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अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस: युवाओं ने देखी देश की ऐतिहासिक थाती, विभिन्न स्मारकों के बनाए छायाचित्र

Sun, 19 May 2024 10:57 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 19 May 2024 10:57 AM IST
सार

Varanasi News: सारनाथ स्थित पुरातात्विक संग्रहालय में पर्यटकों को निशुल्क प्रवेश रहा। उन्होंने भ्रमण किया। इस दौरान 25 छात्रों ने पुरातात्विक स्मारकों का छायाचित्र बनाया। उन्होंने राष्ट्रीय चिह्न, चार सिंह शीर्ष, धम्म चक्क प्रवर्तन मुद्रा, बौद्ध प्रतिमा सहित अन्य स्मारकों के छायाचित्र बनाए। उन्हें पुरस्कृत किया गया। इस मौके पर सहायक पुरातत्वविद राजेश यादव, सहायक पुरातत्वविद अनिल सिंह, शैलेन्द्र श्रीवास्तव मौजूद रहे।

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International Museum Day Youth saw the historical heritage of the country
दो दिवसीय कार्यशाला में उपस्थित प्रतिभागी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर शनिवार को 175 छात्र और पर्यटक देश की ऐतिहासिक थाती से रूबरू हुए। संग्रहालयों में भ्रमण किया और ऐतिहासिक और पौराणिक स्थलों की बारीकियां जानीं। विविध आयोजन भी हुए। छायाचित्र प्रदर्शनी व प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। सारनाथ संग्रहालय में पर्यटकों के लिए निशुल्क प्रवेश की छूट रही।

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क्षेत्रीय पुरातत्व विभाग की ओर से लालबहादुर शास्त्री स्मृति भवन संग्रहालय रामनगर में भ्रमण, परिसंवाद और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता हुई। विद्यालयों के 150 से अधिक विद्यार्थियों के अलावा विभिन्न राज्यों के पर्यटकों ने संग्रहालय का भ्रमण किया और लाल बहादुर शास्त्री के व्यक्तित्व और कृतित्व को जाना। लालबहादुर शास्त्री के जीवन पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता विद्यार्थियों ने बढ़चढ़कर भाग लिया।
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सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हैं संग्रहालय
संग्रहालय विद्यार्थियों के लिए प्रत्यक्ष अवलोकन और व्यावहारिक अनुभव से सीखने का एक अनूठा अवसर है। यह सांस्कृतिक कलाकृतियों और ऐतिहासिक वस्तुओं को संरक्षित करने में मदद करता है। साथ ही संग्रहालय सांस्कृतिक जागरूकता और समझ को बढ़ावा देते हैं।
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारीलाल शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर विश्वविद्यालय के पुरातत्व संग्रहालय में काशी विरासत के आलोक विषय पर लगी तीन दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी के उद्घाटन एवं कार्यशाला के समापन पर यह विचार रखे। इस दौरान हीरककांत चक्रवर्ती, डॉ. रविशंकर पांडेय, डॉ. विमल कुमार त्रिपाठी डॉ. विशाखा शुक्ला मौजूद रहे।

150 विद्यार्थी शास्त्री जी के व्यक्तित्व से हुए रूबरू
अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर क्षेत्रीय पुरातत्व की वाराणसी इकाई और लालबहादुर शास्त्री स्मृति भवन संग्रहालय रामनगर की ओर से शनिवार को संग्रहालय भवन में भ्रमण, परिसंवाद और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता हुई। विद्यालयों के 150 से अधिक विद्यार्थियों के अलावा विभिन्न राज्यों के पर्यटकों ने संग्रहालय का भ्रमण किया और लाल बहादुर शास्त्री के व्यक्तित्व और कृतित्व को जाना।

परिसंवाद में डॉ. सुजीत कुमार चौबे ने विरासत आरक्षण और शिक्षा के केंद्र में संग्रहालय तथा डॉ. हरेंद्र कुमार सिंह ने इतिहास लेखन में अभिलेखीय साक्ष्यों के महत्व से विद्यार्थीयों को परिचित कराया। इस दौरान क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सुभाषचंद्र यादव, विनय मौर्य, बिहारीलाल, प्रशांत राय मौजूद रहे।

150 विद्यार्थियों ने शास्त्री जी के संग्रहालय को देख उनके व्यक्तित्व से हुए रूबरू
अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर क्षेत्रीय पुरातत्व की वाराणसी इकाई और लालबहादुर शास्त्री स्मृति भवन संग्रहालय रामनगर की ओर से शनिवार को संग्रहालय भवन में भ्रमण, परिसंवाद और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता हुई। विद्यालयों के 150 से अधिक विद्यार्थियों के अलावा विभिन्न राज्यों के पर्यटकों ने संग्रहालय का भ्रमण किया और लाल बहादुर शास्त्री के व्यक्तित्व और कृतित्व को जाने। 

परिसंवाद में डॉ. सुजीत कुमार चौबे ने विरासत आरक्षण और शिक्षा के केंद्र में संग्रहालय तथा डॉ. हरेंद्र कुमार सिंह ने इतिहास लेखन में अभिलेखीय साक्ष्यों के महत्व से विद्यार्थीयों को परिचित कराया। इस दौरान लालबहादुर शास्त्री के जीवन पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता विद्यार्थियों ने बढ़चढ़कर भाग लिया। 

