{"_id":"64930d85ae1447d55002306a","slug":"iri-will-research-ten-species-of-black-salt-paddy-in-gi-areas-varanasi-news-c-20-vns1013-262362-2023-06-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News: जीआई क्षेत्रों में काला नमक धान की दस प्रजातियों पर शोध करेगा इरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News: जीआई क्षेत्रों में काला नमक धान की दस प्रजातियों पर शोध करेगा इरी
विज्ञापन
जीआई क्षेत्रों में काला नमक की दस प्रजातियों पर शोध करेगा इरी
गोरखपुर मंडल के जिलों में नौ प्रजातियों का प्रदर्शन
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
वाराणसी। काला नमक धान की 10 प्रजातियों पर बिना किसी आनुवांशिक संशोधन के जीआई टैग वाले क्षेत्रों में बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (इरी) शोध किया जाएगा।
चांदपुर स्थित इरी में 80 से अधिक काला नमक की धान की प्रजातियों पर दो से तीन साल के परिणाम के आधार पर 10 प्रजातियों को बेहतर पाया गया। इनमें नौ प्रजातियों को गोरखपुर मंडल के भौगोलिक भू-निर्धारण (जीआई) क्षेत्र के जिलों में लगाया गया है। इरी के दक्षिण एशिया केंद्र (आइसार्क) के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने बताया कि आइसार्क की ओर से चयनित काला नमक धान की प्रजातियों में कोई भी आनुवांशिक संशोधन नहीं किया गया है। जीआई क्षेत्रों में ही पाई जाने वाली पारंपरिक प्रजातियों से ही शोध आधारित परिणाम के बाद इन प्रजातियों को उन्हीं क्षेत्रों में बढ़ावा देने पर काम किया जा रहा है। ये प्रजातियां पारंपरिक सुगंध और स्वाद में पहले जैसी ही है। जल्द इनकों किसानों को उपलब्ध करा दिया जाएगा। सुगंध एवं बेमिसाल स्वाद के लिए प्रसिद्ध काला नमक धान की खेती कर किसान आमदनी बढ़ा सकेंगे।
विज्ञापन
गोरखपुर मंडल के जिलों में नौ प्रजातियों का प्रदर्शन
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
वाराणसी। काला नमक धान की 10 प्रजातियों पर बिना किसी आनुवांशिक संशोधन के जीआई टैग वाले क्षेत्रों में बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (इरी) शोध किया जाएगा।
चांदपुर स्थित इरी में 80 से अधिक काला नमक की धान की प्रजातियों पर दो से तीन साल के परिणाम के आधार पर 10 प्रजातियों को बेहतर पाया गया। इनमें नौ प्रजातियों को गोरखपुर मंडल के भौगोलिक भू-निर्धारण (जीआई) क्षेत्र के जिलों में लगाया गया है। इरी के दक्षिण एशिया केंद्र (आइसार्क) के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने बताया कि आइसार्क की ओर से चयनित काला नमक धान की प्रजातियों में कोई भी आनुवांशिक संशोधन नहीं किया गया है। जीआई क्षेत्रों में ही पाई जाने वाली पारंपरिक प्रजातियों से ही शोध आधारित परिणाम के बाद इन प्रजातियों को उन्हीं क्षेत्रों में बढ़ावा देने पर काम किया जा रहा है। ये प्रजातियां पारंपरिक सुगंध और स्वाद में पहले जैसी ही है। जल्द इनकों किसानों को उपलब्ध करा दिया जाएगा। सुगंध एवं बेमिसाल स्वाद के लिए प्रसिद्ध काला नमक धान की खेती कर किसान आमदनी बढ़ा सकेंगे।
विज्ञापन