{"_id":"5f1dc8688017164ff17035ac","slug":"kargil-vijay-diwas-the-promise-of-a-petrol-pump-license-was-promised-and-did-not-even-get-the-status-of-a-martyr","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kargil Vijay Diwas: पेट्रोल पंप लाइसेंस का किया था वादा और मिला शहीद का दर्जा तक नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kargil Vijay Diwas: पेट्रोल पंप लाइसेंस का किया था वादा और मिला शहीद का दर्जा तक नहीं
Sun, 26 Jul 2020 11:46 PM IST
स्वाधीन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आजमगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आजमगढ़
Published by: स्वाधीन तिवारी
Updated Sun, 26 Jul 2020 11:46 PM IST
सार
- कारगिल युद्ध के दौरान माइंस विस्फोट में दी थी प्राणों की आहुति
- 15 अगस्त को शहीद रमेश का पार्थिव शरीर आया था गांव
विज्ञापन
kargil vijay diwas
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नत्थूपुर गांव के रमेश यादव ने कारगिल युद्ध के दौरान माइंस विस्फोट में प्राणों की आहुति दे दी थी। 15 अगस्त 1999 को उनका पार्थिव शरीर गांव आया था, मगर अब तक उन्हें शहीद का दर्जा ही नहीं मिल सका है।
विज्ञापन
नत्थूपुर गांव निवासी स्व. सीताराम यादव के बेटे रमेश यादव की तीन बहनें हैं। सीताराम की कुछ दिन पहले मौत हो चुकी है। कारगिल युद्घ में भाग लेने जाते समय रास्ते में माइंस विस्फोट में रमेश शहीद हो गए थे।
विज्ञापन
15 अगस्त 1999 को उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा। गार्ड आफ ऑनर देने के बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सरकार ने वादा किया था कि उनके नाम से शहीद गेट का निर्माण कराया जाएगा। उनके नाम पर विद्यालय का नाम रखा जाएगा।
विज्ञापन
परिवार की जीविका के लिए गैस एजेंसी या पेट्रोल पंप दिया जाएगा, लेकिन सारे वादे हवाई साबित हुए। आज तक रमेश को कारगिल शहीद का दर्जा तक नहीं मिल सका। तीनों बहनों की शादी हो चुकी है। इनमें से दो बहनें पिता के निधन के बाद घर पर ही रहती हैं।
इफ्तेखार निभाते हैं भाई की रस्में
क्षेत्र के समाजसेवी इफ्तेखार आजमी इस परिवार की मदद को हमेशा तैयार रहते हैं। वह हर रक्षा बंधन पर रमेश की बहनों से राखी बंधवाते हैं। हर तीज और मकर संक्रांति के अवसर पर उनके घर जरूरी सामान भी पहुंचाते हैं।