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'काशी की सुरधारा मौन हो गई': पंडित छन्नूलाल को बनारस घराने के कलाकारों ने किया नमन, बोले- अपूरणीय क्षति है

Thu, 02 Oct 2025 12:55 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 02 Oct 2025 12:55 PM IST
सार

जाने माने शास्त्रीय गायक और पद्म विभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र के निधन की सूचना मिलते ही बनारस के संगीत घराने में शोक की लहर दाैड़ गई। साहित्यकारों ने अपने-अपने तरीके से उन्हें नमन किया है। छन्नूलाल के आवास पर उनके पार्थिव शरीर का इंतजार किया जा रहा है।

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Kashi music has fallen silent Artists from Banaras Gharana paid tribute to Pandit Chhannulal Mishra
पंडित छन्नू लाल मिश्रा के आवास पर लगी भीड़। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Pandit Chhannulal Mishra Passed Away: आज काशी की सुरधारा मौन हो गई। पद्मविभूषण (2020) से अलंकृत, विश्वविख्यात शास्त्रीय गायक, ठुमरी–सम्राट और भक्तिरस के अद्भुत साधक पंडित छन्नूलाल मिश्र अब नहीं रहे। उनके निधन से न केवल भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत, बल्कि संपूर्ण काशी और विशेषकर संकटमोचन की सांगीतिक परंपरा एक गहरी शोकछाया में डूब गई है।

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पंडित छन्नूलाल ने ठुमरी, दादरा, कजरी, चैती और होरी को जिस सहजता और आत्मीयता से गाया, वह उन्हें शास्त्रीय संगीत की भीड़ में अलग पहचान देता है। उनकी आवाज में गंगा–घाटों की मिठास, बनारसी बोली की आत्मीयता और लोक–संस्कारों की गहराई थी। 
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वे केवल मंचीय कलाकार नहीं थे, बल्कि शास्त्रीय संगीत को लोकजीवन से जोड़ने वाले सेतु भी थे। पंडितजी ने तुलसीकृत रामचरितमानस को अपने स्वरों में गाकर अनगिनत लोगों के हृदय तक पहुंचाया। उनका गाया मानस केवल संगीत नहीं था, बल्कि भक्ति और लोकमंगल की साधना थी।

संकट मोचन से था गहरा लगाव

पंडित छन्नूलाल का जीवन संकटमोचन मंदिर और वहा की परंपराओं से गहराई से जुड़ा रहा। वे वर्षों तक संकटमोचन संगीत समारोह के प्रमुख आकर्षण रहे। उनके जीवन की एक विशेष कथा यह रही कि महंत प्रो. वीरभद्र मिश्र (पूर्व महंत, संकटमोचन मंदिर, गंगा–योद्धा और समाज सुधारक) उनसे गहराई से जुड़े रहे। 

महंतजी शास्त्रीय संगीत के बड़े रसिक थे और उन्होंने पंडितजी को अपना गुरु माना। जीवन के लंबे काल तक सप्ताह में दो बार पंडितजी संकटमोचन मंदिर में जाकर महंत जी को स्वर–साधना सिखाते थे। यह गुरु-शिष्य परंपरा केवल संगीत की शिक्षा भर नहीं थी, बल्कि आत्मा और श्रद्धा का संवाद भी था।

मां गंगा को करते थे नमन

महंतजी पंडित जी को हर संभव सहयोग और संरक्षण देते रहे। इसीलिए पंडितजी भी स्वयं को संकटमोचन का आजीवन गायक मानते रहे। पंडित छन्नूलाल मिश्र केवल गायक नहीं थे, वे काशी की धरोहर थे। उनकी गायकी में बनारस की गलियां, घाट, उत्सव, लोकगीत और मां गंगा का प्रवाह सुनाई देता था।

आज उनका जाना संगीत की दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है। परंतु यह भी सत्य है कि उनके स्वर, उनकी ठुमरी, उनकी कजरी और उनका गाया मानस, बनारस और भारत की आत्मा में सदा गूंजता रहेगा। वर्तमान महंत प्रोफेसर विश्वंभर नाथ मिश्र और हम सभी के साथ भी उनका आत्मीय और पारिवारिक संबंध बना रहा।  काशी और संकटमोचन उन्हें युगों–युगों तक याद करेंगे, क्योंकि वे सिर्फ कलाकार नहीं, बल्कि परंपरा के वाहक और संस्कृति के अमर गायक थे।

काफी कुछ सीखा गए पंडित छन्नू लाल

Kashi music has fallen silent Artists from Banaras Gharana paid tribute to Pandit Chhannulal Mishra
कथक नृत्यांगना संगीता सिन्हा ने साझा की तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

