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जयंती: पं. जसराज ने मधुमेह का राग क्यों नहीं गाया, दोनों हाथ उठाकर करते थे श्रोताओं का अभिवादन

Fri, 28 Jan 2022 11:50 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Fri, 28 Jan 2022 11:50 AM IST
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Jayanti: Why did Pt. Jasraj not sing melody of diabetes in sankat mochan temple in varanasi
पंडित जसराज। - फोटो : अमर उजाला

संकट मोचन संगीत समारोह में जब तड़के चार बजे पं. जसराज आते थे तो ऐसा लगता कि मानों मंच का आकार अनंत आकाश सा हो गया हो। गंभीर मुद्रा, लेकिन होठों पर तैरती मुस्कान। दोनों हाथ उठाए, इंतजार में नजरें गड़ाए श्रोताओं का अभिवादन करते थे और परिसर हर-हर महादेव के उद्घोष से गूंज उठता था। जब तक वह काशी में रहते थे उनका ठिकाना कोई पांच सितारा होटल नहीं वरन संकट मोचन में ही हनुमत दरबार हुआ करता था।

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मंदिर में ही रुकते थे और बेहद सामान्य तरह से धोती-गमछा और गंजी में नजर आ जाते थे। पं. जसराज की जयंती की पूर्व संध्या पर वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ भट्टाचार्य ने बताया कि रसराज पं. जसराज जब सुरों की साधना करते थे तो श्रोता उनके सम्मोहन में बंध जाते थे। वह शास्त्रीय संगीत के सव्यसाची थे।
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एक वाकया याद है जब संकटमोचन के दरबार में उन्होंने राग नट नारायण की प्रस्तुति दी, इसके पूर्व संचालक ने बताया कि इस राग को सुनने से हाई ब्लडप्रेशर के मरीजों को आराम मिल जाता है। दूसरे दिन जब संगीत समारोह की खबर में मैंने लिखा संकट मोचन के प्रांगण में कई मधुमेही उपस्थित रहे और उन्हें बड़ी तकलीफ हुई कि पं. जसराज ने मधुमेह का राग क्यों नहीं गाया।

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पं. जसराज अखबार पढ़कर थोड़ा भड़क गए और पता लगवाया कि किसने लिखा है? मुझे शाम को उनके पास ले जाया गया। उन्होंने कहा कि बहुत बड़े समझदार हैं। मैंने कहा बहुत बड़ा तो पता नहीं लेकिन संगीत समझता हूं। पंडित जी ने कहा कि आपने व्यंग्य किया है। मैंने कहा कि आप राग नट नारायण गाइए लेकिन वह हाई ब्लडप्रेशर के लिए है या लो ब्लडप्रेशर के लिए ऐसा बताने की क्या जरूरत है। इसके बाद मामला शांत हो गया और वह भी हंसने लगे।

संकटमोचन से उनका लगाव गत 50 वर्षों की एक अद्भुत यथा कथा है। 70 के दशक से उन्होंने संकटमोचन संगीत समारोह में आना शुरू किया तबसे खुद को कभी नहीं रोका।

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