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बहुचर्चित अशरफ अपहरण कांड में रवींद्र जायसवाल बरी, इंस्पेक्टर और दरोगा को 10 साल की कैद

Sun, 23 Jul 2017 10:40 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Sun, 23 Jul 2017 10:40 AM IST
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inspector and daroga sentenced 10 years jail in charge of ashraf kisnap
अदालत से बाहर आते शहर उत्तरी के भाजपा विधायक रवींद्र जायसवाल - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम शैली राय की अदालत ने करीब 17 साल पुराने बहुचर्चित अशरफ अपहरण कांड में शनिवार को फैसला सुनाया। भेलूपुर निवासी युवक अशरफ का अपहरण कर उसे गायब कर देने के अभियोग में इंस्पेक्टर भृगुनाथ मिश्र और दरोगा धर्मनाथ को दस वर्ष की कड़ी कैद और 14 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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इसी मामले में साजिश के आरोपी शहर उत्तरी के भाजपा विधायक रवींद्र जायसवाल और उनके गनर राजनाथ भारती को आरोप साबित न होने पर साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। मूलत: बिहार के सेमरी, बक्सर निवासी भृगुनाथ की मौजूदा समय तैनाती चंदौली में थी जबकि सोहनपुर देवरिया निवासी धर्मनाथ की तैनाती इलाहाबाद में। फैसला आने के साथ ही दोनों को कोर्ट से ही कस्टडी में लेकर जेल भेज दिया गया।
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 अभियोजन के मुताबिक नवाबगंज निवासी अशरफ के खिलाफ भेलूपुर थाने में 504, 506 का मुकदमा वर्ष 2000 में पंजीकृत था। आरोपी अशरफ की गिरफ्तारी के लिए तत्कालीन चौकी इंचार्ज धर्मनाथ और दरोगा भृगुनाथ मिश्र अजमेर शरीफ गए।
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27 मार्च 2000 को अजमेर शरीफ से अशरफ को गिरफ्तार कर ट्रेन से वाराणसी लाया जा रहा था। आरोप है की इस दौरान आरोपी अशरफ उनकी अभिरक्षा से भाग गया। धर्मनाथ ने आरोपी के भागने की प्राथमिकी जीआरपी में दर्ज कराई।

जबकि अशरफ के पिता वादी हफीजुल्लाह ने एसएसपी को आवेदन देकर आरोप लगाया कि उसके पुत्र की अपहरण कर हत्या कर दी गई और शव गायब कर दिया गया। साथ ही, तत्कालीन भाजपा नेता एवं मौजूदा विधायक रवींद्र जायसवाल एवं उनके गनर राजनाथ पर  इस वारदात की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया।

विधायक पर अशरफ से पुरानी रंजिश का आरोप था। मामले की विवेचना सीबीसीआईडी ने की थी। कोर्ट में विचारण के दौरान 12 गवाह पेश किए गए। 

विधि राज्यमंत्री ने की अदालत में पैरवी

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भृगुनाथ और धर्मनाथ के विरुद्ध आरोप सिद्ध होने के बाद कोर्ट ने दोनों अभियुक्तों को आईपीसी की धारा 364 में दस वर्ष एवं 10 हजार जुर्मानेे की सजा सुनाई। धारा 201 में 3 वर्ष की कैद और दो हजार रुपये जुर्माना जबकि धारा 218 में  तीन वर्ष की कैद और दो  हजार जुर्माना की सजा सुनाई।

जबकि आरोप सिद्ध न होने पर विधायक रवींद्र और उनके गनर राजनाथ को बरी कर दिया गया। बरी हुए इन दोनों आरोपियों की कोर्ट में पैरवी प्रदेश के विधि राज्यमंत्री एवं अधिवक्ता डॉ. नीलकंठ तिवारी ने पैरवी की। जबकि वादी पक्ष के अधिवक्ता देवेंद्र सिंह थे।
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