पंडित बिरजू महाराज की शिष्या और कथक नृत्यांगना संगीता सिन्हा ने कहा कि पंडित छन्नूलाल मिश्रा मेरे पिता के मित्र रहे। उनसे पारिवारिक संबंध थे। संगीत महोत्सव या किसी कार्यक्रम में उनसे जब भी मुलाकात होती तो कुछ न कुछ सीखने को मिलता था। वे अक्सर कहते- संगीता कथक की बात जहां होती है, मैं तुम्हारा जिक्र अवश्य करता हूं। पिछले साल ही उनसे मुलाकात हुई थी। भगवान उनकी आत्मा को शांदी दे, मेरी प्रार्थना है।

बनारस की कथक डांसर सरला नारायण सिंह ने कहा कि पंडित छन्नूलाल मिश्रा काशी ही नहीं, देश और विश्व की महान विभूतियों में एक रहे। मैं उनके साथ जब भी बैठती तो संगीत से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात को बहुत ही सरल और सहज तरीके से बताते थे। उनकी मृत्यु संगीत जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति है।

यश भारती से सम्मानित बिरहा लोक गायक विष्णु यादव ने कहा कि पंडित छन्नूलाल के निधन की सूचना प्राप्त हुई तो मन दुखी हो गया। छोटी गैबी मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई। पंडित छन्नूलाल का इस मोहल्ले से काफी लगाव था। यहां हर शख्स से वे मुलाकात करते थे। बिरहा, कजरी, सोहर, चैती हर प्रकार के पारंपरिक गायन विद्या में प्रखर विद्वान कलाकार थे। संगीत घराने को अपूरणीय क्षति हुई है।

यह भी पढ़ें- पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन, संगीत जगत शोक में डूबा; पीएम मोदी ने जताई संवेदना 

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डाॅक्टर चारु चंद्र, सरला नारायण, संगीता सिन्हा, मालविका और आशीष। - फोटो : अमर उजाला

भारतीय गायन को गुरुजी ने विश्व पटल पर पहुंचाया
युवा कथक डांसर आशीष सिंह 'नृत्य मंजरी दास' पंडित छन्नूलाल मिश्र के निधन पर काफी भावुक हुए। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को गुरुजी की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए। उनके गायन में एक कसक थी, जो लोगों को आकर्षित करता था। पंडित छन्नूलाल का पूरा जीवन संगीत की विधा को विश्वपटल पर पहुंचाने में लगा रहा। यह कार्य उन्होंने किया भी है। आज देश ही नहीं पूरे विश्व में लोग गुरुजी को जानती है। संगीत कार्यक्रमों के माध्यम से उनका सानिध्य प्राप्त होता रहता था, जो आजीवन याद रहेगा।

भारतीय संगीत को प्रेम करने वाला हर शख्स दुखी हो गया,
डाॅक्टर चारु चंद्र सिंह ने कहा कि हजारों बरस नर्गिस अपनी बेनूरी पीरोती है, बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा। ऐसे ही चमन के दीदावर थे काशी के सपूत पद्मविभूषण पंडित छन्नू लाल मिश्र। गुरुजी का जाना इस बात का सबूत है कि कुछ लोग थे जो वक्त के सांचे में ढल गए। कुछ लोग थे जो वक्त के सांचे बदल गए। भारतीय संस्कृति से प्रेम करने वाला हर शख्स आज दुखी हो गया।

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पंडित छन्नूलाल मिश्र के साथ डाॅ. मालविका। - फोटो : अमर उजाला

महान शख्सियत थे पंडित छन्नूलाल
लेखिका डाॅ. मालविका तिवारी ने कहा कि कविता से कथा, शास्त्र से लोक को जोड़ने वाली गायकी के अनूठे गायक पंडित छन्नूलाल मिश्रा की मृत्यु भारत के संगीत घराने के लिए अपूरणीय क्षति है, जो वर्षों तक भरी नहीं जा सकेगी। अपने गायन के समय चाचाजी श्रोताओं से बहुत संवाद करते थे। उस दाैर जब लोगों का रुझान फिल्मी संगीत की तरफ ज्यादा हो रहा है। चैती, ठुमरी और अन्य गायकी को लेकर वह खुले मन से लोगों को बताते थे, ताकि भारत की यह अनोखी विधा निरंतर जागृत रहे। ऐसे महान शख्सियत को मेरी श्रद्धांजलि...।

पंडित छन्नू लाल कला के सच्चे साधक थे: सीपी मोहित अग्रवाल
पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने कहा कि पद्मविभूषण स्वर्गीय पंडित छन्नू लाल मिश्रा संगीत के सच्चे साधक रहे। मैंने भी उन्हें सुना था। बनारस ने एक बहुत बड़े संगीतज्ञ को खो दिया है, जिसकी पूर्ति शायद ही कभी हो पाए।

पूर्व एमएलसी बृजेश बोले- देश के धरोहर थे पंडित छन्नू लाल
पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह ने कहा कि मैं पद्मविभूषण स्वर्गीय पंडित छन्नू लाल मिश्रा को संत मानता था। उनकी गायकी को मैं सुनता आ रहा हूं। पंडितजी देश के धरोहर थे। वे आगे भी काशी में ही जन्म लें, मैं ईश्वर से कामना करता हूं।

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