काशी तमिल संगमम : केंद्रीय विवि के 200 छात्र और 5000 डेलीगेट्स करेंगे संगम स्नान, जानें- खासियत
काशी तमिल संगमम 3.0 को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। काशी और तमिलनाडु के संबंधों को मजबूत करने के लिए छात्र भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देंगे। बैठक के दाैरान इसमें प्रयागराज मेला क्षेत्र के भी अधिकारी वर्चुअली जुड़े थे।
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Kashi Tamil Sangam : केंद्रीय विश्वविद्यालयों के 200 छात्र और 5000 से ज्यादा डेलीगेट्स काशी तमिल संगमम 3.0 में हिस्सा लेने वाराणसी आएंगे। प्रयागराज में संगम स्नान भी करेंगे। ऋषि अगस्त्य की थीम पर 15 फरवरी से 24 फरवरी के बीच होने वाले इस आयोजन में ये छात्र काशी और तमिलनाडु के बीच में संबंधों को जोड़ेंगे।
200 छात्र कुल आठ दिनों तक इस यात्रा में रहेंगे। चार दिन तक काशी, प्रयागराज और अयोध्या और बाकी के चार दिन रेल यात्रा में बीतेगी।
ये बातें शुक्रवार को कमिश्नरी सभागार में केंद्र सरकार के अपर सचिव (ई) सुनील कुमार बरनवाल ने कहीं। काशी तमिल संगमम 3.0 की तैयारियों को लेकर उनकी अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें प्रयागराज मेला क्षेत्र के भी अधिकारी वर्चुअली जुड़े थे।
बैठक में जिलाधिकारी एस. राजलिंगम ने सचिव को 2023 और 24 में हुए दोनों संगमम के बारे में बताया। अपर पुलिस आयुक्त एस. चिनप्पा ने पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था का खाका खींचा। वहीं, सचिव ने पूरे आयोजन के दौरान अतिथियों की सुरक्षा, उचित चिकित्सकीय व्यवस्था और हाइजीन का उचित प्रबंध करने को कहा।
इस बार तमिल संगमम का आयोजन आगामी 15 से 24 फरवरी तक होगा। इसमें 1000 प्रतिनिधियों के पांच और केंद्रीय विश्वविद्यालय के 200 छात्राें का समूह आएगा। नमो घाट पर शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के बाद ये समूह प्रयागराज जाएगा।
वहां संगम स्नान, अक्षयवट, हनुमान मंदिर में दर्शन के बाद टीम अयोध्या जाएगी। बैठक में सीडीओ हिमांशु नागपाल, एडीएम सिटी आलोक कुमार वर्मा, एडीएम वित्त/राजस्व वंदिता श्रीवास्तव, एडीएम प्रशासन विपिन कुमार आदि रहे।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति को दिया जा रहा महत्व
कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तर और दक्षिण के विद्वानों, छात्रों, दार्शनिकों, व्यापारियों, कारीगरों, कलाकारों और अन्य क्षेत्रों के लोगों को एक साथ एक मंच पर लाना है। इस दौरान ज्ञान, संस्कृति और बेहतर प्रथाओं को साझा किया जाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के भारतीय ज्ञान प्रणालियों की बात को भी महत्व दिया जाएगा। आईआईटी मद्रास और बीएचयू इस कार्यक्रम की दो कार्यान्वयन एजेंसियां हैं।