‘कागज’ में दिखेगा आजमगढ़ के मृतक लालबिहारी का संघर्ष, पंकज त्रिपाठी निभार रहे मुख्य भूमिका
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सरकारी कामकाज में लापरवाही के तो आपने कई किस्से सुने होंगे...लेकिन इसमें आजमगढ़ के माटी के लालबिहारी मृतक की कहानी अब नजीर का रूप लेकर रूपहले पर्दे पर आने को बेकरार है। जाने-माने निर्माता-निर्देशक सतीश कौशिक इस कहानी को अपनी फिल्म ‘कागज’ में पिरो चुके हैं और ये सात जनवरी को दर्शकों के बीच होगी। इसकी तैयारी जोर-शोर से जारी है।
लालबिहारी मृतक का नाम आजमगढ़ के लिए कोई नया नहीं है। उनके संघर्ष की कहानी यहां के हर नागरिक के जुबां पर मिल जाएगी। अब इस फिल्म के माध्यम से उनका संघर्ष जग जाहिर होगा। लाल बिहारी आजमगढ़ के निजामाबाद तहसील के गांव खलीलाबाद निवासी हैं। वर्ष 1976 में उन्हें राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया था।
इसके बाद उनकी संपत्ति को उनके पट्टीदारों को वरासत कर दी गई थी। होश संभालने के बाद लाल बिहारी को इस बारे में पता चला और उन्होंने अधिकारियों से जाकर कहा कि वह जिंदा हैं, लेकिन किसी ने उनकी एक न सुनी। खुद को जिंदा साबित करने की उनको लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। लाल बिहारी ने कई तरीके अपनाए।
ऑफिस के चक्कर काटने के बाद उन्होंने वर्ष 1986 के विधानसभा में पर्चे फेंके और गिरफ्तारी दी, फिर भी उनका मकसद पूरा नहीं हुआ। इसके बाद दिल्ली के वोट क्लब पर 56 घंटे तक अनशन किया। इन सभी के बावजूद राजस्व विभाग उन्हें जिंदा मानने को तैयार नहीं था। उन्होंने अमेठी से पूर्व पीएम राजीव गांधी के खिलाफ 1989 में लोकसभा का चुनाव लड़ा।
इससे पहले 1988 में इलाहाबाद संसदीय सीट से पूर्व पीएम विश्वनाथ प्रताप सिंह के खिलाफ भी चुनाव मैदान में उतरे। आखिरकार 18 साल बाद 1994 में उन्हें जीत मिली और राजस्व रिकार्ड में उन्हें जीवित माना गया। इस लड़ाई ने उनके नाम के साथ मृतक शब्द जुड़ गया और उन्होंने मृतक संघ की स्थापना कर दी। अब वो ऐसे लोगों की लड़ाई लड़ रहे हैं जो कागजों में मृत साबित कर दिए गए हैं और अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।
वर्ष 2003 में लिया फिल्म बनाने का फैसला
वर्ष 2003 के आसपास लालबिहारी मृतक हास्य अभिनेता एवं निर्देशक सतीश कौशिक के संपर्क में आए तो उन्हें लालबिहारी की कहानी भा गई और उन्होंने इस पर फिल्म बनाने का फैसला लिया था। फिल्म में लालबिहारी के पुत्र विजय सह निर्देशक की भूमिका में हैं। लालबिहारी का रोल अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने प्ले किया है। फिल्म की शूटिंग प्रदेश के ही सीतापुर जनपद में की गई है। जी-5 प्रीमियम पर ऑनलाइन प्रदर्शन के साथ ही प्रदेश के 20 सिनेमाघरों में भी फिल्म को प्रदर्शित करने की हैं।