फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   jasraj

पता नहीं क्यों मन कर रहा है हनुमान जी को कुछ सुनाएं

Tue, 18 Aug 2020 01:09 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 18 Aug 2020 01:09 AM IST
विज्ञापन
jasraj
वाराणसी। संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने बताया कि पं. जसराज जी का जाना हमारे लिए अपूरणीय क्षति है। इस बार के डिजिटल संकटमोचन संगीत समारोह का सारा श्रेय पं. जसराज जी को ही जाता है। उन्होंने कहा कि हम अमेरिका आ गए हैं लेकिन हमको पता नहीं क्यों मन कर रहा है कि हनुमान जी को कुछ सुनाएं। हमने कहा कि हम लोग संगीत समारोह भी करने जा रहे हैं। आप जयंती पर भी सुनाइए और संगीत समारोह में। यह पहली बार रहा है कि पांच दिनों के अंतराल पर उन्होंने दो बार हनुमान जी के दरबार में प्रस्तुति दी। हनुमान जी के प्रति उनके मन में अगाध श्रद्धा थी। एक समय तक तो ऐसा रहा है कि संगीत समारोह का समापन पं. जसराज जी के गायन से ही होता था। वह जब भी काशी आते थे मंदिर केअपने कमरे में ही वह रुकते थे। हम लोग जब छोटे थे। हमारे बाबा पखावज वादक पं. अमरनाथ मिश्र और पिताजी प्रो. वीरभद्र मिश्र संगीत समारोह में कभी भी एक साथ मंच पर नहीं बैठते थे। पं. जसराज जी का ही कार्यक्रम था कि दोनों लोग एक साथ सुनते थे। उनका तो हम लोगों के प्रति गहरा लगाव था। उनकेसबसे बड़े भाई पं. मणिराम जी 70 के पहले से ही संकटमोचन संगीत समारोह में आते थे। उसके बाद उनसे छोटे भाई पं. प्रताप नारायण और पं. जसराज जी 1973 से आने लगे। पं. प्रतापनारायण जी अंतिम समय तक आते रहे। पं. जसराज जी पिताजी के बुलाने से आए थे लेकिन बाबा के प्रति उनकी इतनी श्रद्धा थी कि जो रिश्ता बना वह तीन पीढिय़ों से चला आ रहा है। इनसेट मैं तो मनाती थी कि उनसे पहले मैं चली जाऊं महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि पं. जसराज की पत्नी मधुरा जी से फोन पर वार्ता हुई तो उन्होंने कहा कि हम ना तो आपसे दुख व्यक्त कर सकते हूं ना कुछ कह सकते हैं। आप भी उसी दुख से गुजर रहे हैं। मैं तो मनाती थी कि उनसे पहले मैं चली जाऊं लेकिन पंडित जी पहले चले गए। प्रो. मिश्र ने कहा कि ईश्वर जो तय करते हैं हम लोग क्या कर सकते हैं। आप पर बड़ी जिम्मेदारियां उनको निभाइए। परिवार के सभी सदस्यों को सांत्वना दी और ढांढस बंधाया।
विज्ञापन

रसराज पं. जसराज का जाना खल गया कलाकारों को
पद्मश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य ने कहा कि रसराज पं. जसराज चले गए। उन्होंने शिष्यों की परंपरा को इतना समृद्ध किया था कि अपने आप में ही वह एक संगीत घराना थे। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। उनका सानिध्य रहा है। मेरे दादा गुरु पं. ओंकारनाथ ठाकुर केजन्मशताब्दी समारोह में वह आए थे।
विज्ञापन

शास्त्रीय संगीत के स्वर्णयुग के थे अंतिम कलाकार
पद्मश्री डॉ. सोमा घोष का कहना है कि पं. जसराज जी का जाना भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत का बहुत बड़ा नुकसान है। उनकी जगह कोई भर नहीं सकता है। वह शास्त्रीय संगीत के स्वर्णयुग के अंतिम कलाकार थे। उनकी जगह कोई नहीं भर सकता है। भगवान से प्रार्थना है कि उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed