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काशी की विरासत पर अंतरराष्ट्रीय अध्ययन
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 25 Jan 2016 01:40 AM IST
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हेरिटज सिटी के रूप में काशी को संरक्षित करने और स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की योजनाओं के बीच इसके संरक्षण के उपायों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन शुरू हो गया है। मुंबई के भारतीय विद्यापीठ कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर के साथ फ्रांस, दक्षिण कोरिया के विश्वविद्यालयों के 65 वास्तुकारों की टीम घाट, संकरी गलियों, महलों के वास्तुशिल्प को संरक्षित करने के उपायों पर जानकारी जुटा रही है।
काशी की संस्कृति और जन जीवन पर किसी प्रतिकूल प्रभाव के बिना कैसे इन विकास योजनाओं को मूर्त रूप दिया जा सकेगा, इस पर यह टीम अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। यह रिपोर्ट जिला प्रशासन, वीडीए और नगर निगम को सौंपी जाएगी।
वास्तुविदों के इस दल ने फिलहाल 40 घाटों को तीन भाग में बांट कर अध्ययन शुरू किया है। टीम का निर्देशन बीएचयू के भूगोल विभाग के प्रो. राणा पीबी सिंह कर रहे हैं। फिलहाल भोसले घाट, दशाश्वमेध घाट, मुंशी घाट, दरभंगा घाट, मान महल समेत कई घाटों और महलों की डिजाइन बनाकर वास्तुविदों ने वहां के लोगों की जरूरतों और उनका आशाओं को समझने की कोशिश शुरू की है।
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टीम की अगुवाई करने वाली भारतीय विद्यापीठ के कॉलेज आफ आर्किटेक्चर की प्रो. रितु देशमुख का कहना है कि विकास के लिए घोषित हुई विकास योजनाओं का प्राचीन शहर पर कैसा असर पडे़गा इस पर हम रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। इस काम में उनके साथ दक्षिण कोरिया की नामस्योंग यूनिवर्सिटी के अलावा पेरिस की ऐन्साप्लाव यूनिवर्सिटी के 30 युवा वास्तुकार भी जुटे हैं। 30 जनवरी तक अध्ययन पूरा होने की उम्मीद है।
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काशी की संस्कृति और जन जीवन पर किसी प्रतिकूल प्रभाव के बिना कैसे इन विकास योजनाओं को मूर्त रूप दिया जा सकेगा, इस पर यह टीम अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। यह रिपोर्ट जिला प्रशासन, वीडीए और नगर निगम को सौंपी जाएगी।
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वास्तुविदों के इस दल ने फिलहाल 40 घाटों को तीन भाग में बांट कर अध्ययन शुरू किया है। टीम का निर्देशन बीएचयू के भूगोल विभाग के प्रो. राणा पीबी सिंह कर रहे हैं। फिलहाल भोसले घाट, दशाश्वमेध घाट, मुंशी घाट, दरभंगा घाट, मान महल समेत कई घाटों और महलों की डिजाइन बनाकर वास्तुविदों ने वहां के लोगों की जरूरतों और उनका आशाओं को समझने की कोशिश शुरू की है।
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टीम की अगुवाई करने वाली भारतीय विद्यापीठ के कॉलेज आफ आर्किटेक्चर की प्रो. रितु देशमुख का कहना है कि विकास के लिए घोषित हुई विकास योजनाओं का प्राचीन शहर पर कैसा असर पडे़गा इस पर हम रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। इस काम में उनके साथ दक्षिण कोरिया की नामस्योंग यूनिवर्सिटी के अलावा पेरिस की ऐन्साप्लाव यूनिवर्सिटी के 30 युवा वास्तुकार भी जुटे हैं। 30 जनवरी तक अध्ययन पूरा होने की उम्मीद है।