Janmashtami: बाबा विश्वनाथ का श्रीकृष्ण स्वरूप में हुआ श्रृंगार, शिव की नगरी में नटवर नागर की जय-जयकार
शिव की नगरी काशी में नटवर नागर के जन्मोत्सव का उल्लास जन-जन में बिखरने लगा है। पूरी काशी श्रीकृष्ण के भक्ति भाव में डूबी है। श्रीकृष्ण के स्वरूप में बाबा विश्वनाथ की रजत प्रतिमा का दर्शन टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर शाम पांच बजे से शुरू हो गया है।
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर शुक्रवार को बाबा विश्वनाथ की चल प्रतिमा को श्रीहरि का श्रीकृष्ण स्वरूप दिया गया। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के महंत डा. कुलपति तिवारी के आवास पर प्रभु की भव्य झांकी सजाई गई। डा. तिवारी ने बताया कि महंत परिवार की परंपरा अनुसार हर-हरी श्रृंगार कर झृले पर झांकी सजाई गई।
टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर सायंकाल विविध धार्मिक अनुष्ठान पांच वैदिक ब्राह्मणों ने किया। झांकी दर्शन टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर शाम पाच बजे से शुरू हो गया है। भक्ति संगीत का कार्यक्रम जारी है जो देर रात तक चलेगा। विश्वनाथ मंदिर की स्थापना काल से चली आ रही लोक परंपरा के अनुसार प्रतिवर्ष जन्माष्टमी पर बाबा विश्वनाथ का श्रीकृष्ण रूप में विशेष श्रृंगार किया जाता है।
मंदिर का सरकार द्वारा अधिग्रहण किए जाने के पहले तक काशी की जनता भी इस विशिष्ट उत्सव में शामिल होती थी। बाद में सुरक्षा की दृष्टि से विश्वनाथ मंदिर सहित महंत आवास भी रेड जोन में आ गया था। ऐसे में आम लोगों को महंत आवास तक पहुंचने में दिक्कतें होने लगीं।
कुछ वर्षों में स्थिति यह हो गई थी कि जन्माष्टमी के उत्सव में काशी वासियों की सहभागिता नाम मात्र की रह गई थी। महंत आवास टेढ़ी नीम मोहल्ले में स्थानांतरित हो जाने के बाद से एक बार पुन: काशी वासियों को बिना किसी बाधा के बाबा के लोक उत्सवों में सम्मिलित होने का अवसर मिलने लगा है।
नटवर नागर के जन्मोत्सव का उल्लास जन-जन में
शिव की नगरी काशी में नटवर नागर के जन्मोत्सव का उल्लास जन-जन में बिखरने लगा है। मठ-मंदिरों के साथ ही पुलिस लाइन में भी जन्माष्टमी की धूम है। भगवान मध्य रात्रि में जन्म लेंगे और बाबा की नगरी पूरी तरह से कान्हा के रंग में रंग जाएगी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर जहां लड्डू गोपाल ने शिव का स्वरूप धारण किया है।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का उल्लास इस्कॉन मंदिर के साथ ही माहेश्वर भवन में भी नजर आएगा। अन्य मंदिरों में खासकर गोपाल मंदिर चौखंभा में जन्मोत्सव की खास तैयारियां की गई हैं। मध्य रात्रि में श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही उल्लास का रंग परवान चढ़ेगा।