{"_id":"5ab264f94f1c1b91778b6ad9","slug":"kashi-famous-places-revised-circle-rates-are-very-low","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"काशी को पहचान देने वाले क्षेत्रों का सर्किल रेट है सबसे कम, स्थानीय लोगों में आक्रोश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
काशी को पहचान देने वाले क्षेत्रों का सर्किल रेट है सबसे कम, स्थानीय लोगों में आक्रोश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 21 Mar 2018 07:28 PM IST
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काशी
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हजारों साल का इतिहास समेटे काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र के जिन मकानों को अधिग्रहीत किया जा रहा है उनकी कीमत दूसरे क्षेत्रों की तुलना में भवन स्वामियों को आधी से भी कम मिल रही है। दशाश्वमेध वार्ड का सर्किल रेट जहां 20 से 30 हजार रुपये वर्ग मीटर रखा गया है वहीं रथयात्रा, जगतगंज, लहुराबीर, लक्सा में 50 हजार रुपये वर्ग मीटर है। यानी पीढ़ी दर पीढ़ी रह रहे लोगों के मकानों की जो कीमत मिल रही है उससे बाहरी इलाकों में अच्छा प्लाट भी नहीं मिल सकता। इसको लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश है।
सर्किल रेट की बात करें तो सबसे व्यस्त और काशी को पहचान देने वाले चौक वार्ड का रेट शहर में सबसे कम है। विश्व प्रसिद्ध ज्ञानवापी क्षेत्र, हड़हा, सुड़िया, रेशम कटरा, राजा दरवाजा, बेनियाबाग, ठठेरी बाजार, कचौड़ी गली,आसभैरव आदि का सर्किल रेट महज 20 हजार रुपये वर्ग मीटर है। यही रेट कोतवाली वार्ड केअंबिया मंडी, ईश्वरगंगी, बीबी हटिया, विशेश्वरगंज, गायघाट, सप्तसागर, बुलानाला, ईश्वरगंगी समेत आसपास के इलाकों का है।
वहीं कृष्ण धर्मशाला कैंट से रथयात्रा चौराहे तक, रथयात्रा से महमूरगंज, रथयात्रा से सिगरा और सिद्धगिरीबाग तक 50 हजार रुपये वर्गमीटर की जमीन है।
इसी तरह जगतगंज चौराहे से रामकटोरा, पिलानी कटरा तक, गोलघर चौराहे से पुलिस लाइन होते हुए चौकाघाट तक, गोलघर चौराहे से अर्दली बाजार, शिवपुर होते हुए रेलवे क्रासिंग तक, पांडेयपुर से तेलियाबाग तक 44 हजार वर्ग मीटर रखा गया है सर्किल रेट।
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दशाश्वमेध वार्ड में आवासीय भवनों का जो सर्किल रेट 30 हजार रुपये वर्ग मीटर है वह मुख्य मार्गों के किनारे स्थित भवनों का है। चौका लगी हुई गलियों में 20 हजार वर्ग मीटर का रेट है। कार्नर प्लाट या मकान का सर्किल रेट दस प्रतिशत ज्यादा है।
बाबतपुर रोड, आजमगढ़ और आशापुर मार्ग के साथ ही लंका इलाके में 35 से 40 लाख रुपये प्रति बिस्वा जमीन बिक रही है। जिन स्थानों पर भवन खरीदे जाने हैं वहां का सर्किल रेट भी शहर के अन्य स्थानों की तुलना में कम है। अर्दली बाजार में भी 44 हजार रुपये वर्ग मीटर का सर्किल रेट चल रहा है।
हाल ही में काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद ने दशाश्वमेध वार्ड के जिन दो पुराने भवनों को 37 और 60 लाख में खरीदा है उन्हें कागजात में व्यावसायिक भवन बताया गया है।
इनका सर्किट रेट आवासीय भवनों की अपेक्षा ज्यादा होता है। दोनों भवनों की रजिस्ट्री 55 हजार वर्ग मीटर सर्किल रेट के हिसाब से की गई है। बताया गया है कि इन दोनों भवनों के भूतल पर कभी दुकानें हुआ करती थीं।
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सर्किल रेट की बात करें तो सबसे व्यस्त और काशी को पहचान देने वाले चौक वार्ड का रेट शहर में सबसे कम है। विश्व प्रसिद्ध ज्ञानवापी क्षेत्र, हड़हा, सुड़िया, रेशम कटरा, राजा दरवाजा, बेनियाबाग, ठठेरी बाजार, कचौड़ी गली,आसभैरव आदि का सर्किल रेट महज 20 हजार रुपये वर्ग मीटर है। यही रेट कोतवाली वार्ड केअंबिया मंडी, ईश्वरगंगी, बीबी हटिया, विशेश्वरगंज, गायघाट, सप्तसागर, बुलानाला, ईश्वरगंगी समेत आसपास के इलाकों का है।
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वहीं कृष्ण धर्मशाला कैंट से रथयात्रा चौराहे तक, रथयात्रा से महमूरगंज, रथयात्रा से सिगरा और सिद्धगिरीबाग तक 50 हजार रुपये वर्गमीटर की जमीन है।
इसी तरह जगतगंज चौराहे से रामकटोरा, पिलानी कटरा तक, गोलघर चौराहे से पुलिस लाइन होते हुए चौकाघाट तक, गोलघर चौराहे से अर्दली बाजार, शिवपुर होते हुए रेलवे क्रासिंग तक, पांडेयपुर से तेलियाबाग तक 44 हजार वर्ग मीटर रखा गया है सर्किल रेट।
