काशी गंगा महोत्सव: राजघाट पर मालिनी के सुरों में सजी होली खेलें मसाने में...की तान, दर्शकों को मोहा
Kashi Ganga Mahotsav 2025: ठुमरी गायिक मालिनी अवस्थी ने नमो घाट पर मंचन के दाैरान दर्शकों का मन मोह लिया। उन्होंने बाबा काशी विश्वनाथ, मां अन्नपूर्णा और अपने गुरुओं को भी याद कर नमन किया।
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Varanasi News: काशी गंगा महोत्सव की तीसरी निशा को पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने अपने सुरों से यादगार बना दिया। डेढ़ घंटे की संगीतमयी प्रस्तुति में मालिनी ने लोकगीतों के जरिये श्रोताओं को भाव से भर दिया। कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी की संगीतमयी निशा में मालिनी ने गोपालगंज के रसूल मियां की रचना जगमगाता है दमकता है अनोखा राम का सेहरा, जो देखा है वो कहता है रमेति राम का चेहरा... सुनाया तो पूरा माहौल राममय हो उठा।
सोमवार की रात 8:30 बजे पद्मश्री मालिनी अवस्थी मंच पर पहुंचीं। उन्होंने काशी की जनता, गंगा और बाबा विश्वनाथ को प्रणाम करते हुए गायन की शुरुआत डम-डम डमरू बजावे हमार जोगिया... से की तो संगीत रसिकों ने भी हर-हर महादेव का जयघोष किया। इसके बाद उन्होंने झूलनी का रंग सांचा हमार पिया... सुनाया।
दर्शकों ने खूब बजाई ताली
अगली प्रस्तुति गोपालगंज के रसूल मियां की रचना जगमगाता है दमकता है अनोखा राम का सेहरा, जो देखा है वो कहता है रमेति राम का चेहरा, हजारों भूप आए थे, जनकपुर बांध कर सेहरा, रखा अभिमान सेहरों का सलोने श्याम ने सेहरा। उधर है जानकी के हाथ में जयमाल शादी की इधर है राम के सर पर विजय प्रणाम का सेहरा।
लगा हर एक लड़ियों में ये धागा वंदेमातरम का, गुंथा है सत के सूई से सिरी सतनाम का सेहरा... की धुन पर पूरे माहौल को राम के रंग से सराबोर कर दिया। इसके बाद मालिनी ने जब होली खेलें मसाने में... की तान छेड़ी तो राजघाट का मुक्ताकाशीय मंच पर संगीत के सतरंगी धुन से गूंज रहा था। अंतिम प्रस्तुति में उन्होंने सइयां मिलल लड़कइयां... के जरिये गायन को विराम दिया।
इसके पूर्व पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित काशी गंगा महोत्सव के तीसरे चरण में प्रथम प्रस्तुति लोक गायक डॉ. अमलेश शुक्ल एवं आस्था शुक्ला के गायन की रही। गायन का आरंभ पं. हरिराम द्विवेदी द्वारा रचित गंगा गीत मर्यादा है इस देश की पहचान है गंगा... की भावपूर्ण प्रस्तुति से हुई। इसके बाद अलीशा मिश्रा ने तबला वादन की प्रस्तुति दी।
सांस्कृतिक कार्यक्रम ने मोहा
अलीशा ने तबला वादन में अपने प्रपितामह पं. सामता प्रसाद मिश्र गुदई महाराज की प्रचलित ताल रचनाओं को प्रस्तुत कर सभी को हर्षित किया। चौथी शांभवी सेठ व मांडवी सिंह के युगल कथक नृत्य की रही। तबले पर पं. भोलानाथ मिश्र एवं पखावज पर वंतिका महाराज एवं बोल पढ़ंत पर डॉ. ममता टंडन रहीं।
नृत्य का आरंभ शिव वंदना ऊं नमः शिवाय से हुआ। इसके उपरांत विश्वनाथाष्टकम गंगा तरंग रमणीय जटा कलापम... पर भावपूर्ण नृत्य की प्रस्तुति रही। समापन जय जय भगीरथी... पर नृत्य से हुआ। इसके बाद मीना मिश्रा का गायन हुआ। तबला संगति देव नारायण मिश्र व संवादिनी पर पं. पंकज मिश्रा व तानपुरा संगति श्रीदेवी की रही। मंच संचालन डॉ. प्रीतेश आचार्य ने किया।
मेरे प्रशंसक ही मेरी पहचान, उनका स्नेह ही मेरा सम्मान : मालिनी अवस्थी
कार्यक्रम के समापन पर जब मालिनी अवस्थी मंच से नीचे उतरीं, तो प्रशंसकों की भीड़ उन्हें देखने और सेल्फी लेने उमड़ पड़ी। मालिनी ने किसी को निराश नहीं किया। मुस्कराते हुए हर प्रशंसक के साथ तस्वीरें खिंचवाईं।
इस दौरान अमर उजाला प्रतिनिधि से हुई बातचीत में उन्होंने कहा, यदि कोई प्रशंसक कलाकार के साथ फोटो खिंचवाना चाहता है, तो इससे बड़ा सौभाग्य कलाकार के लिए क्या हो सकता है। उन्होंने आगे कहा, आज के समय में लोग अपने परिजनों के साथ भी तस्वीर नहीं खिंचवाना चाहते, ऐसे में जब कोई कलाकार से जुड़ना चाहता है, तो वह कलाकार के लिए सम्मान की बात होती है। मेरे प्रशंसक ही मेरी पहचान हैं, और मैं उनके स्नेह की ऋणी हूं।