वाराणसी: कबीर निर्वाण दिवस पर काशी से निकलेगी मगहर तक यात्रा
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वाराणसी में श्रमसाधक कबीर की प्राकट्य और निर्वाण स्थली आपस में जुड़ेगी। मगहर में तैयार हो रही कबीर एकेडमी का कैंप कार्यालय काशी में ही खुलेगा। पर्यटन की संभावनाओं के साथ ही कबीरपंथियों की आस्था के केंद्र का विस्तार होगा। कबीर दास के निर्वाण दिवस को भव्य बनाने के लिए पर्यटन और संस्कृति विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
पर्यटन राज्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने बताया कि कबीर दास की जन्मस्थली पर कबीर एकेडमी का कैंप कार्यालय खोलने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। फरवरी माह में कबीर दास के निर्वाण दिवस पर काशी से मगहर तक भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश के विभिन्न स्थलों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। काशी और मगहर में भी कबीर महोत्सव आयोजित होगा। पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
होगा शोध, सर्वेक्षण और प्रकाशन
संत कबीर के निर्वाण स्थल मगहर में अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध, सर्वेक्षण और प्रकाशन के लिए कबीर एकेडमी तैयार हो रही है। संतकबीर नगर जिले के मगहर में बनने वाली यह एकेडमी कबीर के जीवन दर्शन पर केंद्रित होगी। राज्य पुरातत्व विभाग की देखरेख में 17 एकड़ के क्षेत्रफल में इसका निर्माण होगा। इसकी नोडल एंजेसी पर्यटन विभाग को बनाया गया है।
बनेगा पुस्तकालय और सभागार
लगभग 24.50 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस एकेडमी में एंटरप्रटेशन सेंटर, प्रदर्शनी गैलरी, एग्जिबिशन एरिया के अलावा आमी नदी के घाट का विकास भी किया जाएगा। साथ ही पुस्तकालय, प्रशासनिक भवन, छात्रावास, कर्मचारी आवास और 300 दर्शकों की क्षमता वाले सभागार का निर्माण भी किया जाएगा।
काशी में भी तैयार हो रहा कबीर विद्यापीठ
तथागत की उपदेश स्थली सारनाथ में कबीर विद्यापीठ की स्थापना की जा रही है। विद्यापीठ में कबीरपंथी संतों के जीवन-दर्शन पर अध्ययन-अध्यापन, शोध एवं विविध आयोजन किए जाएंगे। लगभग 16 करोड़ की लागत से बनने वाले विद्यापीठ के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने भी मंजूरी दे दी है। कबीर मूलगादी के पीठाधीश्वर संत विवेक दास ने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से भगवान बुद्ध की उपदेशस्थली सारनाथ में कबीर विद्यापीठ खुलेगी।
सहेजी जाएंगी संतों की स्मृतियां
शिक्षा और शोध के साथ ही विद्यापीठ में संत कबीरदास के अलावा उनके समकालीन तथा उसके बाद के 150 संतों की स्मृतियों को भी यहीं सहेजा जाएगा। संत रैदास, सेन भगत, संत दादू, संत पीपा महाराज, संत हरिव्यास, संत नामदेव, संत एकनाथ, संत सुंदर दास, शंकर देव और वामदेव इनमें प्रमुख हैं।
संग्रहालय में संरक्षित की जाएंगी धरोहरें
कबीर की धरोहरों को नए कलेवर में यहीं बनने वाले संग्रहालय में संरक्षित किया जाएगा। संग्रहालय में नीरू और नीमा के विग्रह भी होंगे। संत कबीर के मूलगादी कबीरचौरा मठ के नीरू टीला को केंद्र में रखकर संग्रहालय का प्रारूप बनाया गया है।
खर्च होंगे 11 करोड़ रुपये
इसी स्थान पर कबीर का लालन-पालन करने वाले नीरू और नीमा की मजार भी है। वह कुआं भी यहीं है जिसका पानी संत कबीर इस्तेमाल करते थे। संग्रहालय पर तकरीबन 11 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
रखी जाएगी कबीर की खड़ाऊं
संग्रहालय में कबीर की खड़ाऊं, कपड़ा बुनने वाला चरखा तथा अन्य सारी चीजें रखी जाएंगी। कबीर की जन्मस्थली लहरतारा में भी लगभग सत्रह करोड़ रुपये से मनुष्य जीवन के दैहिक एवं आध्यात्मिक पक्षों पर आधारित दुनिया का पहला स्मारक बनाया जाएगा। शिवपुर में 500 बेड के मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल खोलने के लिए भूमिपूजन हो चुका है।