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आईपीएल के पहले मैच के साथ ही सट्टेबाजी शुरू, बेखबर पुलिस

Sat, 10 Apr 2021 01:40 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 10 Apr 2021 01:40 AM IST
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ipl sattebaji in varanasi
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) शुक्रवार से शुरू हो गई है। इसके साथ ही जिले में भी ऑनलाइन माध्यमों से करोड़ों रुपये दांव पर लगने शुरू हो गए हैं। ऑनलाइन संचालित होने वाले इस अवैध धंधे पर अंकुश लगाने के लिए कमिश्नरेट और ग्रामीण इलाके की 10 थानों की पुलिस के पास फिलहाल कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है। पुलिस का कहना है कि हम अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं और सटीक सूचना के आधार पर ठोस कार्रवाई की जाएगी।
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गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद कई एप्स और व्हाट्स एप सहित सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफार्म के जरिये संचालित होने वाले इस खेल में तकनीक इतना ज्यादा हावी है कि एक मोबाइल के जरिये सब कुछ संचालित हो जाता है और पुलिस को भनक तक नहीं लग पाती है। मैच में टॉस जीतने-हारने, टीम के रन, खिलाड़ी के व्यक्तिगत प्रदर्शन, चौके-छक्के और हार-जीत पर रोजाना करोड़ों का वारा-न्यारा होता है। शहर में बीते वर्षों में सुंदरपुर, मंडुवाडीह, चेतगंज, बुलानाला, आदमपुर, सिगरा और कोतवाली क्षेत्र से आईपीएल में सट्टा लगाने वालों को पुलिस ने कई बार पकड़ा। इसके बावजूद इस अवैध धंधे की तह तक जाकर इसे संचालित करने वालों के गिरेबान तक पुलिस नहीं पहुंच पाई।
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जानकारों का कहना है कि पुलिस तकनीकी रूप से बहुत समृद्ध नहीं है, इसी वजह से सटोरिये आईपीएल के हर सीजन में मात देते नजर आते हैं। इसी वजह से आईपीएल में हर साल कई लोग सट्टेबाजी में इस कदर बर्बाद होते हैं कि उनके पास आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है।
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एप्स के अलावा लोग जानते हैं कौन लगवाता है सट्टा
गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद तरह-तरह के एप्स के अलावा शहर से गांव तक लोग जानते हैं कि किन चिन्हित स्थानों से कौन आईपीएल में सट्टा लगवाता है। सट्टा लगाने वाले व्यक्ति को लाइन कहा जाता है, जो एजेंट यानी पंटर के माध्यम से बुकी (डिब्बे) तक संपर्क करता है। एजेंट को एडवांस देकर अकाउंट खुलवाना पड़ता है, जिसकी एक लिमिट होती है। सट्टे के भाव को डिब्बे की आवाज बोला जाता है। आईपीएल में सट्टेबाज 20 ओवर को लंबी पारी, दस ओवर को सेशन और छह ओवर तक सट्टा लगाने को छोटी पारी खेलना कहते हैं। मैच की पहली गेंद से लेकर टीम के जीत तक भाव चढ़ते उतरते हैं। एक लाख को एक पैसा, 50 हजार को अठन्नी, 25 हजार को चवन्नी कहा जाता है। यदि किसी ने दांव लगा दिया और वह कम करना चाहता है तो फोन कर एजेंट को मैंने चवन्नी खा ली कहना होता है। खास बात यह है कि यह पूरा नेटवर्क आधुनिक संचार प्रणाली लैपटॉप और मोबाइल पर ही चल रहा है। सावधानी इतनी बरती जाती है कि एक बार कोई मोबाइल नंबर इस्तेमाल हो गया तो उसे दोबारा उपयोग में नहीं लाया जाता है।
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