क्षेत्रीय पुरातत्त्व अधिकारी डॉ. सुभाषचन्द्र यादव ने विजेता सात्विक जायसवाल, भव्य शर्मा, वैभव सिंह, अंश चौबे, आकृति शर्मा, ईशान अधिकारी, विक्रांत रंजन, दक्ष, शान्वी गौतम और अंशुल चौहान को पुरस्कृत किए। संयोजन और स्वागत डॉ. सुभाष चन्द्र यादव ने किया। इस मौके पर विनय मौर्य, बिहारीलाल, प्रशांत राय, मनोज कुमार, महेंद्र लाल, वंदना गुप्ता, अभिषेक सिंह आदि रहे।

आभासी संग्रहालय और भौतिक संग्रहालय की उपयोगिता पर मंथन

International Museum Day Youth saw the historical heritage of the country
आभासी अनुभूति संग्रहालय। - फोटो : अमर उजाला

बीएचयू के भारत कला भवन संग्रहालय ने अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के उपलक्ष्य में आईएनटीएसीएच वाराणसी के सहयोग से ‘डिस्कवर, डिबेट, डिलाइट’ शीर्षक से दो दिवसीय गतिविधि का आयोजन किया। दूसरे दिन का कार्यक्रम नौ स्कूलों के शिक्षकों को समर्पित किया गया था।

इस दौरान आभासी संग्रहालय और भौतिक संग्रहालय की उपयोगिता पर मंथन किया गया। इस मौके पर उप निदेशक डॉ. जसमिंदर कौर, अशोक कपूर, दृश्य कला संकाय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुरेश नायर आदि मौजूद रहे। 

भारत में लोहा गलाने की प्राचीन तकनीक पर हुए शोध को कोरिया में मिला सम्मान

भारत में लोहा गलाने की बेहद प्राचीन तकनीक पर हुए शोध को दक्षिण कोरिया में पुरस्कृत किया गया है। बीएचयू के शोध विज्ञानी की अगुवाई में कोरियन वैज्ञानिकों के शोध पत्र ‘बिहार-झारखंड से प्राप्त प्राचीन धातुकर्म विशेषताओं पर अध्ययन’ को कोरियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स एंड मैटीरियल्स के 2024 स्प्रिंग अकादमिक सम्मेलन में उत्कृष्ट शोध कार्य के रूप में सम्मानित किया गया है। संस्थान के अध्यक्ष डॉ. जू से-डॉन के हाथों पुरस्कार दिया गया। इस दौरान शोध की विशेषता और महत्व पर चर्चा की गई।

बीएचयू के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के डॉ. सचिन तिवारी और नेशनल कोंगजू विश्वविद्यालय, सियोल, दक्षिण कोरिया के प्रोफेसर नाम-चेओल जो के नेतृत्व में शोध करने वाले दल में जी-सु शिन (राष्ट्रीय कोंगजू विवि), मिन-सू हान (कोरिया राष्ट्रीय सांस्कृतिक विरासत विवि), योंग-ह्यून यूं (राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय) और योंग-जून किम (कोरिया विश्वविद्यालय) शामिल रहे।

यह शोध उत्तरी भारत विशेष तौर पर बिहार और झारखंड में प्रचलित लौह गलाने की प्राचीन तकनीकों पर केंद्रित है। यह अध्ययन इन क्षेत्रों से अति प्राचीन वस्तुओं की धातु संबंधी विशेषताओं का विश्लेषण कर प्रारंभिक लौह गलाने वाले समुदायों की तकनीकी प्रगति और सांस्कृतिक प्रथाओं के संबंध में जानकारी देता है। यह शोध ‘पूर्वी कैमूर की भू-विरासत : आर्कियोमेटलर्जिकल दृष्टिकोण से अंतर्दृष्टि’ योजना के तहत चल रहे शोध का हिस्सा है। 

पिछले वर्ष जनवरी-2023 में शोध दल ने बीएचयू का दौरा किया था, जहां उन्होंने आईआईटी बीएचयू में कार्यशाला आयोजित करने के लिए डॉ. सचिन तिवारी और डॉ. विराग जी. सोनटक्के के साथ सहयोग किया। इसमें लोहा गलाने के ऐतिहासिक और वैज्ञानिक पहलुओं का पता लगाने के लिए विशेषज्ञ एकत्रित थे। 

इसके बाद टीम ने बिहार और झारखंड की यात्रा की। टीम ने प्राचीन लोहा गलाने की तकनीक को संरक्षित करने के लिए जानी जाने वाली झारखंड की असुर जनजाति का भी अध्ययन किया। असुर जनजाति विशेष अवसरों पर पारंपरिक लौह गलाने का अभ्यास अब भी करती है।

एमजेएमसी एवं पुरातत्व संग्रहालय विज्ञान में प्रवेश शुरू
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में सामाजिक विज्ञान विभाग के तहत संचालित पत्रकारिता एवं जनसंचार विज्ञान स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम एवं पुरातत्व एवं संग्रहालय विज्ञान स्नातकोत्तर डिप्लोमा में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। शनिवार को विश्वविद्यालय प्रशासन ने दाखिले की अधिसूचना जारी कर दी है। सामाजिक विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. राजनाथ ने बताया कि दोनों पाठ्यक्रम रोजगारपरक शिक्षा के तहत संचालित हैं। अभ्यर्थी कार्यालय में आकर प्रवेश आवेदन पत्र प्राप्त कर सकते हैं। इसमें किसी भी विषय के साथ स्नातक उत्तीर्ण छात्र-छात्राएं प्रवेश ले सकते हैं। 
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