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काशी को काशी ही रहने दें क्योटो न बनाएं

Sat, 28 Nov 2015 02:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Sat, 28 Nov 2015 02:26 AM IST
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Kashi Kashi give to create Kyoto not
वाराणसी। काशी को कभी क्योटो की तरह बनाने की बात होती है तो कभी स्मार्ट सिटी की सूची में इसे शामिल करने की कवायद नजर आती है। यह चर्चा काफी दिनों से चल रही है। अखबारों में भी बहुत छपा। मगर मेरा मानना है कि जो भी योजनाएं बन रही हैं वे काशी के मिजाज और लिहाज से ठीक नहीं है।
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किसी की तरह बनाने की कल्पना काशी के लिए अव्यावहारिक है। काशी अपने मूल आध्यात्मिक स्वरूप के कारण ही विश्व में जानी जाती है। न कि सड़कों, भवनों और तेजी से विकसित हो रही मॉल संस्कृति के कारण। काशी प्राचीनतम नगरी है इसका एक आध्यात्मिक-सांस्कृतिक स्वरूप है।
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अपनी भौगोलिक, ऐतिहासिक और सबसे बढ़कर पौराणिक विशेषताएं हैं। यही विशेषताएं सदियों से पर्यटकों, तीर्थयात्रियों को अपनी ओर खींचती हैं। अब तक 30 से अधिक किताबें और उपन्यास लिख चुकीं जानी-मानी लेखिका एवं साहित्यकार डॉ. नीरजा माधव ने शुक्रवार को अमर उजाला के साथ शहर के बारे में अपनी बातें साझा की।
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उन्होंने कहा कि शहर को 24 घंटे बिजली, पानी, अच्छी सड़कें, साफ गलियां और घाट हों तो काशी स्वयं नए कलेवर में दिखेगी। उनका मानना है कि काशी ऐसा शहर नहीं जिस पर बुल्डोजर चलवाकर सड़कें और गलियों को चौड़ा किया जा सकता है।

वजह, यहां की गलियां तथा घाट ही काशी की पहचान है और शहर इसी के लिए जाना जाता है। इन घाटों को छूकर बहती गंगा से जुड़े तीज त्योहार के कारण मशहूर है। चाहे देव दीपावली, नाग नथैया, छठ पूजा, गंगा आरती या फिर कोई स्नान या पर्व। ऐसे में काशी के प्राचीन स्वरूप को छेड़छाड़ कर उसे नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।

ऐसा नहीं है कि आज ही सड़कें खराब हो गई और पहले काफी अच्छी थी। पहले गलियां न होकर चौड़ी सड़कें थी, ऐसा कुछ भी नहीं था। फिर भी पर्यटक, दर्शनार्थी, तीर्थयात्री काशी की ओर खींचे चले आते हैं। यह कह सकते हैं कि विश्व की जितनी धार्मिक यात्राएं है उनके रास्ते काशी से होकर गुजरते हैं।

शहर को साफ सुथरा रखने की जरूरत है। स्मार्ट सिटी बने न बने सबसे पहले स्वस्थ जीवन के लिए जरुरी बुनियादी सुविधाएं जैसे शुद्ध पेयजल, बिजली, सड़क, सीवेज, सफाई की अच्छी व्यवस्था की जरूरत है। गंगा में सीवेज को गिरने से रोका जाए।

शहर में कंक्रीट के जंगल पर रोक लगे। बाहरी इलाकों में मॉल और मल्टीस्टोरी का निर्माण हो। शहर को सजाना संवारना है तो इस पर गंभीरता से काम होना चाहिए। शहर हराभरा हो ताकि लोग खुलकर सांस ले सकें। शहर की बेहतरी के लिए मंदिरों, विद्यालयों के समीप मांस-मदिरा की दूकानों को बंद कराया जाए।

इससे बाहर से आने वाले पर्यटकों पर धर्मनगरी का उल्टा प्रभाव पड़ता है। पहले सुप्रभात का प्रसारण होता था जो बंद हो गया। इससे काशी में उतरते ही यात्री को आभास हो जाता था कि वह आध्यात्मिक नगरी में है। इसे फिर से शुरू कराया जाना चाहिए।


शहर को प्रदूषण मुक्त करने के लिए गोदौलिया जैसे प्रमुख स्थान तक पेट्रो वाहनों की जगह पारंपरिक वाहनों इक्का, बग्गी, टमटम और रिक्शा चलाना चाहिए। इससे गरीबों को रोजगार के साथ प्रदूषण में कमी तो आएगी। गलियों और सड़कों से अतिक्रमण हटा दिए जाएं तो शहर खुद-ब-खुद साफ सुथरा दिखने लगेगा।
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