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वाराणसीः अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केंद्र की पहल, खराब मौसम में भी लहलहाएगी धान की फसल

Wed, 13 Jun 2018 01:36 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Wed, 13 Jun 2018 01:36 PM IST
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IRRI  varanasi centre take initiative for good farming of paddy
- फोटो : twitter
अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (इरी) के क्षेत्रीय केंद्र ने पूर्वांचल समेत देश के विभिन्न इलाकों में विपरीत मौसम में धान की खेती करने और चावल की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाने की पहल की है। इसके लिए केंद्र की ओर से यहां की मिट्टी और जलवायु के मुताबिक बीज तैयार कराया जाएगा।
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किसानों को नई तकनीक की खेती की बारीकियां भी बताई जाएंगी। संस्थान के महानिदेशक मैथ्यू मोरेल ने कहा कि पोषकीय क्षमता बढ़ाने वाले बीजों पर शोध सहित अन्य कार्य भी कराए जाएंगे। 
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एक दिन के वाराणसी दौरे पर आए मैथ्यू ने कहा कि चावल की गुणवत्ता बढ़ाना और किसानों को सही कीमत देना ही केंद्र की स्थापना का उद्देश्य है। किसानों के साथ ही कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों को न केवल भारत बल्कि दक्षिण एशिया, अफ्रीका में काम करने वाले लोगों को भी यहां प्रशिक्षित किया जाएगा। इसमें उन्हें बाढ़ अवरोधी, सूखा अवरोधी प्रजातियों को विकसित करने के बारे में जानकारी दी जाएगी।
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उन्होंने बताया, यहां होने वाले शोध कार्य में बीएचयू समेत देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों, कृषि वैज्ञानिकों की मदद ली जाएगी। खेतों में कहीं कहीं आर्सेनिक की मात्रा अधिक आ जाती है, उस पर नियंत्रण के लिए केंद्र की अत्याधुनिक संसाधनों से लैस प्रयोगशाला की मदद ली जाएगी। वाराणसी में बनने वाले क्षेत्रीय केंद्र को केंद्र और राज्य सरकार की ओर से 17 एकड़ जमीन दी गई है। इसमें धान की खेती कराई जाएगी। यहां उन्नतशील किस्म के बीज बोए जाएंगे।


खाद्य और पोषण सुरक्षा की जगी उम्मीद
मैथ्यू ने इस दौरान अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान का निरीक्षण भी किया। यहां उन्होंने व्यवस्थाओं की जानकारी ली। कहा, केंद्र खुलने से खाद्य और पोषण सुरक्षा की दिशा में नई उम्मीद जगी है, जिससे भारत और दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) देशों को संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 2030 को पूरा करने में मदद मिलेगी।
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