{"_id":"5d36fb0e8ebc3e6c9d3b4938","slug":"kargil-vijay-diwas-varanasi-jawan-alive-after-war","type":"story","status":"publish","title_hn":"कारगिल दिवस: पाकिस्तान चलाता रहा गोलियां, फिर भी डटा रहा काशी का ये जवान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कारगिल दिवस: पाकिस्तान चलाता रहा गोलियां, फिर भी डटा रहा काशी का ये जवान
Tue, 23 Jul 2019 06:26 PM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Tue, 23 Jul 2019 06:26 PM IST
विज्ञापन
आलिम अली (फाइल फोटो)।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कारगिल युद्ध को भले ही 20 साल बीत गए हों लेकिन कारगिल की लड़ाई में शामिल एक जवान आज भी छाती चौड़ी कर शौर्यगाथा सुनाता है। वाराणसी के चौबेपुर के रहने वाले आलिम अली ने कारगिल युद्ध में आठ गोलियां खाई थीं।
विज्ञापन
वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र के सरसौल गांव के निवासी 22 ग्रेनेडियर के नायक रहे आलिम अली 1990 में सेना में भर्ती हुए थे। जुलाई 1992 से सितंबर 1995 तक कश्मीर में चल रहे 'ऑपरेशन रक्षक' में शामिल थे। पाकिस्तान जब कारगिल में घुसा तब 7 जून 1999 में आलिम अली को कारगिल में युद्ध लड़ने भेजा गया।
विज्ञापन
आलिम अली ने अपने 25 साथियों के साथ कारगिल के युद्ध में हिस्सा लिया था और 21 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित जुबार हिल पर साथियों के साथ तिरंगा फहराया था। पाकिस्तानी फौज से युद्ध के दौरान उन्हें सीने, घुटने, कमर समेत शरीर के अन्य हिस्सों में आठ गोलियां लगी थीं।
विज्ञापन