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वाराणसी : जिस रास्ते जाता है बाबा का प्रसाद, उस सड़क पर भी बह रहा सीवर

Thu, 19 Sep 2019 01:48 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Thu, 19 Sep 2019 01:48 AM IST
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काशी विश्वनाथ मंदिर - फोटो : अमर उजाला

वाराणसी शहर के लिए नासूर बन चुकी सीवर समस्या अब काशी के धर्मावलंबियों की आस्था पर चोट करने लगी है। काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में सड़कों पर सीवर ओवरफ्लो होकर बह रहा है। इसी रास्ते से काशी पुराधिपति बाबा विश्वनाथ का प्रसाद भी मंदिर तक जाता है। इस मामले को क्षेत्रीय पार्षदों ने पिछले दिनों नगर निगम में हुई बैठक में भी उठाया था। बावजूद इसके सीवर समस्या का समाधान नहीं हो सका है।

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काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र के जंगमबाड़ी और बंगाली टोला क्षेत्र में पिछले एक महीने से सीवर सड़कों पर बह रहा है। काशी आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु इसी रास्ते से होकर गंगा घाट, काशी विश्वनाथ मंदिर और अन्य जगहों पर जाते हैं। बुधवार को जब शयन भोग आरती के लिए नाटकोट क्षेत्रम से जाने वाला बाबा का प्रसाद लेकर सेवादार निकले तो उन्हें भी सीवर के बीच से होकर गुजरना पड़ा।

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रास्ते में बह रहा सीवर का पारी


इससे नाराज लोगों और श्रद्धालुओं ने इसकी जानकारी जलकल को भी दी, मगर अधिकारी लापरवाह बने रहे। पांडेय हवेली के पार्षद चंदू दादा और जंगमबाड़ी के पार्षद गोपाल यादव ने कहा कि हम लोगों ने शिकायत की। सदन में हंगामा कर लिया, लेकिन समस्या जस की तस है। सभी अधिकारियों के संज्ञान में यह मामला है, लेकिन कोई भी इस पर ध्यान नहीं दे रहा है।

1863 से जा रहा है प्रसाद :
तमिलनाडु की धार्मिक संस्था नाटकोट क्षेत्रम बाबा विश्वनाथ सहित अन्नपूर्णा मंदिर और विशालाक्षी मंदिर में 1813 से पहुंचाती है। पहले यह हनुमान घाट के पास से जाता था, लेकिन 1863 से यह जंगबाड़ी के पास बन संस्था के कार्यालय से जाता है। यह प्रसाद मंगला आरती, मध्याह्न आरती और शयन भोग आरती में जाता है।

एक दिन के प्रसाद में 100 माला, 27 लीटर दूध, 11 किलो फल, चावल, चीनी सहित कई अन्य पूजन सामग्री शामिल होती है। प्रसाद को ले जाने में पवित्रता का इतना ध्यान रखा जाता है कि ले जाने वाले लोग नंगे पांव और बिना सिला वस्त्र पहने हुए चलते हैं। प्रसाद में आगे आगे धूप लेकर एक सेवादार चलता है। इसके पीछे शहनाई और मृदंग के अलावा पांच छह डलियां में प्रसाद ले जाया जाता है। प्रसाद की पवित्रता बरकरार रखने के लिए लोग गलियों में भी एक किनारे हो जाते हैं।

पंपिंग न होने से आ रही परेशानी :
शाही नाले के काम के चलते गंगा प्रदूषण का पंप नहीं चल पा रहा है। ऐसे में इन इलाकों में सीवर समस्या आ रही है। दिन में सही रहता है। सुबह शाम यह समस्या रहती है। फिर भी पंप चलवाकर उसे सही कराया जाएगा। -नीरज गौड़, जीएम जलकल

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