न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी बोले- किसी भी कोर्ट का कोई दबाव नहीं, तथ्यों पर निर्णय देते हैं न्यायिक अधिकारी
बनारस और सेंट्रल बार एसोसिएशन द्वारा 50 वर्ष की वकालत पूरा कर चुके 50 वरिष्ठ अधिवक्ताओ के सम्मान समारोह और विधि ग्रंथ संग्रह दान समारोह का आयोजन हुआ। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में शामिल हुए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी ने कहा कि न्यायिक अधिकारी वाद के तथ्यों, अपने ज्ञान और विवेक के आधार पर निर्णय देते हैं। इन पर हाईकोर्ट या सुप्रीमकोर्ट का कोई दबाव नहीं रहता है। शनिवार को सिविल कोर्ट परिसर में आयोजित अधिवक्ता अलंकरण और विधि ग्रंथ संग्रह दान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे न्यायमूर्ति ने कहा कि कई ऐसे अधिवक्ताओं को सम्मानित कर गौरवान्वित हूं, जब मेरा जन्म भी नहीं हुआ था।
कचहरी में अधिवक्ताओं के बैठने की समस्या पर उन्होंने कहा कि जब परिवार का कुनबा बढ़ता है तब उसी पुश्तैनी मकान में रहते हैं या क्या करते हैं, यह आपको सोचना होगा। स्थिति यह है कि नई कचहरी के लिए एक बार 10 करोड़ आवंटित हुआ था, लेकिन आप सभी के विरोध से काम नहीं शुरू हुआ।
हाल यह है कि इमरजेंसी में फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस भी आसानी से नहीं पहुंच सकते। मॉडर्न चेंबर और बिल्डिंग समेत आधुनिक सुविधाओं की जरूरत है, इसके क्रियान्वयन में सहयोग किया जाएगा। बनारस व सेंट्रल बार एसोसिएशन के कार्यक्रम का शुभारंभ वेद प्रकाश मिश्र की टीम के मंगलाचरण, मुख्य व विशिष्ट अतिथियों के दीप प्रज्ज्वलन, अतिथियों के माल्यार्पण के साथ हुआ।
50 वर्ष से वकालत कर रहे 50 अधिवक्ताओं को सम्मान
50 वर्ष से वकालत कर रहे 50 अधिवक्ताओं को अंगवस्त्रम, स्मृति चिह्न और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कहा कि वर्षों की वकालत के बाद जो सम्मान मिला, उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता है।