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दशाश्वमेध वार्ड में आवासीय भवनों का जो सर्किल रेट 30 हजार रुपये वर्ग मीटर है वह मुख्य मार्गों के किनारे स्थित भवनों का है। चौका लगी हुई गलियों में 20 हजार वर्ग मीटर का रेट है। कार्नर प्लाट या मकान का सर्किल रेट दस प्रतिशत ज्यादा है।
बाबतपुर रोड, आजमगढ़ और आशापुर मार्ग के साथ ही लंका इलाके में 35 से 40 लाख रुपये प्रति बिस्वा जमीन बिक रही है। जिन स्थानों पर भवन खरीदे जाने हैं वहां का सर्किल रेट भी शहर के अन्य स्थानों की तुलना में कम है। अर्दली बाजार में भी 44 हजार रुपये वर्ग मीटर का सर्किल रेट चल रहा है।
हाल ही में काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद ने दशाश्वमेध वार्ड के जिन दो पुराने भवनों को 37 और 60 लाख में खरीदा है उन्हें कागजात में व्यावसायिक भवन बताया गया है।
इनका सर्किट रेट आवासीय भवनों की अपेक्षा ज्यादा होता है। दोनों भवनों की रजिस्ट्री 55 हजार वर्ग मीटर सर्किल रेट के हिसाब से की गई है। बताया गया है कि इन दोनों भवनों के भूतल पर कभी दुकानें हुआ करती थीं।
अनुमति के फेर में रुक गईं विश्वनाथ मंदिर की रजिस्ट्रियां
बाबा विश्वनाथ मंदिर
- फोटो : amarujala
बाबा विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र के विस्तारीकरण की योजना शासन की अनुमति के फेर में रुक गई हैं। इससे पिछले चार दिनों में होने वाली करीब आठ रजिस्ट्रियां अटकी हैं। ऐसे में यह योजना पिछले तीन चार दिनों से प्रभावित हो गई है। हालांकि जल्द ही शासन स्तर से भी अनुमति मिलने की संभावना है। इसके बाद विस्तारीकरण की योजना का कार्य तेज हो जाएगा।
बाबा विश्वनाथ मंदिर को विश्व स्तरीय बनाने के लिए प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट पर उनके दौरे के बाद तेजी आ गई थी। एक ओर जहां प्रदेश सरकार ने तत्काल 650 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी थी, वहीं मंदिर परिक्षेत्र को लेकर प्रतिदिन दो से तीन रजिस्ट्रियां भी की जा रही थीं।
मंदिर परिक्षेत्र की सभी रजिस्ट्रियां राज्यपाल के नाम से हो रही थीं, लेकिन पैनल तय न होने के चलते बाद में कोई आपत्ति न हो इसलिए चार दिन पहले रजिस्ट्रियों पर रोक लगा दी गई है। ऐसे में पिछले चार दिन में आठ रजिस्ट्रियां नहीं हो पाई हैं। हालांकि 22 के बाद शासन स्तर से इस पर अनुमति मिलने की पूरी उम्मीद है। इसके बाद पूरी कार्रवाई तेजी से शुरू हो जाएगी।
वीडीए सचिव विशाल सिंह ने बताया कि शासन से पैनल तय करने के लिए अनुमति की मांग की गई है। इस पैनल में कौन-कौन अधिकारी रहेंगे, जो मंदिर परिक्षेत्र की रजिस्ट्रियों में शामिल होंगे। इस लिए यह कार्य प्रभावित हुआ हैं। जल्द ही अनुमति मिलने की उम्मीद है।
मंदिर का होना है विस्तार
बाबा विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र को 25000 वर्ग मीटर में विस्तार और विकास करना है। इसके लिए कुल 166 मकानों को खरीदने की योजना है। अब तक इस योजना में कुल 37 रजिस्ट्रियां हो चुकी हैं। इस कार्य को 20 अप्रैल तक पूरा करके आगे की विकास योजना भी तय करनी है। ऐसे में अधिकारी भी अनुमति का ही इंतजार कर रहे हैं।
बाबा विश्वनाथ मंदिर को विश्व स्तरीय बनाने के लिए प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट पर उनके दौरे के बाद तेजी आ गई थी। एक ओर जहां प्रदेश सरकार ने तत्काल 650 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी थी, वहीं मंदिर परिक्षेत्र को लेकर प्रतिदिन दो से तीन रजिस्ट्रियां भी की जा रही थीं।
मंदिर परिक्षेत्र की सभी रजिस्ट्रियां राज्यपाल के नाम से हो रही थीं, लेकिन पैनल तय न होने के चलते बाद में कोई आपत्ति न हो इसलिए चार दिन पहले रजिस्ट्रियों पर रोक लगा दी गई है। ऐसे में पिछले चार दिन में आठ रजिस्ट्रियां नहीं हो पाई हैं। हालांकि 22 के बाद शासन स्तर से इस पर अनुमति मिलने की पूरी उम्मीद है। इसके बाद पूरी कार्रवाई तेजी से शुरू हो जाएगी।
वीडीए सचिव विशाल सिंह ने बताया कि शासन से पैनल तय करने के लिए अनुमति की मांग की गई है। इस पैनल में कौन-कौन अधिकारी रहेंगे, जो मंदिर परिक्षेत्र की रजिस्ट्रियों में शामिल होंगे। इस लिए यह कार्य प्रभावित हुआ हैं। जल्द ही अनुमति मिलने की उम्मीद है।
मंदिर का होना है विस्तार
बाबा विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र को 25000 वर्ग मीटर में विस्तार और विकास करना है। इसके लिए कुल 166 मकानों को खरीदने की योजना है। अब तक इस योजना में कुल 37 रजिस्ट्रियां हो चुकी हैं। इस कार्य को 20 अप्रैल तक पूरा करके आगे की विकास योजना भी तय करनी है। ऐसे में अधिकारी भी अनुमति का ही इंतजार कर रहे हैं।