सुबह-ए-बनारस आनंद कानन के साहित्यिक प्रकल्प काव्यार्चन के तहत म्यूट काव्य गंगा की 56वीं कड़ी में पद्य साहित्य की कई विधाओं का मिलन हुआ। नगर के वरिष्ठ व उदीयमान रचनाकारों ने प्रथम चरण में वैशाखी को समर्पित रचनाओं का पाठ किया। रचनाकारों ने अपनी विधा की श्रेष्ठ रचनाएं पेश कर वाहवाही लूटी।
वरिष्ठ रचनाकार अभिनव अरुण ने अध्यक्षता की। अभिनव अरुण ने सल्तनत से सवाल की गजलें, लिख रहा है कमाल की गजलें, इतना गहरा घना अंधेरा है, कुछ सुनाओ मशाल की गजलें... सुनाया। शायर धर्मेन्द्र गुप्त ने सुनाया-रूप रंग रस गंध है काशी, जीवन का अनुबंध है काशी, विश्व नई कविता सा हुआ है, किंतु अभी तक छंद है काशी...। पूजा श्रीवास्तव, प्रियंका सिंह, गिरीश पांडेय आदि ने भी अपनी सुनाईं। संचालन जगदीश्वरी चौबे और धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. प्रतापशंकर दूबे ने किया। इस मौके पर परमहंस तिवारी, डॉ. महेंद्र तिवारी अलंकार, संतोष प्रीत, राजलक्ष्मी मिश्रा, ऋतु दीक्षित, प्रो. वत्सला श्रीवास्तव, आनंद कृष्ण मासूम, एडवोकेट रुद्रनाथ त्रिपाठी, डाॅ. नागेश शांडिल्य, पं. सूर्य प्रकाश मिश्रा, अखलाक खान भारतीय आदि रहे।