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सिद्धांतों के आधार पर प्रायोगिक चिकित्सा पर अमल जरूरी
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बीएचयू केएन उडुप्पा सभागार में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में आयुर्वेद के सिद्धांतों पर चर्चा की गई। मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. राजेश्वर आचार्य ने कहा कि आयुर्वेद को स्थापित करने के लिए सिद्धांतों के आधार पर प्रायोगिक चिकित्सा को अमल में लाना बहुत जरूरी है। यहीं समय की मांग भी है।
राजेश्वर आचार्य ने कहा कि आयुर्वेदिक सिद्धातों के आधार पर चिकित्सा के माध्यम से जनता में विश्वास एवं स्वास्थ्य लाभ देते हुए अस्पताल पर बढ़ रहे भार को कम किया जा सकता है। उन्होंने काशी के आयुर्वेदिक विद्वान पंडित सत्यनारायण शास्त्री, केएन उडुपा, काशी नाथ शास्त्री, यदुन्दन उपाध्याय आदि विद्वानों का उल्लेख किया।
अध्यक्षता करते हुए आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. वीके शुक्ला ने कहा कि कोरोना काल में न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व ने आयुर्वेद की उपयोगिता को पहचाना। आधुनिक मानकों में सिद्धांतों को स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए। निदेशक प्रो. एसके सिंह ने भी आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति की चर्चा की। आयुर्वेद संकाय प्रमुख प्रो. केएन द्विवेदी ने कहा, यदि हमारे आयुर्वेद सिद्धांतों की जडे़ं मजबूत न होतीं तो विभिन्न आक्रांताओं के आने के बाद भी अपने स्वरूप को बनाए न रख पाता। इस दौरान प्रो. यामिनी भूषण त्रिपाठी, प्रो.बीके द्विवेदी, प्रो. अविचल चट्टोपाध्याय, चंद्रशेखर पांडेय, डॉ. देवानंद उपाध्याय, डॉ. दिनेश मीणा, वैद्य सुशील दूबे, डॉ. ममता तिवारी, डॉ. सुदामा यादव आदि मौजूद रहे।
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राजेश्वर आचार्य ने कहा कि आयुर्वेदिक सिद्धातों के आधार पर चिकित्सा के माध्यम से जनता में विश्वास एवं स्वास्थ्य लाभ देते हुए अस्पताल पर बढ़ रहे भार को कम किया जा सकता है। उन्होंने काशी के आयुर्वेदिक विद्वान पंडित सत्यनारायण शास्त्री, केएन उडुपा, काशी नाथ शास्त्री, यदुन्दन उपाध्याय आदि विद्वानों का उल्लेख किया।
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अध्यक्षता करते हुए आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. वीके शुक्ला ने कहा कि कोरोना काल में न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व ने आयुर्वेद की उपयोगिता को पहचाना। आधुनिक मानकों में सिद्धांतों को स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए। निदेशक प्रो. एसके सिंह ने भी आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति की चर्चा की। आयुर्वेद संकाय प्रमुख प्रो. केएन द्विवेदी ने कहा, यदि हमारे आयुर्वेद सिद्धांतों की जडे़ं मजबूत न होतीं तो विभिन्न आक्रांताओं के आने के बाद भी अपने स्वरूप को बनाए न रख पाता। इस दौरान प्रो. यामिनी भूषण त्रिपाठी, प्रो.बीके द्विवेदी, प्रो. अविचल चट्टोपाध्याय, चंद्रशेखर पांडेय, डॉ. देवानंद उपाध्याय, डॉ. दिनेश मीणा, वैद्य सुशील दूबे, डॉ. ममता तिवारी, डॉ. सुदामा यादव आदि मौजूद रहे।
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