मांगी गई है, ताकि 30 जून से पहले मान्यता प्रदान की जा सके। तिथि बढ़ाने का अधिकार विश्वविद्यालय के पास नहीं हैं। - डॉ. एसएल मौर्य, कुलसचिव, काशी विद्यापीठ
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शासन की ओर से महाविद्यालयों से नए विषयों व पाठ्यक्रमों की मान्यता के लिए 10 मार्च तक आवेदन और 20 मार्च तक पैनल गठित करने का निर्देश था। पैनल को अपनी रिपोर्ट 15 अप्रैल तक देनी थी, लेकिन लॉकडाउन के कारण सब ठप हो गया है। काशी विद्यापीठ ने तमाम कालेजों को बीएड सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों में दो या तीन वर्ष के लिए अस्थायी मान्यता प्रदान की थी।
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इन विषयों की मान्यता की अवधि वर्तमान सत्र में समाप्त हो रही है। ऐसे महाविद्यालयों ने स्थायी मान्यता के लिए आवेदन किया है। इसके अलावा जिन महाविद्यालयों की अस्थायी संबद्धता व विषयों की मान्यता की वैधता समाप्त हो रही है, उन्होंने नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है। करीब 100 आवेदन लंबित हैं।
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पैनल गठित कर दिया गया है। लॉकडाउन के चलते निरीक्षण मंडल रिपोर्ट नहीं दे सका। अब 30 मई तक रिपोर्ट मांगी गई है, ताकि 30 जून से पहले मान्यता प्रदान की जा सके। तिथि बढ़ाने का अधिकार विश्वविद्यालय के पास नहीं हैं। - डॉ. एसएल मौर्य, कुलसचिव, काशी विद्यापीठ